रामलीला में राम बने जितेंद्र ने व्रत संकल्प,अन्न-फल त्यागा:करनाल में सिर्फ पानी पीकर कर रहे व्रत; रावण ने जनेऊ धारण किया

रामलीला में राम बने जितेंद्र ने व्रत संकल्प,अन्न-फल त्यागा:करनाल में सिर्फ पानी पीकर कर रहे व्रत; रावण ने जनेऊ धारण किया

रामलीला में कलाकार केवल मंच पर ही अपने किरदार नहीं निभाते, बल्कि उन किरदारों के आदर्शों को वास्तविक जीवन में उतारने का प्रयास भी करते हैं। करनाल जिले के पुंडरी की रामलीला में इस बार राम, रावण और हनुमान का अभिनय करने वाले तीन कलाकारों की आस्था और समर्पण चर्चा का विषय है। भगवान राम का किरदार निभाने वाले जितेंद्र शर्मा ने 11 दिन का अखंड व्रत संकल्प लिया है। वे अन्न और फल का त्याग कर केवल पानी पी रहे हैं। इस दौरान उनका वजन 83 से घटकर 69 किलो रह गया है। वहीं, रावण का अभिनय करने वाले मनीष त्यागी ने 11 दिन के लिए जनेऊ धारण किया है, जबकि हनुमान का किरदार निभाने वाले 17 वर्षीय रोहित ने भी 11 दिन का व्रत रखा है। तीनों कलाकारों के लिए रामलीला केवल अभिनय नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और जीवन में अच्छे आदर्श अपनाने का माध्यम है। 11 दिन के व्रत में 14 किलो वजन घटा, गांव की शांति के लिए कर रहे प्रार्थना भगवान राम का किरदार निभाने वाले जितेंद्र उर्फ जोनी शर्मा पेशे से शिक्षक हैं और बरसत स्थित देव सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने एमएससी, बीएड, बीटेक और एमए तक की पढ़ाई की है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बावजूद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का निर्णय लिया। पुंडरी की रामलीला में वे लगातार 11 साल तक सीता का किरदार निभाते रहे। वर्ष 2016 से उन्होंने भगवान राम की भूमिका निभानी शुरू की। जितेंद्र पहले भी नवरात्र के व्रत रखते थे, लेकिन इस बार उन्होंने जनेऊ धारण करने के साथ 11 दिन का अखंड व्रत संकल्प लिया। उन्होंने 10 अक्तूबर से व्रत शुरू किया था, जो रावण दहन के अगले दिन खुलेगा। इस दौरान वे अन्न और फल नहीं खाते तथा केवल पानी पीकर रहते हैं। उनका वजन पहले 83 किलो था, जो अब घटकर 69 किलो रह गया है। जितेंद्र ने बताया कि व्रत रखने का उद्देश्य गांव में शांति बनाए रखने के लिए भगवान से प्रार्थना करना और गांव पर उनकी कृपा बनाए रखने की कामना करना है। उन्होंने स्वीकार किया कि अन्न और फल का त्याग करने से कमजोरी महसूस होती है, लेकिन मंच पर भगवान राम का किरदार निभाते समय उन्हें कमजोरी का अहसास नहीं होता।
हालांकि, मंचन के बाद कमजोरी महसूस होती है। उन्होंने बताया कि मेडिकल जांच के दौरान उनका ऑक्सीजन स्तर भी घटा है। डॉक्टर उन्हें नारियल पानी पीने की सलाह दे रहे हैं। वजन में तेजी से आई गिरावट को लेकर रामलीला समिति भी चिंतित है, जबकि परिवार उनका पूरा साथ दे रहा है। जितेंद्र का कहना है कि रामलीला में भाग लेने और भगवान राम का किरदार निभाने के बाद से वे उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करते हैं। उनके व्यवहार और बोलने के तरीके में भी सौम्यता आई है। उनका संदेश है कि लोगों को भगवान श्रीराम से प्रेरणा लेकर मर्यादा में रहकर जीवन जीना चाहिए। रावण का किरदार निभाने वाले मनीष ने 11 दिन धारण किया जनेऊ पुंडरी की रामलीला में रावण का दमदार किरदार निभाने वाले मनीष त्यागी भी अभिनय के साथ धार्मिक नियमों और अनुशासन का पालन करते हैं। उन्होंने 11 दिन के लिए जनेऊ धारण किया है। मनीष पेशे से शिक्षक हैं और नोएडा में अपना कोचिंग संस्थान चलाते हैं। भौतिक विज्ञान विषय पर उनकी अच्छी पकड़ है। उन्होंने बीटेक और एमटेक की पढ़ाई की है। वे रंगमंच से भी जुड़े हुए हैं। मनीष वर्ष 2018 से रामलीला में रावण का किरदार निभा रहे हैं। इसके अलावा वे दशरथ और ताड़का जैसी भूमिकाएं भी पूरी लगन से निभाते हैं। उनका कहना है कि रामलीला में किसी भी किरदार को निभाने के लिए उसके प्रति आस्था, श्रद्धा और लगन जरूरी है। उन्होंने जनेऊ धारण करने के बाद उससे जुड़े नियमों का पालन किया। मनीष के अनुसार, रावण विद्वान होने के साथ भगवान शिव के भक्त भी थे। उनके जीवन की अच्छी बातों को अपनाना चाहिए, लेकिन बुरी आदतों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति के पास ज्ञान, शक्ति और भक्ति होने के बावजूद यदि उसका चरित्र अच्छा नहीं है, तो इन गुणों का महत्व भी खत्म हो जाता है। इसलिए जीवन में मर्यादा और अच्छे चरित्र को प्राथमिकता देनी चाहिए। रावण का किरदार निभाने के लिए भी उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ती है। आवाज को प्रभावशाली बनाने के लिए अभ्यास करना होता है और गले का ध्यान रखते हुए ठंडी चीजों से परहेज करना पड़ता है। इसके अलावा शारीरिक रूप से भी खुद को तैयार रखना पड़ता है। रावण की पोशाक को खास तरीके से तैयार करवाया जाता है और इसकी तैयारी करीब छह महीने पहले ही शुरू हो जाती है। 11वीं का छात्र रोहित 3 साल से निभा रहा हनुमान का किरदार हनुमान का किरदार निभाने वाले रोहित की उम्र 17 साल है। वह विक्टर इंटरनेशनल स्कूल में 11वीं कक्षा में कॉमर्स का छात्र है। वह पिछले तीन साल से रामलीला में हनुमान की भूमिका निभा रहा है। इस बार उसने भी 11 दिन का व्रत संकल्प लिया है। रोहित ने बताया कि उसे रामलीला समिति के प्रधान लालुधीमान से प्रेरणा मिली। लालुधीमान भी पहले 41 दिन का व्रत संकल्प करते थे। रोहित का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति हनुमान का किरदार निभाता है, तो उसके मन, कर्म और वचन में भी उनके आदर्शों की झलक होनी चाहिए। आस्था और श्रद्धा के साथ निभाया गया किरदार कलाकार को संतुष्टि देता है और दर्शक भी इससे प्रभावित होते हैं। उसका कहना है कि रामलीला केवल मंच पर होने वाला अभिनय नहीं है, बल्कि यह आस्था का केंद्र है, जहां भगवान श्रीराम के जीवन और आदर्शों को मंचन के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाता है। हनुमान का किरदार निभाते समय कई तरह की दिक्कतें आती हैं, लेकिन निर्देशक प्रवेश त्यागी उनका समाधान करने में मदद करते हैं। प्रवेश त्यागी कलाकारों को बताते हैं कि किरदार किस तरह निभाना है, आवाज को ऊंचा कैसे रखना है और किस दृश्य में कौन-सी गतिविधि करनी है। रोहित के अनुसार, व्रत रखने के बावजूद उसे मंच पर अपनी ऊर्जा में कमी महसूस नहीं होती। वह पूरी श्रद्धा के साथ अपनी भूमिका निभाने का प्रयास करता है। किरदार के साथ उसके आदर्शों को अपनाने की कोशिश पुंडरी की रामलीला में तीनों कलाकारों की तैयारी यह दिखाती है कि मंच पर प्रभावशाली अभिनय के पीछे लंबे अभ्यास, अनुशासन और समर्पण की भूमिका होती है। जितेंद्र शर्मा भगवान राम के आदर्शों को जीवन में उतारने का प्रयास कर रहे हैं, मनीष त्यागी रावण के व्यक्तित्व से अच्छी बातें सीखने और बुराइयों से दूर रहने का संदेश देते हैं, जबकि रोहित हनुमान के किरदार को मन, कर्म और वचन से निभाने में विश्वास रखता है। हालांकि, जितेंद्र का वजन तेजी से घटने और ऑक्सीजन स्तर कम होने की जानकारी गंभीर चिंता का विषय है। केवल पानी के सहारे इतने दिनों तक रहना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। धार्मिक आस्था और अभिनय के प्रति समर्पण के साथ कलाकारों के स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।

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