बूंदी. चार चांद छोटी काशी बूंदी की पहचान ऐतिहासिक दरवाजों, कुंड बावडिय़ों व महलों से है। विरासत की अनदेखी से यहां दरवाजें, कुंड, बावडियां जीर्ण शीर्ण हो रहे है। जिम्मेदारों की चुप्पी से विरासत प्रेमी आहत है। रियासतकाल में बूंदी परकोटे के अंदर थी। सुरक्षा की ²ष्टि से चारों दिशाओं में दरवाजे बनाकर लकड़ी के गेट लगाए गए थे। समय के साथ देखरेख के अभाव में लकड़ी के गेट टूट गए व कई दरवाजे जीर्ण शीर्ण हो गए।
शहर में लंकागेट, खोजागेट, चौगान गेट, मीरा गेट, चम्पाबाग गेट, गिनती का दरवाजा, सुरंग दरवाजा, भैरव दरवाजा, पुरानी कोतवाली का दरवाजा है। सभी दरवाजों से लकड़ी के गेट टूट गए व कई क्षतिग्रस्त हो गए। सबसे सुंदर गेट चौगान गेट था, जिस पर चित्रकारी की गई थी अब चित्रकारी भी बदरंग हो गई है। गेट पर 1993 में कलर हुआ था, जिसके बाद अब तक गेट उपेक्षा का शिकार हो गया और लगातार अपनी आभा खो रहा है। पर्यटन प्रेमियों का कहना है दरवाजे बूंदी की शान है और पर्यटकों के लिए बूंदी में प्रवेश का पहला आकर्षण है।
उखड़ा प्लस्तर
शहर में करीब एक दर्जन रियासत कालीन दरवाजे बने हुए है। अधिकांश दरवाजों में दीवारों से प्लस्तर उखडऩे के साथ दीवारों पर से रंग भी मौसम के थपेड़ों के साथ गायब हो चुका है। समय रहते इन दरवाजों की सार संभाल नहीं की गई तो यह और जर्जर होकर गिर सकते है। चौगान गेट पर पूर्व में लगाई गई फसाड़ लाइटों में से कुछ खराब हो चुकी है।
बदरंग कर रहे
नगर परिषद की अनदेखी से विभिन्न राजनीतिक दलों एवं अन्य लोग दरवाजों, परकोटे की दीवारों एवं अन्य पुरा महत्व के स्थानों पर पोस्टर, बैनर एवं पम्फलेट तक चस्पा कर देते है, वहीं नगरपरिषद के जिम्मेदार अधिकारी भी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे है, जिससे शहर की पुरा महत्व की दीवारें बदरंग हो रही है।
योजना बने तो पर्यटन में चार चांद लग जाए
विरासत सहेजेंगे तो पर्यटन बचेगा बूंदी की अनमोल धरोहर को बचाने के लिए ठोस योजना बने और नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी समझे तो ही बूंदी में पर्यटन विरासत बचेगी। स्थानीय पर्यटन व्यवसाय से जुड़े नरेंद्र मालकपुरा बताते है कि नगर परिषद, पर्यटन विभाग व पुरातत्व विभाग संयुक्त योजना बनाए, जिसमें दरवाजों की मरम्मत सफाई, रात्रिकालीन रोशनी सूचना पट्ट लगे साथ ही विरासत में हो रहे अतिक्रमण हटे तो विरासत सुरक्षित रहे।


