1857 के पूर्व नर्मदा तट पर हुई आजादी की पहली क्रांति, एमपी के प्रसिद्ध संत का बड़ा दावा

1857 के पूर्व नर्मदा तट पर हुई आजादी की पहली क्रांति, एमपी के प्रसिद्ध संत का बड़ा दावा

Dada Guru- मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में लोधी समाज का बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। भेल के जंबूरी मैदान पर यह भव्य कार्यक्रम राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि के मौके पर रखा गया था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोधी समाज को वीरता और‍ किसान योद्धा परंपरा का प्रतीक बताया। उन्होंने राजा हिरदेशाह लोधी का आजादी का पुरोधा बताया। सीएम मोहन यादव ने राजा हिरदेशाह लोधी की कर्मस्थली हीरापुर को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने और उनपर राज्य सरकार द्वारा शोध कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि राजा हिरदेशाह के संघर्ष और शौर्य को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री प्रहलाद पटेल ने भी कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में पूज्य दादा गुरु ने बड़ा दावा करते हुए बताया कि एमपी में 1857 से पूर्व नर्मदा तट पर स्वतंत्रता की पहली क्रांति हुई थी। अन्य वक्ताओं ने भी यह बात कही।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि यह कार्यक्रम अपने पुरखों के बलिदान को स्मरण करने का है। आज सामाजिक जीवन में शिक्षित होने के साथ संस्कारित बनने का संकल्प भी लेना चाहिए।

तीसरी आजादी आर्थिक विषमताओं से मुक्ति के लिए

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी कार्यक्रम में शामिल हुईं। यहां उन्होंने कहा कि आजादी की दो लड़ाई हुई है। पहली लड़ाई की पूर्णाहूति 15 अगस्त 1947 को हुई थी, यह भूमि-सीमा की आजादी थी। दूसरी आजादी 2014 में पीएम मोदी के नेतृत्व में मिली। यह मन, बुद्धि, विचारों की आजादी थी क्योंकि अंग्रेजों ने हमारे मन-बुद्धि को तोड़ दिया था। अब तीसरी आजादी आर्थिक विषमताओं से मुक्ति के लिए होनी है। प्रदेश की पूर्व सीएम उमा भारती ने कार्यक्रम में आरक्षण के संबंध में अहम बयान दिया। सामाजिक समानता के लिए उन्होंने आरक्षण की जरूरत जताई। पूर्व सीएम उमा भारती ने साफ कहा कि जब तक अफसर-नेता के परिवार के लोग और गरीब परिवार एक जैसे स्कूल में नहीं पढ़ेंगे, तब तक आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता। उन्होंने कहा कि जब तक सुविधाओं में समानता नहीं आ जाती तब तक आरक्षण जारी रहेगा।

राजा हिरदेशाह लोधी ने 1857 की क्रांति से पहले ही देश की आजादी के लिए 1842 में क्रांति का बिगुल फूंका

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि राजा हिरदेशाह लोधी ने 1857 की क्रांति से पहले ही देश की आजादी के लिए 1842 में क्रांति का बिगुल फूंका था। देश की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। लोधी-लोधा समाज के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व मंत्री जालम सिंह पटेल ने कहा कि लोधी समाज के गौरव राजा हिरदेशाह ने ब्रिटिश शासन के विरोध में 1842 की क्रांति का नेतृत्व किया। इस संघर्ष में उनके करीब 12 भाई बलिदान हुए।

स्वतंत्रता आंदोलन में पहली क्रांति नर्मदा के तट पर

पूज्य दादा गुरु ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में पहली क्रांति नर्मदा के तट पर 1842 में शुरू हुई थी, यह तथ्य हम सबको गौरवान्वित करने वाला है। राजा हिरदेशाह ने इसका नेतृत्व किया और अपना बलिदान दिया। उन्होंने बुंदेलों, जनजातियों और सकल समाज को एकजुट कर राष्ट्र के लिए लड़ने को तैयार किया था। नर्मदा के तट से आजादी की क्रांति का पहला बिगुल फूंका गया था। प्रदेश में रानी अवंतीबाई, वीरांगना दुर्गावती जैसी वीरांगनाओं ने अपने राज्य की रक्षा के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था।

शौर्य दिवस कार्यक्रम की महत्ता जताते हुए दादा गुरु ने कहा कि इस अवसर पर हमें सनातन धर्म के मार्ग पर चलते हुए अखंड भारत के निर्माण में योगदान का संकल्प लेना है। इस आयोजन में जहां धैर्य है वहीं धर्म भी है।

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