भरतपुर के अपना घर आश्रम में 25 साल बाद बेटा-बेटी अपनी मां से मिले। मानसिक बीमारी के चलते महिला अपने घर से निकल आई थी। जब उसकी बेटियों की उम्र 7 और 10 साल थी वहीं बेटा सिर्फ ढाई साल का था। आज जब महिला से उसके बेटा और बेटी मिले तो, महिला अपने बेटे और बेटी को पहचान भी नहीं पाई। दोनों की पहचान करवाने के बाद बेटी अपनी मां के गले लगकर रोने लगी। 1 साल पहले महिला को अपना घर आश्रम लाया गया अपना घर आश्रम के सचिव नरेंद्र तिवारी ने बताया कि सुखदेई उत्तर प्रदेश के उन्नाव इलाके में आकमपुर की रहने वाली हैं। 25 साल पहले सुखदेई मानसिक रूप से बीमार हो गई थी। इसी बीमारी के चलते सुखदेई घर से निकल आई। 16 सितंबर 2025 को सुखदेई को अपना घर आश्रम की टीम ने जोधपुर से रेस्क्यू किया। जिसके बाद सुखदेई के लिए भरतपुर के अपना घर आश्रम लाया गया। 25 साल पहले महिला घर से निकली थी अपना घर आश्रम में सुखदेई का इलाज चला। करीब 4 दिन पहले सुखदेई ने अपने घर के बारे में बताया। आज सुखदेई की बेटी बेटा और दामाद उसे लेने के लिए भरतपुर पहुंचे। सुखदेई को देखकर बेटी और बेटा के आंखों से आंसू झलक गए। बेटी ने 25 साल बाद अपनी मां को देखा तो, वह अपनी मां के गले लग गई। बेटे ने पहली बार अपनी मां को देखा तो, उसने अपनी मां के पैर छुए। बेटे को मां की शक्ल याद नहीं सुखदेई के बेटे रोहित ने बताया कि जब उसकी मां घर से निकली थी। तब रोहित की उम्र महज ढाई साल थी। वहीं बड़ी बहन सोनवती 10 साल की थी। वहीं सोनवती की बहन 7 साल की थी। रोहित को मां की शक्ल भी याद नहीं है। मां के घर से जाने के बाद रोहित के पिता बचन सिंह ने उन्हें काफी ढूंढा लेकिन, सुखदेई का कुछ पता नहीं लगा। सुखदेई के जाने के बाद बचन सिंह ने अपनी दोनों बेटियों की शादी कर दी लेकिन, बचन सिंह को सुखदेई के नहीं मिलने का हमेशा दुख रहा। पत्नी की याद में पति की मौत साल 2022 में बचन सिंह का भी निधन हो गया। जिसके बाद रोहित पूरी तरह से अकेला हो गया। वह घर पर अकेला रहता था। 4 दिन पहले जब अपना घर आश्रम की टीम ने रोहित से संपर्क किया तो, खुशी का ठिकाना नहीं रहा। रोहित अपनी बहन सोनवती और जीजा धनपाल को लेकर आज अपना घर आश्रम में पहुंचा। मां से गले लगकर रोने लगी बेटी 25 साल बाद जब भाई बहन ने अपनी मां को देखा तो, वह अपनी मां को नहीं पहचान पाए। तब अपना घर आश्रम की टीम ने सुखदेई का उसके बच्चों से परिचय करवाया। तब सुखदेई की बेटी खुद को रोक नहीं पाई और वह अपनी मां के गले लगकर रोने लगी। रोहित ने पहली बार अपनी मां के पैर छुए। रोहित को यह नहीं पता कि सुखदेई ही उसकी मां है। बहन के बताने पर रोहित ने अपनी मां को पहचाना।


