बहुजन निर्बल वर्ग सहकारी गृह निर्माण समिति लिमिटेड की जमीनों और विकास शुल्क से जुड़े मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश पर विवेचना कर रहे उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) से वर्ष 2016 से 2024 तक का विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है। जांच एजेंसी ने विकास शुल्क जमा होने, नक्शों की स्वीकृति, अवैध निर्माण और जिम्मेदार अधिकारियों से जुड़ी जानकारियां मांगी हैं। मामला थाना गाजीपुर में दर्ज मुकदमा संख्या 295/2025 से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने 17 सितंबर 2025 को इस प्रकरण की जांच विजिलेंस को सौंपते हुए ल आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विजिलेंस टीम मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है। विकास शुल्क जमा हुआ या नहीं, यही जांच का केंद्र जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि समिति ने अपने सदस्यों और भूखंड धारकों से विकास शुल्क वसूला था। अब विजिलेंस यह पता लगाने में जुटी है कि यह राशि वास्तव में एलडीए में जमा कराई गई या नहीं। जांच एजेंसी का मानना है कि विकास शुल्क का विवरण पूरे मामले की कड़ी जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है। सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में पहले भी एलडीए से जानकारी मांगी गई थी, लेकिन अर्जन विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई सूचना से जांच एजेंसी संतुष्ट नहीं हुई। विजिलेंस ने अपने पत्र में कहा है कि हाईकोर्ट में दाखिल की जाने वाली प्रगति रिपोर्ट में विकास शुल्क का विवरण महत्वपूर्ण बिंदु है, इसलिए एलडीए के रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए। एलडीए से मांगी गई चार प्रमुख जानकारियां पहला, समिति से संबंधित कितनी जमीनों पर विकास शुल्क जमा है, उसका संपत्तिवार और तिथिवार विवरण उपलब्ध कराया जाए। साथ ही जिन भूखंडों के मानचित्र स्वीकृत किए गए हैं, उनकी जानकारी भी दी जाए। दूसरा, वर्ष 2016 से 2024 के बीच समिति से जुड़ी जमीनों के कितने नक्शे और मानचित्र स्वीकृत किए गए, उसका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाए। तीसरा, यदि समिति की जमीनों पर बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण कार्य हुआ है तो उसके खिलाफ एलडीए ने क्या कार्रवाई की, इसकी विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। चौथा, वर्ष 2016 से 2024 तक इस कार्य से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम, पद, वर्तमान तैनाती और संपर्क विवरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि आवश्यक होने पर उनके बयान दर्ज किए जा सकें। अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में विजिलेंस ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारी को आवश्यक अभिलेखों के साथ जांच में सहयोग करने के लिए उपस्थित कराया जाए। जांच एजेंसी का मानना है कि रिकॉर्ड और अधिकारियों के बयान के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि विकास शुल्क, मानचित्र स्वीकृति और निर्माण कार्यों में कहीं कोई अनियमितता या लापरवाही हुई थी या नहीं। हाईकोर्ट में अगली प्रगति आख्या दाखिल की जानी है। ऐसे में एलडीए से मांगा गया रिकॉर्ड जांच की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकता है। मामले में आने वाले दिनों में कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है।


