बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने लोकसभा की कृषि, पशुपालन एवं खाद्य प्रसंस्करण संबंधी स्थायी समिति के शैक्षणिक दौरे के तहत कश्मीर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध डल झील का दौरा किया और इसके सामाजिक, आर्थिक तथा पर्यटन महत्व को करीब से समझा। उन्होंने झील से जुड़े लोगों के जीवन और आजीविका के विभिन्न पहलुओं का भी अवलोकन किया। सांसद सुधाकर सिंह ने बताया कि डल झील सिर्फ एक प्रमुख पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका का आधार भी है। उन्होंने जानकारी दी कि झील के भीतर लगभग 50 छोटे गांव और बस्तियां मौजूद हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। झील और इसके आसपास के क्षेत्रों को मिलाकर लगभग 50 से 60 हजार लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस जलस्रोत पर निर्भर हैं। सिंघाड़ा और कमल की खेती करते है स्थानीय उन्होंने बताया कि यहां के निवासी सिंघाड़ा और कमल की खेती करते हैं, मछली पालन में संलग्न हैं, और पर्यटन से जुड़े विभिन्न व्यवसायों के माध्यम से अपने परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। डल झील का यह पूरा तंत्र प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। अपने भ्रमण के दौरान सांसद सुधाकर सिंह की मुलाकात बिहार के मुंगेर जिले के असरगंज निवासी नागेश्वर साह से हुई। नागेश्वर साह लगभग 20 वर्ष पहले रोजगार की तलाश में बिहार से कश्मीर आए थे। वर्तमान में वे डल झील क्षेत्र में अपना झालमूड़ी का व्यवसाय चला रहे हैं। छोटे व्यवसायों के माध्यम से जीवन को बनाया बेहतर सांसद ने बताया कि अपने छोटे से व्यवसाय के दम पर नागेश्वर साह ने न केवल अपनी तीन बेटियों की शादी की, बल्कि अपना मकान भी बनवाया। उनकी यह कहानी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। सुधाकर सिंह ने कहा कि देश के कई हिस्सों में कश्मीर को लेकर विभिन्न धारणाएं प्रचलित हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी भिन्न है। उन्होंने जोर दिया कि यहां के मेहनतकश लोगों ने खेती, व्यापार, पर्यटन और छोटे व्यवसायों के माध्यम से लगातार अपने जीवन को बेहतर बनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी क्षेत्र को पूर्वाग्रहों के आधार पर नहीं, बल्कि वहां के लोगों के संघर्ष, मेहनत और उपलब्धियों के आधार पर समझा जाना चाहिए। बिहार का शख्स कश्मीर में कर रहा व्यवसाय सांसद ने कहा कि भारत का हर क्षेत्र अपनी अलग पहचान, संस्कृति और संभावनाओं से समृद्ध है तथा कश्मीर इसका एक सुंदर उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज बिहार का एक व्यक्ति कश्मीर में जाकर बिना किसी भेदभाव के अपना व्यवसाय स्थापित कर सकता है और सम्मानपूर्वक जीवन जी सकता है। उन्होंने आगे कहा कि जिस दिन रोजगार और बेहतर अवसरों की तलाश में कश्मीर के लोग भी बिहार आकर बिना किसी भेदभाव के काम कर सकेंगे और अपने भविष्य का निर्माण कर सकेंगे, उस दिन बिहार के वास्तविक विकास की परिकल्पना साकार होगी। सांसद ने कहा कि राज्यों के बीच आपसी सहयोग, रोजगार के अवसरों का विस्तार और सामाजिक समरसता ही देश को और अधिक मजबूत बनाने का मार्ग है। बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने लोकसभा की कृषि, पशुपालन एवं खाद्य प्रसंस्करण संबंधी स्थायी समिति के शैक्षणिक दौरे के तहत कश्मीर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध डल झील का दौरा किया और इसके सामाजिक, आर्थिक तथा पर्यटन महत्व को करीब से समझा। उन्होंने झील से जुड़े लोगों के जीवन और आजीविका के विभिन्न पहलुओं का भी अवलोकन किया। सांसद सुधाकर सिंह ने बताया कि डल झील सिर्फ एक प्रमुख पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका का आधार भी है। उन्होंने जानकारी दी कि झील के भीतर लगभग 50 छोटे गांव और बस्तियां मौजूद हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। झील और इसके आसपास के क्षेत्रों को मिलाकर लगभग 50 से 60 हजार लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस जलस्रोत पर निर्भर हैं। सिंघाड़ा और कमल की खेती करते है स्थानीय उन्होंने बताया कि यहां के निवासी सिंघाड़ा और कमल की खेती करते हैं, मछली पालन में संलग्न हैं, और पर्यटन से जुड़े विभिन्न व्यवसायों के माध्यम से अपने परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। डल झील का यह पूरा तंत्र प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। अपने भ्रमण के दौरान सांसद सुधाकर सिंह की मुलाकात बिहार के मुंगेर जिले के असरगंज निवासी नागेश्वर साह से हुई। नागेश्वर साह लगभग 20 वर्ष पहले रोजगार की तलाश में बिहार से कश्मीर आए थे। वर्तमान में वे डल झील क्षेत्र में अपना झालमूड़ी का व्यवसाय चला रहे हैं। छोटे व्यवसायों के माध्यम से जीवन को बनाया बेहतर सांसद ने बताया कि अपने छोटे से व्यवसाय के दम पर नागेश्वर साह ने न केवल अपनी तीन बेटियों की शादी की, बल्कि अपना मकान भी बनवाया। उनकी यह कहानी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। सुधाकर सिंह ने कहा कि देश के कई हिस्सों में कश्मीर को लेकर विभिन्न धारणाएं प्रचलित हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी भिन्न है। उन्होंने जोर दिया कि यहां के मेहनतकश लोगों ने खेती, व्यापार, पर्यटन और छोटे व्यवसायों के माध्यम से लगातार अपने जीवन को बेहतर बनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी क्षेत्र को पूर्वाग्रहों के आधार पर नहीं, बल्कि वहां के लोगों के संघर्ष, मेहनत और उपलब्धियों के आधार पर समझा जाना चाहिए। बिहार का शख्स कश्मीर में कर रहा व्यवसाय सांसद ने कहा कि भारत का हर क्षेत्र अपनी अलग पहचान, संस्कृति और संभावनाओं से समृद्ध है तथा कश्मीर इसका एक सुंदर उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज बिहार का एक व्यक्ति कश्मीर में जाकर बिना किसी भेदभाव के अपना व्यवसाय स्थापित कर सकता है और सम्मानपूर्वक जीवन जी सकता है। उन्होंने आगे कहा कि जिस दिन रोजगार और बेहतर अवसरों की तलाश में कश्मीर के लोग भी बिहार आकर बिना किसी भेदभाव के काम कर सकेंगे और अपने भविष्य का निर्माण कर सकेंगे, उस दिन बिहार के वास्तविक विकास की परिकल्पना साकार होगी। सांसद ने कहा कि राज्यों के बीच आपसी सहयोग, रोजगार के अवसरों का विस्तार और सामाजिक समरसता ही देश को और अधिक मजबूत बनाने का मार्ग है।


