रतलाम. शहर के रियावन में इन दिनों बागेश्वर धाम की तर्ज पर श्रीमद् भागवत कथा के दौरान विशेष आकर्षण के रूप में रात 8 बजे अम्बाजी धाम निपानिया माता का दिव्य दरबार सजा। इसमें हजारों पीडि़त और श्रद्धालु अपनी अर्जियां लेकर पहुंचे। अम्बाजी धाम निपानिया के गुरु ने भक्तों की समस्याओं का अध्यात्मिक समाधान व मार्गदर्शन किया। जिसमें व्यसन मुक्ति का संकल्प: इस धाम और गुरुदेव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे अपनी हर कथा और दिव्य दरबार के माध्यम से समाज को नशा मुक्त बनाने का महती कार्य कर रहे हैं। उनके प्रभाव से अब तक हजारों लोग मांस-मदिरा और हर प्रकार के व्यसनों को हमेशा के लिए त्याग कर सदाचार का मार्ग अपना चुके हैं।
चमत्कारिक त्रिशूल और 9 परिक्रमा, अम्बाजी धाम निपानिया में पावन तट पर मां जगदंबा का मंदिर आकार ले रहा है, जहां पर एक पवित्र त्रिशूल स्थापित है। मान्यता है कि यहां केवल लच्छा डोरा धागा बांधने, नारियल चढ़ाने और त्रिशूल की नौ पवित्र परिक्रमा लगाने मात्र से भक्तों की बड़ी से बड़ी विपत्ति दूर हो जाती है और बिगड़ी तकदीर संवर जाती है।
आधुनिक युवा पीढ़ी को माता-पिता की सेवा का महत्व समझाया
रियावन में सात दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा हैं। तेज गर्मी के बावजूद हजारों श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें बुजुर्गों, युवकों और बालक भी शामिल हैं। कथा के विशेष आकर्षण के रूप में रात 8 बजे अम्बाजी धाम निपानिया माता का दिव्य दरबार सजाया गया। इसमें हजारों पीडि़त और श्रद्धालु अपनी अर्जियां लेकर पहुंचे। अम्बाजी धाम निपानिया के गुरु ने भक्तों की समस्याओं का अध्यात्मिक समाधान व मार्गदर्शन किया। कामधेनु नंदिनी गौधाम रियावन के पदाधिकारियों ने गुरु का मंच पर स्वागत किया। गुरु ने आधुनिक युवा पीढ़ी को माता-पिता की सेवा का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि माता-पिता की निस्वार्थ सेवा ही कलयुग में सबसे बड़ा धर्म है। इस संदेश से कई श्रद्धालु भावुक हुए और युवाओं ने सेवा का संकल्प लिया। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग पर जीवंत झांकी सजाई गई और अलौकिक शिव बारात निकाली गई। भाकरखेड़ी, बेलारा और बेलारी सहित कई गांवह/वें से हजारों श्रद्धालु बाराती बनकर पहुंचे। ढोल-ढमाकों पर झूमते-गाते ग्रामीणों ने इस उत्सव को एतिहासिक बना दिया।
कामधेनु नंदनी गोधाम रियावन रानीगांव बछोडिय़ा में गुरुदेव का स्वागत
कथा के दौरान दिन में जब भागवत महापुराण कथा का प्रसंग चल रहा था, तब कामधेनु नंदिनी गौधाम रियावन के पदाधिकारियों और गोसेवकों द्वारा गुरुदेव का पूरी श्रद्धा और आदर के साथ मंच पर स्वागत-सत्कार किया गया। गोसेवकों ने गुरुदेव को पुष्पमाला पहनाकर और चरण वंदना कर उनका आत्मीय अभिनंदन किया। इस दौरान गौशाला परिवार के सदस्य भी रात्रि को आयोजित हुए माँ अम्बे के भव्य दिव्य दरबार के साक्षी बने और धर्म लाभ अर्जित किया।
कुप्रथाओं पर प्रहार: गुरुदेव ने दिखाया युवा पीढ़ी को आईना
कथा के मुख्य प्रसंग के दौरान प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री अम्बाजी धाम (निपानिया) के परम पूज्य गुरुदेव सरकार ने आज की आधुनिक युवा पीढ़ी को आईना दिखाते हुए माता-पिता की सेवा पर बेहद मर्मस्पर्शी और भावुक कर देने वाला प्रसंग सुनाया। गुरुदेव ने आधुनिकता की दौड़ में बिखरते परिवारों और बुजुर्गों की उपेक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि “आज की युवा पीढ़ी अपने संस्कारों को भूल रही है। कई बच्चे अपने ही माता-पिता का आदर-सम्मान नहीं कर रहे हैं और बुढ़ापे के मोड़ पर उन्हें बेसहारा छोड़ रहे हैं, जो कि संपूर्ण समाज के लिए एक गंभीर और चिंताजनक विषय है। व्यक्ति चाहे कितना भी लंबा तिलक लगा ले या कितना भी दान-पुण्य कर ले, लेकिन यदि घर के माता-पिता दुखी हैं, तो सारे पुण्य निष्फल हैं। माता-पिता की निस्वार्थ सेवा ही इस कलयुग में संसार की सबसे बड़ी पूजा और सबसे बड़ा धर्म है।” गुरुदेव के इस मर्मस्पर्शी संदेश को सुनकर कथा पंडाल में उपस्थित हजारों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और कई युवाओं ने अपने माता-पिता की नित्य सेवा करने का संकल्प भी लिया।
कई गांवों से बाराती बनकर पहुंचे श्रद्धालु, निकली अलौकिक शिव बारात
कथा के दौरान जब भगवान शिव और माता पार्वती के अलौकिक विवाह का प्रसंग आया, तो संपूर्ण कथा परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय माता दी’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। कथा स्थल पर भगवान भोलेनाथ की अत्यंत मनमोहक और भव्य जीवंत झांकी सजाई गई। इस दिव्य प्रसंग की विशेषता यह रही कि इसमें आसपास के ग्रामीण अंचलों जैसे भाकरखेड़ी, बेलारा और बेलारी गांवों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु खुद बाराती बनकर कथा स्थल पहुंचे। ढोल-ढमाकों, ताशों और मधुर भजनों की थाप पर झूमते-गाते बाराती बने ग्रामीणों ने इस उत्सव को ऐतिहासिक बना दिया। चारों ओर गुलाल उड़ रहा था और श्रद्धालु भक्ति में सराबोर होकर नृत्य कर रहे थे।
जानिए क्या है अम्बाजी धाम निपानिया की महिमा
रियावन में देवी भागवत की अमृत वर्षा कर रहे गुरुदेव का मूल केंद्र मंदसौर जिले के दलोदा के समीप स्थित श्री अम्बाजी धाम निपानिया है, जो मालवा अंचल सहित राजस्थान और गुजरात तक के श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र बनता जा रहा है।


