इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कानपुर नगर के रोमेंद्र मेहता के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करते हुए उसे बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति चवन प्रकाश की एकलपीठ ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कानपुर नगर द्वारा 22 अगस्त 2024 को पारित सम्मन आदेश तथा अपर सत्र न्यायाधीश, का 28 जुलाई 2025 का पुनरीक्षण आदेश दोनों को निरस्त कर दिया। क्या है मामला जानिये आरोप है कि याची रोमेंद्र मेहता ने वर्ष 2020 में जिलाधिकारी, कानपुर नगर के कार्यालय में चरित्र प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते समय वर्ष 2018 में थाना स्वरूप नगर में दर्ज एफआईआर का तथ्य जानबूझकर छुपाया और इस प्रकार 29 जून 2021 को चरित्र प्रमाण पत्र हासिल किया। इस आधार पर धारा 198, 199, 205 व 420 आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज कराया गया था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धारा 420 आईपीसी तभी लागू होती है जब धोखाधड़ी से किसी को संपत्ति देने के लिए प्रेरित किया गया हो। प्रस्तुत मामले में न तो बेईमानी से लाभ उठाने का आशय सिद्ध होता है और न ही किसी को संपत्ति का नुकसान हुआ। इसके अतिरिक्त धारा 199 आईपीसी का संज्ञान केवल संबंधित न्यायालय की लिखित शिकायत पर ही लिया जा सकता है, जो इस मामले में नहीं हुआ। विवेचना अधिकारी ने भी विवेचना में कोई अपराध नहीं पाया था। न्यायालय ने कहा कि यह मामला एक व्यक्तिगत विवाद को गंभीर आपराधिक धाराओं की आड़ में चलाने का प्रयास है, जो न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।


