मोतिहारी के अभिषेक सिंह (31) को NIA ने सोमवार को असम से गिरफ्तार किया था। इस मामले में एक नया इनपुट सामने आया है। पुलिस सूत्रों की माने तो अभिषेक एक अनजान वीडियो कॉलिंग के जरिए इस जासूसी वाले लाइन में एंटर किया था। एक महिला ने उसे न्यूड वीडियो कॉल किया। इसकी रिकॉर्डिंग अभिषेक को भेजकर उसे लगातार ब्लैकमेल किया जाने लगा। इसके बाद उससे वो सारे काम करवाए जाने लगे जो गैरकानूनी थे। बताया जा रहा है कि ये महिला और उसके साथ मौजूद कुछ लोग पाकिस्तान के एक खुफिया ऑपरेटिव के रूप में काम करते थे। उन्हीं के संपर्क में रहकर ये उनलोगों को भारत सुरक्षा बलों से जुड़ी गोपनीय जानकारी देता था। बता दें कि अभिषेक के पिता सुरेंद्र सिंह भारतीय सेना से रिटायर्ड जवान हैं। परिवार पूर्वी चंपारण के राजेपुर थाना क्षेत्र के सेवराहा गांव का रहने वाला है। हालांकि, रिटायरमेंट के बाद से इनलोगों ने मुजफ्फरपुर के अहियापुर में जमीन खरीदकर घर बना लिया और वहीं रहने लगे। फिलहाल, NIA पता लगाने में जुटी है कि अभिषेक को किस महिला ने वीडियो कॉल किया था। इसके साथ ही ये कब से उनलोगों के साथ जुड़ा था। अभिषेक के गांव की तस्वीरें देखिए… 10 साल से नहीं आया था गांव अभिषेक की पहचान सामने आने के बाद दैनिक भास्कर की टीम उसकी हकीकत जानने के लिए मोतिहारी जिला मुख्यालय से करीब 60KM दूर सेवराहा गांव पहुंची। गांव में टीम ने उसके चचेरे भाई और अन्य ग्रामीणों से बात की। ग्रामीणों के मुताबिक, अभिषेक का गांव से संपर्क काफी कम रहा है। वह बचपन में गांव आता था, लेकिन पिछले 10 सालों से गांव नहीं आया था। हमारी टीम सबसे पहले अभिषेक के घर पहुंची। वहां देखा तो गेट पर ताला लटका था। इसके बाद टीम ने आस-पड़ोस के लोगों से बात की। इस दौरान हमारी सबसे पहले मुलाकात अभिषेक के चाचा वीरेंद्र सिंह से भी बात हुई। उन्होंने कहा, हमें उसके पकड़े जाने या उस पर लगे आरोपों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। हमें इस बारे में कुछ पता नहीं है। आपके माध्यम से ही इसकी जानकारी मिल रही है। इसी दौरान पास में बैठे रंजन कुमार सिंह ने बताया, अभिषेक और उसके परिवार का गांव में अब कोई खास आना-जाना नहीं है। पिछले एक-दो साल में किसी शादी या पूजा-पाठ के मौके पर ही उसका परिवार नहीं आया है। अभिषेक को तो हमने बचपन के बाद से देखा तक नहीं है। बड़े होने के बाद उसका चेहरा भी मुझे ठीक से याद नहीं है। उसके परिवार के लोग मुजफ्फरपुर में रहते हैं। पिता के रिटायरमेंट के बाद वो लोग वहीं अपना मकान बना लिए हैं। तब से परिवार वहीं रह रहा है। गांव में उनकी जमीन है, जिसे दूसरे लोगों को खेती-बाड़ी के लिए बटाई पर दे दिया गया है। अभिषेक का बड़ा भाई भी सेना में रंजन कुमार सिंह ने आगे बताया, अभिषेक के परिवार में कई लोग सेना में रहे हैं। परिवार के भाइयों का करीब 10 साल पहले बंटवारा हो गया था। बंटवारे के दौरान कुछ विवाद भी हुआ था। इसके बाद परिवार के सभी भाई अलग-अलग जगहों पर रहने लगे। कोई मुजफ्फरपुर में रहता है तो कोई कोलकाता और इलाहाबाद में बस गया है। शादी जैसे पारिवारिक आयोजनों में भी सभी भाइयों का एक साथ गांव आना-जाना नहीं होता है। अभिषे का बड़ा भाई विवेक सिंह सेना में जवान था। शादी के 2 साल बाद पत्नी से तलाक हो गया था। इसके बाद उसने सेना की नौकरी छोड़ दी और अपने पिता सुरेंद्र के साथ मुजफ्फरपुर में रहने लगा। अभिषेक के बारे में उन्होंने कहा, गांव में उसके बारे में ज्यादा जानकारी किसी को नहीं है। उसके व्यक्तिगत जीवन के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। असम में अभिषेक के देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े मामले में पकड़े जाने की खबर पर रंजन कुमार सिंह ने कहा, अगर उस पर लगे आरोप सही साबित होते हैं तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर बात है। इस तरह की गतिविधियों को किसी भी स्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। पिता के रिटायर होने के बाद गांव से संपर्क कम हुआ अभिषेक के चचेरे भाई टुनटुन सिंह ने बताया, मेरे पापा सबसे बड़े थे। वहीं अभिषेक के पिता यानी की चाचा सुरेंद्र सिंह पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर हैं। करीब 10 साल पहले हमलोगों के बीच बंटवारा हो गया था। वे सेना में सूबेदार पद से रिटायर हुए थे। नौकरी के दौरान परिवार का अलग-अलग जगह रहना हुआ। रिटायर्ड होने से पहले सुरेंद्र सिंह कभी-कभी गांव आते-जाते थे, लेकिन रिटायरमेंट के बाद उनका गांव आना-जाना काफी कम हो गया। करीब दो साल पहले जमीन को लेकर विवाद भी हुआ था। इसके बाद से उनका गांव आना लगभग बंद हो गया। मेरठ में पिता की पोस्टिंग के दौरान रहा था अभिषेक ग्रामीणों ने बताया, अभिषेक के पिता सुरेंद्र सिंह की सेना में नौकरी के दौरान मेरठ में पोस्टिंग हुई थी। उस समय अभिषेक भी उनके साथ मेरठ में रहता था। ग्रामीणों का दावा है कि इसी दौरान उसकी कुछ लोगों से मुलाकात हुई और वहीं से उसका संपर्क बना। हालांकि, यह संपर्क किन लोगों से था इसके बारे में जांच एजेंसियां लगातार काम कर रहीं हैं। अभिषेक ने अभी तक शादी नहीं की है। बता दें कि सोमवार को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में असम पुलिस ने बिहार के दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें भारतीय सेना का एक रिटायर्ड जवान का बेटा शामिल है। आरोपी की पहचान मोतिहारी के रहने वाले 31 साल के अभिषेक कुमार सिंह के रूप में हुई है। आरोप है कि वह गुवाहाटी में रहकर भारतीय सेना से जुड़ी खुफिया जानकारी पाकिस्तान के हैंडलर्स को भेज रहा था। पुलिस ने उसके पास से पाकिस्तान से जुड़े कई संदिग्ध सामान भी बरामद किए हैं। वहीं, दूसरे आरोपी रितेश कुमार (39) को गुवाहाटी के सतगांव इलाके में किराए के मकान से गिरफ्तार किया गया है। वह बेगूसराय का रहने वाला है। पाकिस्तान के PIO के निर्देश पर काम कर रहे थे दोनों पुलिस के मुताबिक, NIA को इनपुट मिला था कि असम में रहकर अभिषेक भारतीय सेना से जुड़ी खुफिया जानकारी पाकिस्तान के आतंकी संगठन को भेज रहा है। भारतीय सेना की गजराज कोर और असम पुलिस रितेश की कथित गतिविधियों की जांच कर रही थी। इसी दौरान शनिवार-रविवार की रात जासूसी के आरोप में अभिषेक को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान अभिषेक के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, पाकिस्तान से जुड़े कुछ दस्तावेज और अन्य संदिग्ध सामान बरामद हुए। अभिषेक की गिरफ्तारी के बाद STF ने मामले की जांच आगे बढ़ाई। इसी जांच के दौरान पुलिस रितेश कुमार सिंह तक पहुंची। आरोप है कि रितेश पाकिस्तान के एक इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (PIO) के कहने पर काम कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, उसने अभिषेक की मदद भी की थी। अभिषेक का मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि वह कितने समय से इस गतिविधि में शामिल था और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे। असम के CM ने भी की पुष्टि असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी (NIA) से मिले इनपुट के आधार पर असम पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आगे की जांच के लिए आरोपियों को केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा जाएगा। मुख्यमंत्री के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपियों को कथित तौर पर हनी ट्रैप के जरिए संवेदनशील जानकारी हासिल करने के लिए निशाना बनाया गया था। मोतिहारी के अभिषेक सिंह (31) को NIA ने सोमवार को असम से गिरफ्तार किया था। इस मामले में एक नया इनपुट सामने आया है। पुलिस सूत्रों की माने तो अभिषेक एक अनजान वीडियो कॉलिंग के जरिए इस जासूसी वाले लाइन में एंटर किया था। एक महिला ने उसे न्यूड वीडियो कॉल किया। इसकी रिकॉर्डिंग अभिषेक को भेजकर उसे लगातार ब्लैकमेल किया जाने लगा। इसके बाद उससे वो सारे काम करवाए जाने लगे जो गैरकानूनी थे। बताया जा रहा है कि ये महिला और उसके साथ मौजूद कुछ लोग पाकिस्तान के एक खुफिया ऑपरेटिव के रूप में काम करते थे। उन्हीं के संपर्क में रहकर ये उनलोगों को भारत सुरक्षा बलों से जुड़ी गोपनीय जानकारी देता था। बता दें कि अभिषेक के पिता सुरेंद्र सिंह भारतीय सेना से रिटायर्ड जवान हैं। परिवार पूर्वी चंपारण के राजेपुर थाना क्षेत्र के सेवराहा गांव का रहने वाला है। हालांकि, रिटायरमेंट के बाद से इनलोगों ने मुजफ्फरपुर के अहियापुर में जमीन खरीदकर घर बना लिया और वहीं रहने लगे। फिलहाल, NIA पता लगाने में जुटी है कि अभिषेक को किस महिला ने वीडियो कॉल किया था। इसके साथ ही ये कब से उनलोगों के साथ जुड़ा था। अभिषेक के गांव की तस्वीरें देखिए… 10 साल से नहीं आया था गांव अभिषेक की पहचान सामने आने के बाद दैनिक भास्कर की टीम उसकी हकीकत जानने के लिए मोतिहारी जिला मुख्यालय से करीब 60KM दूर सेवराहा गांव पहुंची। गांव में टीम ने उसके चचेरे भाई और अन्य ग्रामीणों से बात की। ग्रामीणों के मुताबिक, अभिषेक का गांव से संपर्क काफी कम रहा है। वह बचपन में गांव आता था, लेकिन पिछले 10 सालों से गांव नहीं आया था। हमारी टीम सबसे पहले अभिषेक के घर पहुंची। वहां देखा तो गेट पर ताला लटका था। इसके बाद टीम ने आस-पड़ोस के लोगों से बात की। इस दौरान हमारी सबसे पहले मुलाकात अभिषेक के चाचा वीरेंद्र सिंह से भी बात हुई। उन्होंने कहा, हमें उसके पकड़े जाने या उस पर लगे आरोपों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। हमें इस बारे में कुछ पता नहीं है। आपके माध्यम से ही इसकी जानकारी मिल रही है। इसी दौरान पास में बैठे रंजन कुमार सिंह ने बताया, अभिषेक और उसके परिवार का गांव में अब कोई खास आना-जाना नहीं है। पिछले एक-दो साल में किसी शादी या पूजा-पाठ के मौके पर ही उसका परिवार नहीं आया है। अभिषेक को तो हमने बचपन के बाद से देखा तक नहीं है। बड़े होने के बाद उसका चेहरा भी मुझे ठीक से याद नहीं है। उसके परिवार के लोग मुजफ्फरपुर में रहते हैं। पिता के रिटायरमेंट के बाद वो लोग वहीं अपना मकान बना लिए हैं। तब से परिवार वहीं रह रहा है। गांव में उनकी जमीन है, जिसे दूसरे लोगों को खेती-बाड़ी के लिए बटाई पर दे दिया गया है। अभिषेक का बड़ा भाई भी सेना में रंजन कुमार सिंह ने आगे बताया, अभिषेक के परिवार में कई लोग सेना में रहे हैं। परिवार के भाइयों का करीब 10 साल पहले बंटवारा हो गया था। बंटवारे के दौरान कुछ विवाद भी हुआ था। इसके बाद परिवार के सभी भाई अलग-अलग जगहों पर रहने लगे। कोई मुजफ्फरपुर में रहता है तो कोई कोलकाता और इलाहाबाद में बस गया है। शादी जैसे पारिवारिक आयोजनों में भी सभी भाइयों का एक साथ गांव आना-जाना नहीं होता है। अभिषे का बड़ा भाई विवेक सिंह सेना में जवान था। शादी के 2 साल बाद पत्नी से तलाक हो गया था। इसके बाद उसने सेना की नौकरी छोड़ दी और अपने पिता सुरेंद्र के साथ मुजफ्फरपुर में रहने लगा। अभिषेक के बारे में उन्होंने कहा, गांव में उसके बारे में ज्यादा जानकारी किसी को नहीं है। उसके व्यक्तिगत जीवन के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। असम में अभिषेक के देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े मामले में पकड़े जाने की खबर पर रंजन कुमार सिंह ने कहा, अगर उस पर लगे आरोप सही साबित होते हैं तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर बात है। इस तरह की गतिविधियों को किसी भी स्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। पिता के रिटायर होने के बाद गांव से संपर्क कम हुआ अभिषेक के चचेरे भाई टुनटुन सिंह ने बताया, मेरे पापा सबसे बड़े थे। वहीं अभिषेक के पिता यानी की चाचा सुरेंद्र सिंह पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर हैं। करीब 10 साल पहले हमलोगों के बीच बंटवारा हो गया था। वे सेना में सूबेदार पद से रिटायर हुए थे। नौकरी के दौरान परिवार का अलग-अलग जगह रहना हुआ। रिटायर्ड होने से पहले सुरेंद्र सिंह कभी-कभी गांव आते-जाते थे, लेकिन रिटायरमेंट के बाद उनका गांव आना-जाना काफी कम हो गया। करीब दो साल पहले जमीन को लेकर विवाद भी हुआ था। इसके बाद से उनका गांव आना लगभग बंद हो गया। मेरठ में पिता की पोस्टिंग के दौरान रहा था अभिषेक ग्रामीणों ने बताया, अभिषेक के पिता सुरेंद्र सिंह की सेना में नौकरी के दौरान मेरठ में पोस्टिंग हुई थी। उस समय अभिषेक भी उनके साथ मेरठ में रहता था। ग्रामीणों का दावा है कि इसी दौरान उसकी कुछ लोगों से मुलाकात हुई और वहीं से उसका संपर्क बना। हालांकि, यह संपर्क किन लोगों से था इसके बारे में जांच एजेंसियां लगातार काम कर रहीं हैं। अभिषेक ने अभी तक शादी नहीं की है। बता दें कि सोमवार को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में असम पुलिस ने बिहार के दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें भारतीय सेना का एक रिटायर्ड जवान का बेटा शामिल है। आरोपी की पहचान मोतिहारी के रहने वाले 31 साल के अभिषेक कुमार सिंह के रूप में हुई है। आरोप है कि वह गुवाहाटी में रहकर भारतीय सेना से जुड़ी खुफिया जानकारी पाकिस्तान के हैंडलर्स को भेज रहा था। पुलिस ने उसके पास से पाकिस्तान से जुड़े कई संदिग्ध सामान भी बरामद किए हैं। वहीं, दूसरे आरोपी रितेश कुमार (39) को गुवाहाटी के सतगांव इलाके में किराए के मकान से गिरफ्तार किया गया है। वह बेगूसराय का रहने वाला है। पाकिस्तान के PIO के निर्देश पर काम कर रहे थे दोनों पुलिस के मुताबिक, NIA को इनपुट मिला था कि असम में रहकर अभिषेक भारतीय सेना से जुड़ी खुफिया जानकारी पाकिस्तान के आतंकी संगठन को भेज रहा है। भारतीय सेना की गजराज कोर और असम पुलिस रितेश की कथित गतिविधियों की जांच कर रही थी। इसी दौरान शनिवार-रविवार की रात जासूसी के आरोप में अभिषेक को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान अभिषेक के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, पाकिस्तान से जुड़े कुछ दस्तावेज और अन्य संदिग्ध सामान बरामद हुए। अभिषेक की गिरफ्तारी के बाद STF ने मामले की जांच आगे बढ़ाई। इसी जांच के दौरान पुलिस रितेश कुमार सिंह तक पहुंची। आरोप है कि रितेश पाकिस्तान के एक इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (PIO) के कहने पर काम कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, उसने अभिषेक की मदद भी की थी। अभिषेक का मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि वह कितने समय से इस गतिविधि में शामिल था और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे। असम के CM ने भी की पुष्टि असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी (NIA) से मिले इनपुट के आधार पर असम पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आगे की जांच के लिए आरोपियों को केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा जाएगा। मुख्यमंत्री के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपियों को कथित तौर पर हनी ट्रैप के जरिए संवेदनशील जानकारी हासिल करने के लिए निशाना बनाया गया था।

