Income Tax Return: आयकर रिटर्न (आइटीआर) भरते वक्त करदाताओं को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। नए टैक्स नियम लागू होने के बाद आयकर विभाग के पास बैंक ब्याज, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, डिविडेंड और अन्य वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जानकारी पहले से है। ऐसे में रिटर्न में दर्ज जानकारी और विभाग के रिकॉर्ड में अंतर होने पर नोटिस मिल सकता है।
कर विशेषज्ञों के अनुसार, लोग जल्दबाजी में रिटर्न दाखिल कर देते हैं, जबकि कंपनी की ओर से जारी किए जाने वाले दस्तावेज और टीडीएस का ब्योरा बाद में अपडेट होता है। ऐसे मामलों में आय और कर कटौती में अंतर आ सकता है। सीए लवेश मित्तल का कहना है कि इस बार रिटर्न दाखिल करने से पहले बैंक खातों, निवेश, म्यूचुअल फंड, शेयर कारोबार और अन्य आय स्रोतों का मिलान करना जरूरी है।
अंतिम तिथि 31 जुलाई
आयकर विभाग अब अधिकांश जानकारियां स्वतः रिकॉर्ड में शामिल कर रहा है, इसलिए कोई जानकारी छूटने पर करदाता को स्पष्टीकरण देना पड़ सकता है। नए नियमों के तहत करदाताओं को पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में से एक का चयन करना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल टैक्स-मुक्त सीमा देखकर निर्णय लेने के बजाय निवेश, होम लोन और अन्य कर छूटों को ध्यान में रखकर दोनों विकल्पों की तुलना करनी चाहिए। बिना लेट फीस के आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है।
सोशल मीडिया की सलाह पर आइटीआर भरना पड़ सकता है भारी
मप्र टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन (एमपीटीसीए) द्वारा आयोजित सेमिनार में अनुमानित कराधान योजना (प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम) और आयकर रिटर्न की सही रिपोर्टिंग पर चर्चा की गई। एमपीटीसीए के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सीए एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सुमित नीमा ने कहा कि करदाता सोशल मीडिया पर प्रसारित अधूरी या गलत जानकारियों के आधार पर रिटर्न दाखिल कर रहे हैं। इससे भविष्य में उन्हें विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
नए आयकर रिटर्न फॉर्म में व्यापारिक लेनदेन वाले बैंक खातों का 31 मार्च का क्लोजिंग बैलेंस बताना अनिवार्य है। ऐसे में रिटर्न में सही और तथ्यात्मक जानकारी देना पहले से अधिक जरूरी हो गया है। इंदौर जोन के चेयरमैन सीए एसएन गोयल ने कहा कि अनुमानित कराधान योजना को लेकर भ्रम है। कई लोग बिना नियमों को समझे इसका लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। सीए कीर्ति जोशी ने बताया कि यह योजना छोटे व्यापारियों और प्रोफेशनल्स के लिए सुविधाजनक है, लेकिन इसकी पात्रता, टर्नओवर सीमा और न्यूनतम लाभ घोषित करने के नियमों को समझना आवश्यक है। मुख्य वक्ता अजमेर के सीए अंकित सोमानी ने कहा कि यह धारणा गलत है कि 2 करोड़ रुपए तक के कारोबार या 24 लाख रुपए तक की प्रोफेशनल आय पर कोई आयकर नहीं देना पड़ता।


