भिलाई@सुबोध कुमार झा। BSP Scrap Theft Case: बीएसपी से करीब 250 टन लौह स्क्रैप चोरी के बहुचर्चित मामले में जांच की गति पर सवाल उठने लगे हैं। करोड़ों रुपए की इस चोरी के 15 दिन बाद भी पुलिस न तो मुख्य आरोपियों तक पहुंच सकी है और न ही संयंत्र के उन संदिग्ध अधिकारियों के बयान दर्ज कर पाई है, जिनकी मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
मामले में पूछताछ के लिए बुलाए गए अधिकारियों ने समय मांग लिया है, जिससे जांच की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। पुलिस ने इस मामले में संलिप्तता के संदेह में बीएसपी के तीन अधिकारियों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था। मंगलवार को इन्हें बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था, लेकिन एक अधिकारी ने कार्य का हवाला देते हुए 12 जून तक का समय मांगा। एएसपी सुखनंदन राठौर ने बताया कि आने वाले दिनों में इन अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ की जाएगी।
फ्लू डस्ट की आड़ में ‘काला कारोबार
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि यह चोरी किसी आम घटना के बजाय एक सोची-समझी साजिश थी। आरडीके इंडस्ट्रीज को फ्लू डस्ट परिवहन का ठेका मिला था, जिसे ट्रांसपोर्टर संजय सिंह संचालित कर रहा था। आरोप है कि इसी ठेके की आड़ में संजय सिंह और उसके साथियों ने बड़े पैमाने पर लौह स्क्रैप को बीएसपी परिसर से बाहर निकाला। इसके लिए बाकायदा नए वाहन खरीदे गए और अन्य ट्रांसपोर्टरों की गाड़ियां किराए पर लेकर इस खेल को अंजाम दिया गया।
8 श्रमिकों को भेजा जा चुका है जेल
अकलोरडीह स्थित ‘एके ट्रेडर्स’ में छापेमारी के दौरान पुलिस ने 250 टन स्क्रैप जब्त किया था, जिसके बाद आठ श्रमिकों को जेल भेजा गया। लेकिन असली मास्टरमाइंड ट्रांसपोर्टर संजय सिंह, गौरव सिंह और ठेकेदार गिरीश व हिमांशु खंडेलवाल अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। इन आरोपियों पर इनाम घोषित होने के बावजूद पुलिस को अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है।


