बिहार में जनगणना का पहले फेज का दूसरा चरण 2 मई से शुरू होगा। इसमें प्रगणक (इन्यूमिनेटर) घर-घर जाकर मकानों का सत्यापन करेंगे। यह कार्य 31 मई तक चलेगा। इसे डिजिटल रूप में ही करना है। लेकिन इससे पहले प्रगणकों (इन्यूमिनेटर) के सामने तकनीकी संकट खड़ा हो गया है। शनिवार को ट्रेनिंग के दौरान मोकामा समेत अन्य प्रखंडों में शिक्षकों ने जब एप डाउनलोड किया तो कार्य शुरू नहीं हुआ। ट्रेनिंग देने वाले अधिकारियों ने कहा कि हेलो सेंसस ऐप को चलाने के लिए एंड्रॉयड फोन में 12 वर्जन होनी चाहिए। यदि एप्पल का मोबाइल है तो इसमें 15 वर्जन होनी चाहिए। इन अपडेट वर्जन का मोबाइल नहीं होने पर हेलो सेंसस ऐप नहीं कार्य करेंगा। इसके बाद से पुराना एंड्रॉयड और एप्पल का फोन चलाने वाले प्रगणक परेशान हैं। इसकी शिकायत अधिकारियों से करने के साथ मोबाइल फोन उपलब्ध कराने की मांग की है। इस समस्या पर प्रगणकों ने सरकारी स्तर पर मोबाइल उपलब्ध कराने की मांग की। हालांकि, जनगणना निदेशालय ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार प्रगणकों को दो चरणों में कुल 25 हजार रुपए मानदेय दे रही है, इसलिए कर्मी अपनी सुविधानुसार अपडेटेड मोबाइल खुद खरीदें। जनगणना कार्य निदेशालय बिहार के उपनिदेशक संजीव कुमार ने कहा कि डेटा सुरक्षा के लिए एंड्रॉयड मोबाइल का 12 वर्जन से उपर के वर्जन में जनगणना एप सपोर्ट कर रहा है। इससे पहले का वर्जन में डेटा सुरक्षा फीचर कम है। राज्य में 17 अप्रैल से अबतक 20 लाख से अधिक लोगों ने स्व-गणना के तहत फॉर्म भरा है। इसमें सबसे अधिक वैशाली जिलों में 3.55 लाख लोगों ने फॉर्म भरा है। दूसरे नंबर पर मधुबनी में 3.40 लाख, तीसरे नंबर पर खगड़िया में 1.18 लाख, चौथे नंबर पर भोजपुर में 1.04 लाख, पांचवे नंबर पर पटना में 91.54 हजार लोगों ने फॉर्म भरा है। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है परेशानी क्या? पुराने मोबाइल पर हेलो सेंसस ऐप सपोर्ट नहीं कर रहा है। ऐप के लिए एंड्रॉयड-12 और आईओएस-15 का न्यूनतम वर्जन होना अनिवार्य है। ऐप का फायदा क्या? इसमें जियो-टैगिंग, गूगल मैप और ऑफलाइन डेटा सेव करने की सुविधा है। प्रगणकों को मानदेय के पैसों से खुद अपडेटेड फोन खरीदना होगा। लोगों पर क्या असर?… जिनके पास पुराना फोन है, उन्हें गणना कार्य पूरा करने में देरी हो सकती है। लोग 1 मई तक https//se.census.gov.in पर जाकर परिवार की जानकारी खुद भर सकते हैं। बिहार में जनगणना का पहले फेज का दूसरा चरण 2 मई से शुरू होगा। इसमें प्रगणक (इन्यूमिनेटर) घर-घर जाकर मकानों का सत्यापन करेंगे। यह कार्य 31 मई तक चलेगा। इसे डिजिटल रूप में ही करना है। लेकिन इससे पहले प्रगणकों (इन्यूमिनेटर) के सामने तकनीकी संकट खड़ा हो गया है। शनिवार को ट्रेनिंग के दौरान मोकामा समेत अन्य प्रखंडों में शिक्षकों ने जब एप डाउनलोड किया तो कार्य शुरू नहीं हुआ। ट्रेनिंग देने वाले अधिकारियों ने कहा कि हेलो सेंसस ऐप को चलाने के लिए एंड्रॉयड फोन में 12 वर्जन होनी चाहिए। यदि एप्पल का मोबाइल है तो इसमें 15 वर्जन होनी चाहिए। इन अपडेट वर्जन का मोबाइल नहीं होने पर हेलो सेंसस ऐप नहीं कार्य करेंगा। इसके बाद से पुराना एंड्रॉयड और एप्पल का फोन चलाने वाले प्रगणक परेशान हैं। इसकी शिकायत अधिकारियों से करने के साथ मोबाइल फोन उपलब्ध कराने की मांग की है। इस समस्या पर प्रगणकों ने सरकारी स्तर पर मोबाइल उपलब्ध कराने की मांग की। हालांकि, जनगणना निदेशालय ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार प्रगणकों को दो चरणों में कुल 25 हजार रुपए मानदेय दे रही है, इसलिए कर्मी अपनी सुविधानुसार अपडेटेड मोबाइल खुद खरीदें। जनगणना कार्य निदेशालय बिहार के उपनिदेशक संजीव कुमार ने कहा कि डेटा सुरक्षा के लिए एंड्रॉयड मोबाइल का 12 वर्जन से उपर के वर्जन में जनगणना एप सपोर्ट कर रहा है। इससे पहले का वर्जन में डेटा सुरक्षा फीचर कम है। राज्य में 17 अप्रैल से अबतक 20 लाख से अधिक लोगों ने स्व-गणना के तहत फॉर्म भरा है। इसमें सबसे अधिक वैशाली जिलों में 3.55 लाख लोगों ने फॉर्म भरा है। दूसरे नंबर पर मधुबनी में 3.40 लाख, तीसरे नंबर पर खगड़िया में 1.18 लाख, चौथे नंबर पर भोजपुर में 1.04 लाख, पांचवे नंबर पर पटना में 91.54 हजार लोगों ने फॉर्म भरा है। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है परेशानी क्या? पुराने मोबाइल पर हेलो सेंसस ऐप सपोर्ट नहीं कर रहा है। ऐप के लिए एंड्रॉयड-12 और आईओएस-15 का न्यूनतम वर्जन होना अनिवार्य है। ऐप का फायदा क्या? इसमें जियो-टैगिंग, गूगल मैप और ऑफलाइन डेटा सेव करने की सुविधा है। प्रगणकों को मानदेय के पैसों से खुद अपडेटेड फोन खरीदना होगा। लोगों पर क्या असर?… जिनके पास पुराना फोन है, उन्हें गणना कार्य पूरा करने में देरी हो सकती है। लोग 1 मई तक https//se.census.gov.in पर जाकर परिवार की जानकारी खुद भर सकते हैं।


