रायपुर@अजय रघुवंशी। Chhattisgarh Weather Update: खरीफ सीजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने मे किसान जुट चुके हैं। दुर्ग, धमतरी, राजनांदगांव, रायपुर,बलौदाबाजार, कर्वधा सहित कई जिलों में खेतों की जोताई, समतलीकरण और मेड़बंदी का कार्य लगभग 90 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। अब किसानों की नजरें मानसून की पहली अच्छी बारिश पर टिकी हुई हैं, ताकि बुवाई का काम शुरू किया जा सके।
कृषि विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ में लगभग 47.8 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जो प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का करीब 35 प्रतिशत है। इनमें से लगभग 37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर आधारित होने के कारण समय पर मानसून का आगमन किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीन से चार दिन बाद बारिश की उम्मीद
इधर मौसम विभाग ने अगले तीन से चार दिनों के दौरान प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार पूर्वी क्षेत्र में मौसम प्रणाली सक्रिय होने से गरज-चमक के साथ वर्षा हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज हवाएं और वज्रपात की भी चेतावनी जारी की गई है।
राजधानी रायपुर में 8 जून को आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। तापमान अधिकतम 42 डिग्री और न्यूनतम 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। मौसम में संभावित बदलाव के बीच किसान उम्मीद कर रहे हैं कि मानसून की समय पर दस्तक खरीफ सीजन के लिए शुभ संकेत साबित होगी।
जोताई पूरी, मेघों की राह देख रहा किसान
- स्टेशन- अधिकतम-न्यूनतम
- माना एयरपोर्ट-42.6-29.5
- बिलासपुर-41.0-29.4
- पेंड्रा रोड-37.6-23.2
- अंबिकापुर-36.6-23.3
- जगदलपुर-38.4-25.4
- दुर्ग- 41.2-27.8
खेती-किसानी का मौसम आते ही लौटने लगे प्रवासी मजदूर, गांवों में बढ़ेगी रौनक
जून माह की शुरुआत के साथ राजधानी रायपुर रेलवे स्टेशन पर एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों और बड़े शहरों में गए हजारों मजदूर अब अपने गांवों की ओर लौटने लगे हैं। सिर पर गठरी, हाथों में सामान और साथ में परिवार के सदस्य यह दृश्य खेती-किसानी के नए मौसम की दस्तक का संकेत दे रहा है।
छत्तीसगढ़ राज्य के बलौदाबाजार, मुंगेली, कबीरधाम, महासमुंद, जांजगीर-चांपा सहित कई जिलों के ग्रामीण हर वर्ष रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों का रुख करते हैं। निर्माण कार्य, फैक्ट्रियों और अन्य असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले ये मजदूर मानसून के आगमन के साथ अपने गांव वापस लौट आते हैं, ताकि खेती-किसानी के कार्यों में जुट सकें।
बड़ी संख्या में परिवार कर रहे घर वापसी
रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में ऐसे परिवार नजर आ रहे हैं जो छोटे बच्चों और घरेलू सामान के साथ घर वापसी कर रहे हैं। कई मजदूरों का कहना है कि खेतों की तैयारी, बुआई और अन्य कृषि कार्य शुरू होने वाले हैं, इसलिए वे समय रहते गांव पहुंचना चाहते हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार कृषि होने के कारण खेती के मौसम में श्रमिकों की मांग भी बढ़ जाती है।
जानकारों के अनुसार, अच्छी बारिश की उम्मीद और खरीफ फसलों की तैयारी के चलते इस बार भी बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक गांवों का रुख कर रहे हैं। इससे गांवों में फिर से चहल-पहल बढ़ने लगी है। खेतों की जुताई, बीज और खाद की व्यवस्था जैसे कार्यों में परिवार के सभी सदस्य जुटने की तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लौट रहे मजदूरों का मानना है कि खेती का समय उनके लिए केवल रोजगार का नहीं, बल्कि परिवार और गांव से जुड़ाव का भी अवसर होता है। मानसून के साथ शुरू होने वाला यह सिलसिला आने वाले कुछ सप्ताह तक जारी रहने की संभावना है।


