भोजशाला में गूंजे शंख और हनुमान चालीसा… हाई कोर्ट के फैसले के बाद भक्तों ने की विशेष पूजा-आरती

भोजशाला में गूंजे शंख और हनुमान चालीसा… हाई कोर्ट के फैसले के बाद भक्तों ने की विशेष पूजा-आरती

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को ‘सरस्वती मंदिर’ घोषित किए जाने के ठीक एक दिन बाद, शनिवार को वहाँ का माहौल पूरी तरह भक्तिमय और भावुक नजर आया। वर्षों का इंतजार खत्म होने की खुशी में बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु परिसर में एकत्र हुए और बिना किसी प्रतिबंध के मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना, आरती और भजन-कीर्तन किया। इस दौरान पूरे परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे, लेकिन भक्तों के उत्साह और जश्न में कोई कमी नहीं दिखी। भोजशाला परिसर का माहौल भावुक हो गया, क्योंकि भक्तों ने प्रार्थनाओं, भजनों और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ इस फैसले का जश्न मनाया। भोज उत्सव समिति के सदस्य भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां परिसर के अंदर हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।

भक्तों ने प्रार्थनाओं के साथ फैसले का जश्न मनाया

अदालत के फैसले के बाद इस स्थल पर बिना किसी रोक-टोक के पूजा-अर्चना कर पाने पर कई भक्तों ने खुशी जाहिर की। कुछ भक्तों ने कहा कि ऐसे पल को देखने के लिए उन्होंने वर्षों तक इंतजार किया था।

परिसर में मौजूद एक भक्त ने बताया कि फैसले के बाद लोग भावनाओं से अभिभूत हो गए और उन्होंने नाच-गाकर इसका जश्न मनाया। भक्त ने यह भी दावा किया कि अब इस स्थल पर बिना किसी प्रतिबंध के प्रतिदिन पूजा-अर्चना की जा सकेगी।

भोज उत्सव समिति ने अदालत के फैसले का स्वागत किया

भोज उत्सव समिति के सदस्यों ने इस फैसले को ऐतिहासिक करार दिया और उन लोगों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस स्थल को लेकर एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी। समिति के सदस्य राजेश शुक्ला ने कहा कि इस फैसले से देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना बिना किसी बाधा के आयोजित करना संभव हो गया है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि अंततः देवी की प्रतिमा मंदिर परिसर में वापस लाई जाएगी। उन्होंने सभी पक्षों से हाई कोर्ट के फैसले का सम्मान करने और शांति बनाए रखने की अपील की।

हाई कोर्ट ने ASI के 2003 के आदेश को रद्द किया

शुक्रवार को, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा वर्ष 2003 में जारी किए गए एक आदेश के कुछ हिस्सों को रद्द कर दिया। उस आदेश के तहत मुसलमानों को भोजशाला परिसर में शुक्रवार की नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी, जबकि हिंदुओं की पूजा-अर्चना पर प्रतिबंध लगाए गए थे।

अपने फैसले में, अदालत ने यह टिप्पणी की कि इस स्थल पर हिंदुओं की पूजा-अर्चना वर्षों से लगातार जारी रही है और यह कभी भी पूरी तरह से बंद नहीं हुई थी। पीठ ने उन ऐतिहासिक अभिलेखों का भी उल्लेख किया, जिनमें भोजशाला को परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा हुआ संस्कृत शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बताया गया है।

आगे की कानूनी कार्रवाई?

इस फैसले के बाद, हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि उनका तत्काल ध्यान इस स्थल पर पूजा-अर्चना शुरू करने पर केंद्रित है। उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट में संभावित कार्यवाही के लिए भी तैयारियां की जा रही हैं।

हाई कोर्ट ने देवी सरस्वती की उस मूर्ति को वापस लाने की पुरानी मांग का भी ज़िक्र किया, जो इस समय लंदन के एक म्यूज़ियम में रखी है। बेंच ने कहा कि केंद्र सरकार मूर्ति की वापसी के संबंध में पहले से ही जमा किए गए आवेदनों पर विचार कर सकती है।

 

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