अजमेर। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड में जान गंवाने वाले गुलाबबाड़ी मिस्त्री मोहल्ला निवासी सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक जवरीलाल अग्रवाल और उनकी पत्नी कमला अग्रवाल के निधन की खबर जैसे ही अजमेर पहुंची, उनके घर के बाहर सन्नाटा पसर गया। रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। अग्रवाल के पड़ोसी और पिछले 30 वर्षों से उनके मित्र यूको बैंक के पूर्व प्रबंधक आरपी गुप्ता ने बताया कि दोनों ही 30 जनवरी 2016 को यूको बैंक में प्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
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जवरीलाल के कहने पर खरीदा था भूखंड
बैंक सेवा के दौरान दोनों ने कई वर्षों तक एक ही शाखा में कार्य किया। दोनों ने एक साथ पदोन्नति प्राप्त की। अलग-अलग स्थानों पर तबादले होने के बावजूद उनकी मित्रता कभी कम नहीं हुई। गुप्ता ने बताया, “हमारी दोस्ती करीब 30 साल पुरानी थी। नौकरी से लेकर परिवार तक हर सुख-दुख में हम साथ रहे।” दोस्ती की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 1994 में जवरीलाल अग्रवाल के आग्रह पर ही आरपी गुप्ता ने अजमेर के गुलाबबाड़ी में एक भूखंड खरीदा था। गुप्ता ने वर्ष 1998 में मकान बनवा लिया, जबकि करीब तीन वर्ष बाद जवरीलाल ने भी वहीं अपना घर बना लिया। पड़ोसी बनने के बाद दोनों परिवारों का आपसी मेलजोल और अधिक बढ़ गया और अक्सर उनकी शामें साथ बीतती थीं।
बिना बताए कभी नहीं जाते थे
हादसे के बाद जवरीलाल के घर पर लगा ताला पड़ोसियों को भी खटक रहा है। गुप्ता बताते हैं कि जब भी जवरीलाल और उनकी पत्नी कहीं बाहर जाते थे, तो पड़ोसियों को इसकी जानकारी जरूर देते थे। इस बार भी सभी को यही लगा कि वे किसी रिश्तेदार के यहां गए होंगे। हादसे की खबर सुनकर पहले तो किसी को विश्वास ही नहीं हुआ। आरपी गुप्ता ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने इस खबर को अफवाह समझा, लेकिन बाद में उनके पुत्र सचिन, पुत्री दीपा और नवासे राहुल अग्रवाल से बात होने के बाद दुखद सच्चाई सामने आई।
अब शामें पहले जैसी नहीं रहेंगी
भावुक होते हुए गुप्ता ने कहा कि उनका सबसे करीबी मित्र अब इस दुनिया में नहीं रहा। अग्रवाल दंपती सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते थे। हादसे की सूचना क्लब के सोशल मीडिया समूह में पहुंचते ही शोक की लहर दौड़ गई। अपने मित्र को याद करते हुए गुप्ता की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि वर्षों पुरानी दोस्ती का इस तरह अचानक समाप्त हो जाना स्वीकार करना बेहद कठिन है। जवरीलाल केवल पड़ोसी या सहकर्मी नहीं, बल्कि जीवन के हर पड़ाव के साथी थे।
रिश्तेदार की सेवा को गए थे अशोक
कभी-कभी नियति ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहां एक छोटा-सा निर्णय भी जीवन की दिशा बदल देता है। किशनगढ़ के मार्बल व्यवसायी अशोक अग्रवाल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। बीमार रिश्तेदार की देखभाल के लिए वे दिल्ली गए थे, लेकिन वहीं उनका जीवन थम गया।
अशोक अग्रवाल अपने बड़े फूफाजी राधेश्याम अग्रवाल की तबीयत खराब होने की सूचना मिलने पर दिल्ली पहुंचे थे। अस्पताल में उनसे मुलाकात के बाद उन्होंने स्वयं रुककर उनकी देखभाल करने का निर्णय लिया और परिजन अंजू अग्रवाल तथा राजेश अग्रवाल को किशनगढ़ वापस भेज दिया। अगले दिन उन्हें भी लौटना था, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। बुधवार सुबह मालवीय नगर स्थित होटल में लगी भीषण आग की चपेट में आने से अशोक अग्रवाल की मृत्यु हो गई।


