उमरिया में रेत माफिया का खूनी खेल! वनकर्मियों को ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश

उमरिया में रेत माफिया का खूनी खेल! वनकर्मियों को ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश

MP Illegal Sand Mining: शहडोल संभाग में रेत माफिया अब केवल खनिज संपदा की चोरी नहीं कर रहा, बल्कि वर्दी का खून बहाने पर भी आमादा हो गया है। उमरिया जिले की सलैया बीट में अवैध रेत से लदे ट्रैक्टरों को रोकना वनकर्मियों के लिए जानलेवा साबित होते-होते बचा। माफिया ने न केवल सरकारी काम में रोड़ा अटकाया, बल्कि वनकर्मियों को ट्रैक्टर से कुचलकर मारने की भी कोशिश की।

सलैया बीट में वन अमले पर हमला

उमरिया जिले के चंदिया थाना अंतर्गत ग्राम सलैया अखडार की इस घटना से हड़कंप मच गया। मामले के मुताबिक सोमवार को स्थिति उस वक्त बेकाबू हो गई जब वन विभाग की टीम अवैध खनन रोकने पहुंची। इससे पहले, रविवार शाम वनरक्षक रामशंकर चर्मकार ने रेत लदे तीन ट्रैक्टरों को पकड़ा था, जिसके बाद आरोपियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास किया। सोमवार को जब रेंजर नीलेश द्विवेदी के नेतृत्व में टीम जब्ती के लिए पहुंची, तो माफिया के समर्थकों ने पूरी टीम को घेरकर बंधक बनाने जैसी स्थिति पैदा कर दी। विभाग ने बीएनएस और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला तो दर्ज कराया है, लेकिन मुख्य आरोपी अब भी पकड़ से बाहर हैं।

उमरिया में रेत माफिया के हमले का वीडियो वायरल

जब माफिया ने बहाया अधिकारियों का लहू

शहडोल संभाग के तीनों जिलों- (शहडोल, उमरिया और अनूपपुर) में रेत माफिया का नेटवर्क इतना मजबूत है कि अधिकारी इनके सामने बेबस नजर आते हैं। यह पहली बार नहीं है जब माफिया ने वर्दी पर हाथ डाला है। इससे पहले में सरकारी अफसरों पर बड़े हमले और उनकी हत्याएं की जा चुकी हैं।

शहडोल (पटवारी हत्याकांड): रेत माफिया ने ड्यूटी पर तैनात पटवारी प्रसन्न सिंह को ट्रैक्टर से कुचलकर निर्मम हत्या कर दी थी। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था।

तहसीलदार पर हमला: प्रशासनिक सख्ती दिखाने पर माफिया ने तहसीलदार के वाहन को पलटाने के लिए रीवा रोड पर रेत बिछाकर उन्हें अनियंत्रित करने की साजिश रची थी।

डिप्टी रेंजर की वर्दी फटी: हाल ही में शहडोल में एक डिप्टी रेंजर पर हमला कर उनकी वर्दी फाड़ दी गई और उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई।

अनूपपुर में संगठित सिंडिकेट: अनूपपुर जिले में माफिया का आतंक कम नहीं है। यहां सोन और अन्य नदियों के सीने को चीरकर अवैध परिवहन बेरोकटोक जारी है, और विरोध करने वाले मैदानी अमले को सीधे तौर पर धमकियां दी जा रही हैं।

माफिया, रसूख और पुलिस का समर्थन?

संभाग के तीनों जिलों में माफिया का इंटेलिजेंस सरकारी तंत्र से ज्यादा तेज है। जैसे ही टीम निकलती है, माफिया को खबर लग जाती है। इस संगठित अपराध को पुलिस और स्थानीय रसूखदारों का अभयदान प्राप्त है। पुलिस खुले तौर पर रेत माफिया (sand mafia) का संरक्षण कर रही है।

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