सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि व्यस्क युवक-युवती के बीच आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंधों को ब्रेकअप के बाद रेप नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने शादी का वादा करके रिलेशन बनाने के आरोप वाले मामले में एक व्यक्ति को आरोपों से मुक्त कर दिया। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि प्रेम और आपसी सहमति वाले रिश्ते में बने संबंधों को ब्रेकअप के बाद अपराध नहीं बनाया जा सकता। हर टूटे रिश्ते को रेप का मामला बनाना गलत है। हालांकि, अगर शुरुआत से ही शादी का झूठा वादा करके या धोखे से सहमति हासिल की गई थी, तो मामला अलग होगा। ऐसे मामलों में यह देखना जरूरी है कि क्या सहमति वास्तव में धोखे पर आधारित थी। सुप्रीम कोर्ट की 4 प्रमुख टिप्पणियां…
‘सहमति से बने संबंध ब्रेकअप के बाद रेप नहीं’:सुप्रीम कोर्ट बोला- हर टूटे रिश्ते को रेप केस में बदलना गलत; आरोपी बरी

