समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने 26 मई को योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना करते हुए उस पर फर्जी मुठभेड़ों के माध्यम से एक आपराधिक तंत्र स्थापित करने और पुलिस कर्मियों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए यादव ने दावा किया कि सरकार मुठभेड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों को बाद में छोड़ देती है। गोरखपुर फर्जी मुठभेड़ मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कई पुलिसकर्मियों को जेल में डाल दिया गया है जबकि सरकार ने उनसे पल्ला झाड़ लिया है।
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यादव ने कहा कि फर्जी मुठभेड़ों के जरिए पूरा आपराधिक तंत्र खड़ा हो गया है। कुछ वकील फर्जी मुठभेड़ों के बारे में बढ़ा-चढ़ाकर बातें करते हैं और मनगढ़ंत कहानियां सुनाते हैं। जब पुलिसकर्मी फर्जी मुठभेड़ों में फंस जाते हैं, तो सरकार उनसे मुंह मोड़ लेती है। आज गोरखपुर फर्जी मुठभेड़ मामले के कारण कई पुलिसकर्मी जेल में हैं। भाजपा सरकार फर्जी मुठभेड़ों में दोषी पुलिसकर्मियों को सजा देने के बाद उनसे मुंह मोड़ लेती है। सरकार पुलिसकर्मियों का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर रही है। पुलिसकर्मियों को यह समझना चाहिए कि भविष्य में उनके अपने परिवार वाले भी उन्हें हत्यारा समझेंगे।
यादव ने आगे कहा कि फर्जी मुठभेड़ों में शामिल पुलिस अधिकारियों को आजीवन परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने इस प्रथा की निंदा करते हुए इसे अलोकतांत्रिक बताया और सरकार पर इसके जरिए मनोवैज्ञानिक दबाव डालने का आरोप लगाया। उन्होंने आगे कहा कि फर्जी मुठभेड़ों में हत्या करने वाले पुलिसकर्मी हर दिन धीमी मौत मरते हैं। कई अधिकारियों ने मुठभेड़ों के डर का फायदा उठाकर महिलाओं के खिलाफ अपराध किए हैं। फर्जी मुठभेड़ों के डर से निवेश नहीं आता; भाजपा को भी अपने ही लोगों को नुकसान होता है। जाति आधारित फर्जी मुठभेड़ें हो रही हैं।
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यादव ने समझाया कि मुठभेड़ को आम तौर पर झड़प कहा जाता है। इसमें हिंसक और आपराधिक गतिविधियों की कोई जगह नहीं है। फर्जी मुठभेड़ों के जरिए एक ‘मानसिक सॉफ्टवेयर’ सेट किया जाता है, लेकिन उसे अपडेट नहीं किया जाता। लोगों में हिंसा भड़काई जा रही है। हत्या को हिंसा के रूप में पेश किया जा रहा है। फर्जी मुठभेड़ें गलत हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ हैं। सरकार फर्जी मुठभेड़ों के जरिए अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रही है। यह कई जगहों पर देखा जा रहा है।
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