कूनो से 22 मार्च को जिले की सीमा में आए चीता केपी 3 शनिवार को शेरगढ़ वाइल्डलाइफ अभयारण्य में पहुंच गया था। इसके बाद से ही वह अभयारण्य में विचरण कर रहा है। रविवार को उसने 2 खरगोशों का शिकार किया और दिनभर परवन नदी के किनारे जंगल में घूमता रहा। शेरगढ़ वाइल्डलाइफ के रेंजर, जितेंद्र खटीक ने बताया- चीता केपी 3 शेरगढ़ वाइल्डलाइफ अभयारण्य क्षेत्र में विचरण कर रहा है। नियमों के अनुसार, इसकी निगरानी की जा रही है। रविवार को चीता ने 2 खरगोशों का शिकार किया है। परवन नदी के किनारे पर इसकी लोकेशन रही है। वाइल्डलाइफ अधिकारियों के अनुसार, चीता केपी 3 नाहरिया ब्लॉक में परवन नदी के आसपास विचरण कर रहा था और लगातार क्षेत्र बदल रहा था। उसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। वन विभाग की टीमें 500 मीटर की दूरी से चीता पर नज़र रखे हुए हैं। शेरगढ़ तक पहुंचने से पहले उसने 8 शिकार किए थे। वाइल्ड लाइफ ऑफ़ इंडिया की टीम ने भी शेरगढ़ को चीता के लिए सबसे अनुकूल बताया था। ऐसे में अब बिना ट्रांसलोकेशन के चीता खुद शेरगढ़ पहुँच गया है। यहाँ पर चीता बसाने को लेकर पहले से तैयारियाँ की जा रही थीं। पिछले दिनों बोमा बनाने के लिए बजट भी दिया गया था।
बारां जिले के जंगल चीता के लिए सबसे मुफीद एक्सपर्ट आर.एस. तोमर ने बताया- बारां जिले के जंगल रणथंभौर टाइगर सेंचुरी, कूनो नेशनल पार्क व माधव टाइगर रिजर्व से सटे हुए हैं। इसके कारण प्राकृतिक कॉरिडोर बनता है। चीता केपी 3 खुद बारां जिले के जंगलों से होकर शेरगढ़ पहुंचा है। यह अपनी टेरिटरी का निर्माण कर रहा है। कूनो में 50 से ज़्यादा चीते हो चुके हैं, ऐसे में ये नए क्षेत्र की तलाश में बाहर निकलेंगे। जिले के जंगलों को चीता के लिए तैयार करना चाहिए। वन क्षेत्र को वाइल्डलाइफ के अनुसार विकसित नहीं किया गया है।


