अजय रघुवंशी/Chhattisgarh Fire Safety: बिना फायर एनओसी के गुमास्ता लाइसेंस पर रोक लगाने के लिए फायर बिग्रेड ने नगर-निगम को पत्र लिखा है। लगातार शिकायतों और आपदा की स्थिति से निजात पाने के लिए फायर बिग्रेड ने साफ किया है कि गुमास्ता जारी करने के पहले संबंधित संस्थानों की फायर एनओसी की जांच की जानी चाहिए। इसके बिना गुमास्ता जारी नहीं करना चाहिए। इधर राजधानी के प्रमुख बाजारों और व्यवसायिक कॉम्पलेक्सो में आग से सुरक्षा के दावों की हकीकत हवा-हवाई निकली।
Chhattisgarh Fire Safety: पत्रिका रियलिटी चेक
पत्रिका ने अपनी पड़ताल में पाया कि जिन इमारतों को फायर एनओसी जारी की गई है, वहां कई जगह फायर फाइटिंग सिस्टम केवल दिखावे तक सीमित है। कहीं पाइपलाइन में जंग लग चुकी है तो कहीं स्प्रिंकिलर और अलार्म सिस्टम वर्षों से बंद पड़े हैं। कई कॉम्पलेक्सों में फायर लाइन तो बिछी हुई है, लेकिन उसमें पानी ही उपलब्ध नहीं है। रविभवन से लेकर गुरुघासीदास प्लाजा सहित कई व्यवसायिक परिसरों में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी देखने को मिली।
स्थिति और भी खतरनाक इसलिए है क्योंकि अधिकांश बाजारों में बिजली के तारों का जाल फैला हुआ है, पार्किंग और अतिक्रमण के कारण फायर ब्रिगेड वाहनों के पहुंचने तक का रास्ता नहीं बचा है। कई भवनों में फायर एग्जिट या तो बंद हैं या उनका उपयोग गोदाम और स्टोर रूम के रूप में किया जा रहा है। हैरत की बात यह है कि थर्ड पार्टी ऑडिट और एनओसी की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ। राजधानी के स्टेशन रोड से लेकर मालवीय रोड, वीआईपी रोड से लेकर गोलबाजार तक यही स्थिति देखने को मिल रही है।
केस-1: रविभवन में सुरक्षा का दावा, लेकिन बाल्टी में रेती का ही सहारा

रविभवन के पार्किंग में प्रवेश करने से ही खतरे की घंटी बजने लगती है, क्योंकि बिजली के तारों का जखीरा ऐसा है कि कभी भी शार्ट सर्किट हो सकती है। यहां तीन बाल्टियों में रेत रखी हुई मिली। पार्किंग एरिया से आगे बढऩे पर हमें फायर फाइटिंग की पाइपलाइन दिखी, जो कि आधी-अधूरी मिली। 10 मंजिला रविभवन के आखिरी फ्लोर तक पाइपलाइन नहीं पहुंच पाई है। यहां रविभवन व्यापारी संघ के अध्यक्ष जय नानवानी ने दावा किया कि रविभवन को फायर एनओसी मिली हुई है। रविभवन में आगजनी की अलग-अलग घटनाएं भी हो चुकी है।
केस-2: घासीदास प्लाजा के पाइपलाइन में लगी जंग, मेंटेनेंस नहीं

जीई रोड में आमापारा चौक से आगे घासीदास प्लाजा में स्थिति चौकाने वाली रही। यहां हमने देखा कि फायर फाइटिंग के लिए बिछी हुई पाइपलाइन में जंग लगी हुई है। अलार्म सिस्टम के लिए लगाए गए कांच के बॉक्स से मशीन गायब है। फायर फाइटिंग के लिए जो पाइपलाइन लगाई गई है, उसे देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि 5 से 7 साल तक इसका मेंटेनेंस नहीं किया गया। इसमें जंग लगा हुआ मिली। घासीदास प्लाजा में हर दिन लगभग 6 से 7 हजार लोगों की आवाजाही होती है।
केस-3: जहां पांच लोगों की मौतें हुई थी, वह तुलसी होटल आज भी वीरान

10 अप्रैल 2017 को बंजारी रोड के जिस तुलसी होटल में आगजनी की घटना हुई थी, वह आज भी वीरान पड़ा हुआ है। हमने देखा कि तुलसी होटल आज भी खंडहर है। आग से होटलों के कमरें, दीवार और खिड़कियां आज भी जली हुई दिख रही है। होटल में रंग-रोगन तक नहीं कराया गया। 10 अप्रैल की काली रात को तुलसी होटल में भयंकर आग लगी, जिससे 5 व्यापारियों की जलकर मौत हो गई थी। शुरुआती कारण में घटना को शार्ट सर्किट माना गया, लेकिन बाद में एक सीसीटीवी फुटेज ने घटना को नया मोड़ दे दिया था, जिसमें कोई व्यक्ति गाड़ी में आग लगाता नजर आया। फिलहाल इस होटल को दोबारा शुरू नहीं किया जा सका है।

Chhattisgarh Fire Safety: एनओसी की सख्त जांच होनी चाहिए
हमने नगर-निगम को चिठ्ठी लिखी है कि बिना फायर एनओसी के किसी भी व्यवसायिक कॉम्पलेक्स, फर्म, संस्थान, होटल या कोई भी संस्था को गुमाश्ता लाइसेंस जारी न किया जाएं। गुमाश्ता देने के पहले एनओसी की सख्त जांच होनी चाहिए: पुष्पराज सिंह, जिला अग्निशमन अधिकारी, फायर बिग्रेड, रायपुर


