आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों को सस्ते मकान उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री जन आवास योजना का नया ड्राफ्ट जारी किया है। इसमें बिल्डरों को सस्ते मकान बनाने के लिए अतिरिक्त निर्माण अधिकार (बीएआर) और विभिन्न शुल्कों में छूट देने के साथ कई नई बंदिशें भी लगाई गई हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब बिल्डर ईडब्ल्यूएस-एलआईजी के मकानों को अपने मुख्य प्रोजेक्ट से मनमर्जी की दूरी पर नहीं बना सकेंगे। आबादी के आधार पर 2 से 5 किमी के दायरे में ही ये आवास बनाने होंगे।
अब तक कई बिल्डर मुख्य आवासीय प्रोजेक्ट में ईडब्ल्यूएस-एलआईजी के फ्लैट बनाने के बजाय दूसरी जगह जमीन लेकर आवास तैयार कर देते थे। इससे इन मकानों में रहने वाले परिवार मुख्य प्रोजेक्ट से दूर हो जाते थे और उन्हें सड़क, पानी, परिवहन सहित दूसरी सुविधाएं हासिल करने में परेशानी होती थी। नए ड्राफ्ट में इस व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए दूरी की अधिकतम सीमा तय की गई है।
आबादी के हिसाब से तय होगी दूरी
10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में मुख्य प्रोजेक्ट से अधिकतम 5 किलोमीटर,
एक लाख से अधिक और 10 लाख तक आबादी वाले शहरों में 3 किलोमीटर तथा
एक लाख तक आबादी वाले शहरों में अधिकतम 2 किलोमीटर की दूरी पर ही ईडब्ल्यूएस-एलआईजी आवास बनाए जा सकेंगे।
75% तक सस्ते आवास बनाने होंगे सरकारी जमीन पर
बड़े प्रोजेक्ट में अनिवार्यता
पहले 5 हजार वर्गमीटर से बड़े भूखंड पर ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाने वाले बिल्डर के लिए ईडब्ल्यूएस-एलआईजी आवास बनाना अनिवार्य था। अब यह सीमा बढ़ाकर 10 हजार वर्गमीटर करने का प्रस्ताव है। यानी छोटे भूखंडों पर प्रोजेक्ट बनाने वाले बिल्डरों को इस अनिवार्यता से राहत मिलेगी।
दूसरी जगह आवास का पहले ही देना होगा प्रस्ताव
बिल्डर को दूसरी जगह आवास बनाने का प्रस्ताव भवन मानचित्र की स्वीकृति के समय ही देना होगा। इसके साथ 10 प्रतिशत अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र भी देना होगा।
ये छूट भी मिली
निजी बिल्डरों को प्रोत्साहित करने के लिए ईडब्ल्यूएस-एलआईजी आवास बनाने पर 1.0 अतिरिक्त बीएआर देने का प्रस्ताव है। अलग से आवासीय प्रोजेक्ट पर इमारत की ऊंचाई के अनुसार 0.75 से 2.0 तक अतिरिक्त बीएआर मिलेगा। इन आवासों पर भू-रूपांतरण सहित विभिन्न शुल्कों में 100 प्रतिशत छूट का प्रावधान भी है।
पुरानी योजना की कमियों का भी रखा ध्यान
निजी जमीन पर फ्लैट आधारित प्रोजेक्ट्स में कुल निर्मित क्षेत्र का न्यूनतम 60 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस-एलआईजी आवासों के लिए आरक्षित रखना होगा। शेष 40 प्रतिशत क्षेत्र में अन्य श्रेणियों के मकान बन सकेंगे। इसमें भी कम से कम आधा निर्मित क्षेत्र एमआईजी-ए श्रेणी के लिए रखना होगा। सरकारी जमीन पर निजी बिल्डर के जरिए आवासीय प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए न्यूनतम एक हेक्टेयर जमीन जरूरी होगी। इसमें 75 प्रतिशत तक भूमि ईडब्ल्यूएस-एलआईजी आवासों के लिए और अतिरिक्त 25 प्रतिशत अन्य श्रेणियों के लिए रखी जा सकेगी। ईडब्ल्यूएस-एलआईजी आवासों में कम से कम 25 प्रतिशत यूनिट ईडब्ल्यूएस श्रेणी की होंगी। नए ड्राफ्ट में पुरानी योजना के क्रियान्वयन में सामने आई कमियों को भी आधार बनाया गया है। इनमें निर्माण में देरी या उनका अटकना जैसी बातों पर ध्यान रखा गया है।

