संदीप पुरोहित
प्रदेश की सियासत में खास धाक रखने वाले मारवाड़ में वार्ड पार्षद के चुनाव में भी सियासी पारा उफान पर है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के गृह क्षेत्र में भाजपा-कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने ही बागियों और निर्दलीयों से है। स्थानीय विधायकों से लेकर दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। जोधपुर नगर निगम, फलोदी नगर परिषद और बाप नगरपालिका में 11 सितंबर को मतदान होगा।
वहीं जोधपुर जिले की मथानिया, तिंवरी, बालेसर, भोपालगढ़, बिलाड़ा और पीपाड़ में बुधवार को मतदान हो चुका है। इनमें बिलाड़ा और पीपाड़ को छोड़कर शेष नई नगरपालिका है। जोधपुर नगर निगम में मुकाबला सिर्फ भाजपा-कांग्रेस के बीच सत्ता हासिल करने का नहीं है, बल्कि दोनों दलों के दिग्गजों के राजनीतिक प्रभाव और संगठन की पकड़ का भी इम्तिहान है। नगर निगम के 100 वार्डों में 385 प्रत्याशी मैदान में हैं। सिर्फ 19 वार्डों में मुकाबला अपेक्षाकृत सीधा है। बाकी वार्डों में बागी, निर्दलीय और अन्य दलों ने समीकरण उलझा दिए हैं।
आरएलपी और आम आदमी पार्टी भी कुछ वार्डों में मैदान में हैं। खासकर सूरसागर और सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्रों में बागी और निर्दलीय प्रत्याशी दोनों दलों के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। पिछले निकाय चुनाव में निगम उत्तर और दक्षिण दो हिस्सों में बंटा था। उत्तर में कांग्रेस और दक्षिण में भाजपा काबिज थी। नए जिले फलोदी में भी भाजपा-कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला है। नगर परिषद के 40 वार्डों में 127 प्रत्याशी मैदान में हैं। यहां भी बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों ने दोनों दलों की चिंता बढ़ाई है। निवर्तमान सभापति और उनके बेटे का निर्दलीय मैदान में उतरना मुकाबले को और रोचक बना रहा है।

