अलीगढ़ के गंगा जवाहर कॉलोनी के रसिक अपार्टमेंट में लिफ्ट हादसे में प्रॉपर्टी डीलर हरिओम वर्मा की मौत पर स्थानीय निवासियों और परिजन ने लापरवाही का आरोप लगाया है। वहीं अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। प्राधिकरण ने स्वत: संज्ञान लेते हुए उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी है। यह समिति लिफ्ट की तकनीकी खामियों की जांच के साथ ही रसिक अपार्टमेंट के निर्माण में को भी परखेगी। यह भी जांच की जाएगी कि इमारत का निर्माण प्राधिकरण से पास हुए नक्शे के आधार पर हुआ है या नहीं। अगर कोई अवैध फेरबदल पाया जाता है तो इस पर सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। तीन मंजिला इमारत बनाने में सुरक्षा मानक और सामग्री की गुणवत्ता और लिफ्ट के संचालन से लेकर पूरी इमारत में आपातकालीन सुरक्षा मानकों का भी पता जांच समिति लगाएगी। छह महीने पहले भी दी थी चेतावनी प्रॉपर्टी डीलर हरिओम वर्मा की मौत के बाद अपार्टमेंट के निवासियों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यह हादसा लापरवाही का नतीजा है। छह माह पहले ही लिफ्ट के खराब संचालन और उसमें आने वाली तकनीकी दिक्कतों की बिल्डर से शिकायत की थी। करीब डेढ़ माह पहले एक डिलीवरी मैन भी लिफ्ट की डक्ट (गड्ढे) में सीधे नीचे गिरने वाला था, उस वक्त वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और अन्य स्टाफ की सजगता के कारण उसकी जान बच गई थी। खतरे की इस बड़ी चेतावनी के बावजूद बिल्डर ने लिफ्ट ठीक कराना जरूरी नहीं समझा। लोगों ने लगाया मानकों के उल्लंघन का आरोप लोगों ने बताया कि पूरी इमारत महज 600 गज के भूखंड पर बनी है। तीन मंजिल में बनी इमारत के प्रत्येक मंजिल पर चार फ्लैट बनाए गए हैं। इस तरह कुल 12 फ्लैट हैं। लोगों का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर रखकर एक अतिरिक्त फ्लैट पार्किंग एरिया में भी बनाया गया है, जो सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है। रखरखाव के लिए जाते हैं 2000 रुपए हादसे के समय मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि रसिक अपार्टमेंट में कोई भी रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसाइटी नहीं है। बिल्डर ही प्रत्येक परिवार से 2000 रुपए मासिक शुल्क रखरखाव के नाम पर ले रहे हैं। बावजूद इसके रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया है। अपार्टमेंट वर्ष 2010-11 में बनकर तैयार हुआ था। लोगों का आरोप है कि इसमें लगी लगी लिफ्ट करीब 15 साल पुरानी है। इसे बिना मरम्मत के चलाया जा रहा था। जांच के आधार पर होगी कार्रवाई एडीए के सचिव राहुल विश्वकर्मा ने बताया कि प्राधिकरण ने हादसे का स्वत: संज्ञान लिया है। अपार्टमेंट वर्ष 2010-11 में बना है। उस समय के नियम के मुताबिक नक्शा और अन्य पहलुओं की जांच होगी। जांच कमेटी गठित कर दी गई है, जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। नियमों का पूरी तरह किया गया है पालन रसिक अपार्टमेंट के विकासकर्ता बांके बिहारी बंसल का कहना है कि अपार्टमेंट का निर्माण मानकों और एडीए से स्वीकृत नक्शे के आधार पर ही किया गया है। लिफ्ट पूरी तरह सही है। प्रॉपर्टी डीलर ने लिफ्ट के नीचे आने से पहले ही उसका चैनल खोल दिया था, जिसके चलते हादसा हुआ। पार्किंग एरिया में फ्लैट स्वीकृत है। जहां तक 600 गज के भूखंड की बात है तो उस समय इसी तरह नक्शा पास होता था। जो 2000 रुपए लिए जाते हैं वह केवल लिफ्ट के लिए नहीं बल्कि पूरे अपार्टमेंट के रखरखाव के लिए हैं। लोगों से सोसायटी बना कर जिम्मेदारी लेने के लिए कहा है। कोई आगे ही नहीं आ रहा है।


