Complaint to Collector: 7 सरपंच बोले- कलेक्टर साहब, समिति अध्यक्ष ने भतीजे को ऑपरेटर तो सखी भाई के बेटे को बना दिया सहायक

Complaint to Collector: 7 सरपंच बोले- कलेक्टर साहब, समिति अध्यक्ष ने भतीजे को ऑपरेटर तो सखी भाई के बेटे को बना दिया सहायक

बचरापोड़ी। एमसीबी जिले के आदिम जाति सेवा सहकारी समिति जिल्दा में गैर आदिवासी व्यक्ति को अध्यक्ष नियुक्त करने और उसकी मनमानी के खिलाफ सरपंच (Complaint to Collector) विरोध में उतर गए हैं। 7 सरपंचों ने संयुक्त हस्ताक्षर कर कलेक्टर को पत्र सौंपकर समिति जिल्दा अध्यक्ष भईयालाल साहू को हटाने मांग रखी है। उन्होंने बताया कि समिति अध्यक्ष द्वारा अपने भतीजे को समिति में कंप्यूटर ऑपरेटर तथा सखी भाई के पुत्र को सहायक नियुक्त कर दिया गया है। जबकि यह नियम विरुद्ध है।

सरपंचों द्वारा कलेक्टर (MCB collector) को दिए पत्र में कहा गया है कि सोसायटी अधिनियम की धारा 1960 की धारा 48 की उपधारा खण्ड(२) के अधीन अनुसूचित क्षेत्रों में संचालित सोसायटियों में अध्यक्ष एवं सभापति का निर्वाचन अनुसूचित जनजातियों को नियुक्त करने का नियम है।

लेकिन नियम विरुद्ध तरीके से गैर आदिवासी की नियुक्ति जिल्दा सहकारी समिति अध्यक्ष के पद पर की गई है, जो छत्तीसगढ़ सहकारी समिति अधिनियम 1960 प्रावधानों के विरुद्ध है। इस प्रकार की नियुक्ति से अनुसूचित जनजाति उपेक्षित एवं आहत हैं। मामले को संज्ञान लेकर समिति अध्यक्ष को तत्काल हटाते हुए नियम कानून के तहत नए अध्यक्ष की नियुक्ति करें।

दरअसल समिति अध्यक्ष की ओर से अपने भतीजे को कम्प्यूटर आपरेटर (Computer operator) एवं एक अन्य की सहायक के पद पर नियुक्ति करने के बाद ग्राम पंचायत जिल्दा, तामडांड़, कदमबहरा, करवा, कन्हारबहरा, जिलीबांध, भरदा के संरपच सहित ग्रामीणों ने कलेक्टर से गुहार लगाई है।

उनका कहना है कि जिल्दा समिति में भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष को अब जिल्दा सहकारी समिति में प्राधिकृत अध्यक्ष बनाया गया है, जो मनमानी कर अपनों को लाभ पहुंचाने नियम कानून को दरकिनार कर रहे हैं। मामले में अध्यक्ष को हटाने की मांग को लेकर सरपंच सहित ग्रामीण लामबंद हैं।

Complaint to Collector: समिति अध्यक्ष को हटाने की मांग

शिकायतकर्ताओं ने बताया है कि कुछ वर्ष पहले सेवा सहकारी समिति पंजीयन क्रमांक 525 जिल्दा के समिति के अध्यक्ष ने अपने भतीजे विकास साहू एवं सहायक पद पर अपने सखी भाई के पुत्र शुभम जायसवाल की नियम कानून को दरकिनार कर नियुक्ति की है। बिना विज्ञापन जारी किए चोरी-छिपे से अपने करीबियों को लाभ पहुंचाने भर्ती की गई है। मामले में नियुक्ति को निरस्त करने के साथ समिति अध्यक्ष (Society manager) को पद से हटाने गुहार लगाई गई है।

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