छतरपुर शहर के टौरिया मोहल्ला क्षेत्र में हुए सड़क हादसे के बाद हुई मारपीट और बिगड़े हालात ने तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। इस घटना को लेकर शुक्रवार को सर्व हिंदू संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा और 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट गेट के बाहर ‘कलेक्टर साहब होश में आओ, जिला प्रशासन होश में आओ’ के नारे लगाए। जब जिला प्रशासन के अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं पहुंचे, तो वे जबरन गेट खोलकर अंदर प्रवेश कर गए। पुलिस ने उन्हें अंदर रास्ते पर बैरिकेडिंग लगाकर रोका। इस दौरान एडीएम नमः शिवाय अरजरिया उनका ज्ञापन लेने पहुंचे, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें ज्ञापन देने से इनकार कर दिया। वे कलेक्टर को बुलाने और उन्हीं को ज्ञापन सौंपने की मांग पर अड़े रहे, जिसके बाद एडीएम बिना ज्ञापन लिए वापस लौट गए। बैरिकेडिंग तोड़कर कलेक्ट्रेट में घुसे
एडीएम के लौटने और कलेक्टर के न आने से नाराज प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़कर सीधे कलेक्ट्रेट कार्यालय में घुस गए। उन्होंने कलेक्टर चेंबर के बाहर नारेबाजी की। कलेक्टर के चेंबर में न होने पर वे वापस बाहर आए और अंततः एडीएम को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि महोबा रोड स्थित पुलिस चौकी के पास एक वाहन से टक्कर के बाद विवाद शुरू हुआ था। पीड़ित पक्ष द्वारा इलाज कराने की बात कहने पर आरोप है कि कुछ युवकों ने अपने साथियों को बुलाकर दंपती के साथ मारपीट की। इसी दौरान 2 वर्षीय बच्ची को कथित रूप से बस के सामने फेंक दिया गया, जिससे बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई और उसके पैर में फ्रैक्चर आया है। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि बाद में जब पुलिस आरोपी पक्ष के घर पहुंची तो वहां पथराव किया गया। इस दौरान पुलिस टीम पर हमला होने और विस्फोटक जैसी वस्तुएं फेंके जाने के भी आरोप लगाए गए हैं, जिसमें कुछ लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग
सर्व हिंदू संगठन ने प्रशासन से मांग की कि मामले में शामिल सभी आरोपियों की निष्पक्ष जांच कर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही संदिग्ध मकानों की जांच कर अवैध गतिविधियों पर भी कार्रवाई की मांग की गई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो शहर बंद और उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इधर, प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक लापरवाही को लेकर भी सवाल उठे। संगठन के पदाधिकारियों ने छतरपुर एसडीएम प्रशांत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आपात स्थिति में फोन रिसीव नहीं किया गया। इस पर ADM से शिकायत भी की गई। बताया गया कि जब जवाब मांगा गया तो एसडीएम ने कहा कि “हम सो रहे थे”, जिस पर संगठन ने नाराजगी जताते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। फिलहाल पूरे मामले में पुलिस जांच जारी है और क्षेत्र में स्थिति पर नजर रखी जा रही है।


