ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araqchi Arrives in Russia) रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पहुंच गए हैं। वह जल्द ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करने वाले हैं। अराघची पहले ओमान गए फिर पाकिस्तान में उनकी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से बातचीत हुई। उसके बाद वह रूस पहुंचे हैं। रूस ने कहा कि अमेरिका, ईरान को ब्लैकमेल नहीं कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने में ईरान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची लगातार कई देशों का दौरा कर रहे हैं। सामरिक मामलों के विशेषज्ञों ने कहा कि अराघची ईरान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं। इसलिए वह लगातार कई देशों का दौरा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान की तरफ से अमेरिका (US-Iran conflict) को एक नया प्रस्ताव भी भेजा गया है। जिसमें हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और चल रहे संघर्ष को समाप्त करने का सुझाव दिया गया है। प्रस्ताव में परमाणु वार्ता को फिलहाल टालने की बात भी कही गई है, लेकिन इस पर अभी तक अमेरिका का कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है।
अराघची को ले जाने वाले प्लेन का नाम मिनाब 168
इधर, ईरानी मीडिया ने बताया कि अराघची को ले जाने वाले विमान का कॉलसाइन “मिनाब 168” रखा गया था। यह नाम 28 फरवरी को दक्षिणी ईरानी शहर मिनाब में अमेरिका-इजराइल हमले में एक प्राथमिक विद्यालय पर हुए हमले में मारे गए बच्चों को समर्पित है।रूस के विदेश मंत्रालय ने यात्रा की पुष्टि की है।
मॉस्को में अराघची और पुतिन की होगी बातचीत
टीएएसएस समाचार एजेंसी को दिए बयान में रूसी अधिकारियों ने बताया कि ईरानी विदेश मंत्री मॉस्को में भी बातचीत करेंगे।क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन अराघची से क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा करेंगे। ईरान के रूस राजदूत काजेम जलाली के अनुसार, दोनों पक्ष युद्धविराम, मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष और वर्तमान कूटनीतिक स्थिति पर चर्चा करेंगे।इस यात्रा से पहले ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमाद अल बुसैदी ने सोमवार को अराघची से मुलाकात की और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव पर चर्चा की।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अच्छी बातचीत हुई: ओमान
ओमान के विदेश मंत्री ने एक्स पर लिखा कि ईरान के विदेश मंत्री डॉ. अराघची के साथ हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अच्छी चर्चा हुई। हम तटीय देशों के रूप में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति अपनी साझा जिम्मेदारी समझते हैं और लंबे समय से हिरासत में रखे गए नाविकों को रिहा करने की तात्कालिक मानवीय आवश्यकता को मानते हैं।


