Bikaner Hospital Kidney Failure Case: बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में 5 प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने के मामले ने अब सरकार का भी ध्यान खींच लिया है। राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद मंगलवार को अस्पताल प्रशासन और मेडिकल कॉलेज पूरे दिन मामले की पड़ताल में जुटा रहा। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र कुमार शर्मा और अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने आईसीयू में भर्ती प्रसूताओं की स्थिति का जायजा लिया तथा अब तक दिए गए उपचार की जानकारी ली। इसके बाद प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के चिकित्सकों को बुलाकर प्रत्येक मरीज की केस हिस्ट्री, भर्ती की तिथि, प्रसव की प्रकृति और उपचार प्रक्रिया की विस्तार से समीक्षा की गई।
एक-एक फाइल खंगाली, उपचार का ब्योरा जुटाया
अधिकारियों ने प्रभावित प्रसूताओं की फाइलों का अध्ययन करते हुए सिजेरियन और सामान्य प्रसव से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी ली। प्रसव के दौरान दी गई दवाओं, इंजेक्शनों और अन्य चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का भी बारीकी से परीक्षण किया गया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. घीया के अनुसार प्रभावित महिलाओं में दो की सामान्य डिलीवरी हुई थी, जबकि तीन का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया था।
सभी मामलों में उपचार की पूरी श्रृंखला की समीक्षा की जा रही है। मामला सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने चिकित्सकों की टीम के साथ रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेज दी है। दूसरी ओर जोधपुर मेडिकल कॉलेज से आई विशेषज्ञ टीम ने भी अस्पताल का निरीक्षण कर तथ्य जुटाए हैं। यह टीम अपनी स्वतंत्र रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
प्रसव के बाद के तीन महीने सबसे संवेदनशील
मामले के बीच मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने प्रसव के बाद होने वाली जटिलताओं को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र कुमार शर्मा का कहना है कि प्रसव के बाद का तीन माह का समय (पोस्ट-पार्टम पीरियड) महिलाओं के लिए अत्यंत संवेदनशील होता है। इस दौरान संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव, रक्त के थक्के बनने और अन्य अंगों पर असर जैसी गंभीर जटिलताएं विकसित हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान खून की कमी, अनियंत्रित रक्तचाप और अत्यधिक रक्तस्राव जैसी स्थितियां कई बार प्रसूता के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। ऐसे मामलों में गुर्दे सहित शरीर के अन्य अंग भी प्रभावित हो सकते हैं।
प्राचार्य के अनुसार प्रभावित महिलाओं में एक जैसी स्थिति नहीं थी। प्रीति में अनियंत्रित रक्तचाप, मस्तिष्क में सूजन और हेल्प (एचईएलएलपी) सिंड्रोम जैसी जटिलताएं पाई गईं, जिससे गुर्दों पर असर पड़ा। राहिला में मल्टी ऑर्गन इम्पैक्ट के संकेत मिले। शारदा में संक्रमण की स्थिति सामने आई। तारादेवी और इमरती में प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव हुआ, जो उपचार के बावजूद नियंत्रित नहीं हो सका और इसका असर गुर्दों पर पड़ा।
दवा आपूर्ति भी जांच के दायरे में
कोटा और बीकानेर में सामने आए मामलों के बाद दवा आपूर्ति और उपयोग में ली गई औषधियों की भी जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दोनों स्थानों पर अलग-अलग कंपनियों की दवाओं की आपूर्ति हुई थी। पीबीएम अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया के अनुसार आरएमएससीएल के माध्यम से 5 हजार ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन प्राप्त हुए थे, जबकि स्थानीय स्तर पर भी दो चरणों में 25 हजार इंजेक्शन खरीदे गए थे। जिला सहायक औषधि नियंत्रक देवेंद्र केदावत ने बताया कि प्रसव से पहले और बाद में उपयोग में ली जाने वाली दवाओं एवं इंजेक्शनों के सैंपल एकत्रित कर सरकारी प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।
एक नजर में …
- 15000 ऑक्सीजोटोसिन इंजेक्शन 9 मार्च, 26 को खरीद किए गए
- 10000 इंजेक्शन 21 मई, 26 को खरीद किए गए


