Bhindi vs Parwal: भारत में गर्मियों में भिंडी और परवल आसानी से मिल जाते हैं। लेकिन जिन लोगों को Diabetes है, उनके लिए ये सिर्फ सब्जियां नहीं, बल्कि सेहत संभालने का एक आसान तरीका भी हैं। सही तरीके से खाया जाए तो ये दोनों ही ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद कर सकती हैं।
भिंडी: शुगर कंट्रोल की नेचुरल हेल्प
भिंडी काटते समय जो चिपचिपा पदार्थ निकलता है, वही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। Food Science & Nutrition में छपी रिसर्च के मुताबिक, भिंडी में मौजूद घुलनशील फाइबर खाने के बाद शुगर को धीरे-धीरे खून में जाने देता है। इसका फायदा ये होता है कि खाने के बाद अचानक शुगर बढ़ने का खतरा कम हो जाता है। साथ ही भिंडी में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो किडनी को नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं, जो डायबिटीज मरीजों के लिए काफी जरूरी है।
परवल: हल्की लेकिन असरदार सब्जी
परवल को हल्की और ठंडी तासीर वाली सब्जी माना जाता है। इसमें कैलोरी कम होती है, इसलिए वजन कंट्रोल करने वालों के लिए यह अच्छा ऑप्शन है। Journal of Ethnopharmacology की एक स्टडी के अनुसार इसके बीजों में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में इंसुलिन के काम को बेहतर बनाते हैं। यानी शरीर शुगर को सही तरीके से इस्तेमाल कर पाता है। इसके अलावा परवल खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) कम करने में भी मदद करता है, जिससे दिल की सेहत बेहतर रहती है।
भिंडी vs परवल: कौन है बेहतर?
अगर सीधी बात करें, तो दोनों ही अपने-अपने तरीके से फायदेमंद हैं। अगर आपको खाना खाने के बाद शुगर जल्दी बढ़ती है, तो भिंडी ज्यादा मददगार हो सकती है। अगर आपका फोकस वजन घटाने और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल पर है, तो परवल बेहतर रहेगा। यानि कौन बेहतर है ये आपके शरीर की जरूरत पर निर्भर करता है।

सही तरीके से पकाना है जरूरी
अक्सर लोग भिंडी को डीप फ्राई करके या परवल को ज्यादा तेल और मसालों में बनाते हैं, जिससे इनके फायदे कम हो जाते हैं। सबसे अच्छा तरीका है, कम तेल में हल्का भूनना, उबालकर या स्टीम करके खाना। इससे इनके पोषक तत्व सही तरह से शरीर को मिलते हैं। भिंडी और परवल दोनों ही डायबिटीज डाइट में शामिल करने लायक सब्जियां हैं। लेकिन ध्यान रखें, ये दवाइयों का विकल्प नहीं हैं।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


