ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच सीज़फायर का आज आखिरी दिन है। ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध शुरू होने के बाद से सीज़फायर तक होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कई बार होर्मुज स्ट्रेट पर कब्ज़ा करने और इसे खोलने की धमकी दी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का ही कंट्रोल रहा। फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका की नाकेबंदी है, लेकिन कंट्रोल अभी भी ईरान के पास ही है। इसी बीच अब अमेरिकी डिप्लोमैट और केप वर्डे में अमेरिका के पूर्व राजदूत डोनाल्ड हेफ्लिन (Donald Heflin) ने इस बारे में एक बड़ा बयान दिया है।
होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल ही ईरान का महाहथियार
एक इंटरव्यू के दौरान हेफ्लिन ने कहा, “ईरान कई सालों से हथियार बनाने लायक सामान तैयार कर रहा है और दूसरे देशों ने उसे रोकने की कोशिश की है। पिछले एक-दो महीनों में ईरान ने एक बात समझ ली है कि उसे किसी को हमला करने से रोकने या सत्ता बदलने की कोशिश करने से रोकने के लिए परमाणु हथियारों की ज़रूरत नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल ही ईरान का महाहथियार है।”
होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए एक-दूसरे पर बढ़त बनाने की कोशिश
हेफ्लिन ने आगे कहा, “अमेरिका को लगता है कि कई तरह के आर्थिक प्रतिबंधों से जूझ रहा ईरान होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए तेल के निर्यात और कुछ ज़रूरी सामानों के आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भर है। इसलिए अगर हम उन्हें ऐसा करने से रोक सके, तो वो बातचीत के लिए तैयार हो जाएंगे। दोनों पक्ष होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए एक-दूसरे पर बढ़त बनाने की कोशिश कर रहे हैं।”
बातचीत ज़रूरी
पाकिस्तान में होने वाली दूसरे दौर की शांति-वार्ता के बारे में बात करते हुए हेफ्लिन ने कहा, “ईरान के लिए बातचीत ज़रूरी है। मुझे लगता है कि ईरान के लिए यह बेहतर होगा कि वो अमेरिका के उपराष्ट्रपति को पाकिस्तान के बीच में ही न छोड़ दें, बल्कि बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचे, भले ही बातचीत से कोई ठोस नतीजा न निकले। अगर वो इस्लामाबाद नहीं जाते हैं, तो एक बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।”


