CLU और इंडस्ट्रियल प्लॉटों का कन्वर्जन नहीं:मास्टर प्लान और जमीन की कमी वजह, 2005 में दी थी अनुमति

CLU और इंडस्ट्रियल प्लॉटों का कन्वर्जन नहीं:मास्टर प्लान और जमीन की कमी वजह, 2005 में दी थी अनुमति

शहर में सुधारों के बड़े-बड़े एजेंडे के बीच प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इंडस्ट्रियल प्लॉटों को कमर्शियल (रिटेल) में बदलने और गांवों में लैंड यूज चेंज (CLU) की अनुमति देने जैसी मांगों को फिलहाल पूरा नहीं किया जाएगा। प्रशासन के भीतर यह सहमति बनी है कि इस समय औद्योगिक क्षेत्रों में कन्वर्जन और लैंड यूज में बदलाव ठीक नहीं है। इसलिए इन्हें सुधार के एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है। चार पॉइंट में समझें CLU लागू करना क्यों है मुश्किल 1. जमीन के छोटे टुकड़े चंडीगढ़ के गांवों में जमीन बहुत छोटे और बिखरे हुए हिस्सों में है। बड़े स्तर पर विकास के लिए जरूरी एक साथ जुड़ी हुई जमीन (Contiguous land) का यहां अभाव है। 2. आर्थिक रूप से घाटे का सौदा छोटे भूखंडों पर बुनियादी ढांचा (Infrastructure) विकसित करने से लागत इतनी बढ़ जाएगी कि प्रोजेक्ट आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं रहेंगे। 3. कानूनी अड़चनें चंडीगढ़ के गांव पेरिफेरी कंट्रोल एक्ट, 1952 और चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के दायरे में आते हैं, जो लैंड यूज बदलने पर सख्त पाबंदी लगाते हैं। 4. बुनियादी ढांचे पर दबाव अगर इंडस्ट्रियल क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कमर्शियल गतिविधियां शुरू की गईं, तो ट्रैफिक जाम, पार्किंग की समस्या और नागरिक सुविधाओं पर भारी बोझ पड़ेगा। इंडस्ट्रियल एरिया में 2005 में हुए बदलाव इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में वर्तमान में सैकड़ों प्लॉटों का उपयोग नियमों के खिलाफ रिटेल शॉप्स के रूप में किया जा रहा है, जिसके लिए एस्टेट ऑफिस ने नोटिस भी जारी किए हैं। साल 2005 में एक पॉलिसी के तहत कम से कम दो कनाल के इंडस्ट्रियल प्लॉट को कमर्शियल (बैंक, होटल, शोरूम) में बदलने की अनुमति दी गई थी। इससे प्रशासन को करोड़ों का राजस्व मिला था, लेकिन मास्टर प्लान-2031 में स्पष्ट लिखा है कि यह कन्वर्जन पॉलिसी दोबारा शुरू नहीं की जाएगी। शहर के औद्योगिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए इन इकाइयों को उद्योगों के रूप में ही सुरक्षित रखा जाएगा।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *