धौलपुर. तीर्थों के भांजे के रूप में ख्याति प्राप्त मचकुंड धाम के सरोवर में कभी चलने वाले रंगीन फव्वारे लम्बे समय से बंद हैं। साथ ही करोड़ों रुपए खर्च कर यहां पर लाइट एंड साउंड का भी आयोजन नहीं हो पा रहा है। शाम के समय अब क्षेत्रीय पर्यटकों की संख्या में भी कमी आई है। फव्वारे चलने के वक्त शाम के समय अच्छी संख्या में आसपास के जिलों और स्थानीय लोग पहुंचते हैं लेकिन अब अधिकतर लोगों ने किनारा कर लिया। नतीजन धौलपुर के धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल पर फिर से सन्नाटा पसर रहा है।
उधर, पर्यटन विभाग जिन पर्यटकों की संख्या को काउंट करता है, उसमें मचकुंड धाम आने वाले लोगों की संख्या अधिक है। जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या के लिए वह होटल और अन्य स्थानों से मिलने जानकारी के अनुसार तय करते हैं। यहां गत दिनों देवछठ पर आयोजित लक्खी मेला में सैकड़ों की संख्या में एमपी, यूपी, राजस्थान के साथ एनसीआर क्षेत्र से लोग पहुंचे और पूजन इत्यादि में भाग लिया। लेकिन अब यहां पर केवल गिने-चुने लोग ही पहुंच रहे हैं। उधर, नगर परिषद आयुक्त ने कहा कि मचकुंड सरोवर पर बंद पड़े रंगीन फव्वारों को जल्द शुरू करवाया जाएगा। इस संबंध में फर्म से वार्ता हुई है।
स्वदेश दर्शन योजना में हुए थे कार्य
मचकुंड पर पूर्व में प्रधानमत्री स्वदेश दर्शन योजना के तहत करोड़ों रुपए के बजट से शानदार कार्य हुए थे। उस वक्त पुरातत्व विभाग की ओर से कार्य कराने के बाद नगर परिषद को सौंप दिया था लेकिन परिषद प्रशासन लिखित में कोई आदेश नहीं होना बताता है। बताया जाता है कि नगर परिषद ने विद्युत निगम से कनेक्शन लेकर परिसर में लगाई विभिन्न रंगीन लाइटों को शुरू करवाया था। यहां फव्वारों की नावों का प्रतिदिन प्रदर्शन होता था। लेकिन इसके बिल भुगतान को लेकर भी समस्या रही थी। इसके साथ ही यहां इमारत पर मचकुण्ड महाराज और इससे जुड़ी ऐतिहासिक कहानी को बताने के लिए लाइट एण्ड साउण्ड शो भी होता है। लेकिन वर्तमान में लाइटें लम्बे समय से खराब पड़ी हैं। जबकि पहले शो देखने शाम को अच्छी संख्या में लोग पहुंचते थे।
मुख्य दीवार पर दिखती थी पिक्चर, साउंड से गूंजता था परिसर
यहां लाइट एंड साउंड शो राजस्थान के पहले 3.डी प्रोजेक्शन मैपिंग आधारित लाइट एंड साउंड शो में से एक है। जिसमें 25000 लुमेन के 3 चिप डीएलपी प्रोजेक्टरए डीएमएक्स नियंत्रित एलईडी लाइट्स, 5.1 ऑडियो सराउंड सिस्टम आदि का उपयोग किया जाता था। महाराजा मचकुण्ड की कहानी, राक्षसों के साथ युद्ध में देवताओं (भगवान) को उनका समर्थनए इंद्रदेव के महाराजा मचकुंड को दशकों की लंबी नींद का वरदान, राक्षस कालयवन की ओर से ऋषियों की हत्या और श्रीकृष्ण को मारने की चेतावनी, महाराज की नींद में खलल को दर्शाया गया है। यह सब लाइट एंड साउंड के साथ सामने मुख्य दीवार पर तस्वीर आती थी और साउंड से परिसर गंूज उठता था लेकिन यह लम्बे समय से बंद पड़ा है।
उपकरण टूटे, जालिया उखड़ी
यहां शाम के समय घाटों पर शानदार लाइटिंग हुआ करती थी लेकिन रख-रखाव न होने से यह खराब हो गई। साथ ही उत्पाती बंदरों ने भी इन्हें नुकसान पहुंचाया। संबंधित एजेंसी की ओर से ध्यान नहीं देने से भी यह लाइटिंग धीरे-धीरे बंद पड़ गईं।
मचकुंड जाने को नहीं कोई परिवहन सुविधा
प्रदेश के कई पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों को लाने-ले जाने के लिए पोलो कार इत्यादि की सुविधा रहती है, जिससे पर्यटक आसानी से पहुंच जाते हैं। पड़ोसी जिला आगरा के फतेहपुर सीकरी में भी पोलो कार संचालित है, जो पर्यटकों को मुख्य द्वार तक छोड़ती है। इसी तरह केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में भी पर्यटकों के लिए पोलो कार और केन्ट्रा गाड़ी संचालित है।
– मचकुंड सरोवर में बंद पड़े फव्वारों को वापस शुरू कराने के लिए वार्ता हुई है। जल्द इंजीनियर आकर फव्वारों की जांच करेगा। लाइट एंड साउंड शो का मामला दूसरे विभाग का है। मचकुंड धाम पर नियमित सफाई करवाई जा रही है।
– विष्णु परमार, आयुक्त, नगर परिषद धौलपुर

