पूर्णिया के कृषि कॉलेज में छात्रों ने किया शैक्षणिक भ्रमण:कृषि में करियर-रोजगार के अवसरों पर जानकारी दी गई; नर्सरी में 12 हजार से ज्यादा पौधे तैयार

पूर्णिया के कृषि कॉलेज में छात्रों ने किया शैक्षणिक भ्रमण:कृषि में करियर-रोजगार के अवसरों पर जानकारी दी गई; नर्सरी में 12 हजार से ज्यादा पौधे तैयार

पूर्णिया के भोला पासवान शास्त्री कृषि कॉलेज में सैकड़ों छात्र-छात्राओं को शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। इस दौरान कॉलेज के वैज्ञानिकों ने छात्रों को कृषि क्षेत्र में मिलने वाले अवसरों, करियर और रोजगार के बारे में बताया। इसका मुख्य मकसद स्कूली स्तर से ही विद्यार्थियों को कृषि के आधुनिक प्रयोगों, तकनीकों, अनुसंधान और विभिन्न गतिविधियों से परिचित कराना था। कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों ने कृषि से जुड़ी जरूरी जानकारी ली और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में कई नई बातें सीखी। स्कूली पढ़ाई और व्यावहारिक कृषि तकनीक भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय के फ्लोरीकल्चर वैज्ञानिक डॉ. शशि रंजन प्रताप सिंह ने विद्यार्थियों को परिसर का भ्रमण कराया और कृषि विज्ञान की विभिन्न सूक्ष्म बारीकियों से अवगत कराया। साइंटिस्ट और विशेषज्ञ डॉ शशि रंजन प्रताप सिंह ने बताया कि यह शैक्षणिक यात्रा विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं उपयोगी सिद्ध हुई। स्कूली स्तर पर पढ़े जाने वाले विज्ञान और व्यावहारिक कृषि तकनीकों के बीच के अंतर को समझने का यह एक बेहतरीन अवसर है। विद्यार्थियों ने महाविद्यालय परिसर में लगे विभिन्न प्रकार के फूलों, पौधों की प्रजातियों और कृषि अनुसंधान के मॉडलों को देखा और समझा। महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों को बताया कि देश में कृषि शिक्षा और अनुसंधान का संचालन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तहत किस प्रकार किया जाता है। साथ ही महाविद्यालय की आधारभूत संरचना, प्रयोगशालाओं तथा चल रहे नए शोध कार्यों के बारे में जानकारी प्रदान की गई। कृषि विज्ञान में करियर और रोजगार के सुनहरे अवसर छात्रों से परिचर्चा के दौरान वैज्ञानिक डॉ. शशि रंजन प्रताप सिंह ने छात्रों को कृषि क्षेत्र में भविष्य संवारने के विभिन्न आयामों के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि इंटरमीडिएट में जीव विज्ञान, गणित या कृषि विषय से पढ़ाई करने वाले छात्र स्नातक स्तर पर बीएससी एग्रीकल्चर में नामांकन ले सकते हैं। कृषि विषय से पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थियों को नियमानुसार 50 प्रतिशत तक का आरक्षण लाभ भी मिलता है। करियर के लिए कहां मिलेंगे अवसर इसके अलावा बीएससी एग्रीकल्चर करने के बाद छात्र प्रखंड कृषि पदाधिकारी, सहायक तकनीकी प्रबंधक, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक जैसी सरकारी नौकरियों के साथ-साथ सिविल सर्विसेज और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। वैज्ञानिक और विशेषज्ञों ने बताया कि एमएससी और पीएचडी करने के बाद अभ्यर्थी कृषि विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर, अनुसंधान संस्थानों में वैज्ञानिक और विभिन्न जिलों में स्थित कृषि विज्ञान केंद्रों में विषय वस्तु विशेषज्ञ के रूप में अपना योगदान दे सकते हैं। इन कंपनियों में है रोजगार के अवसर कृषि क्षेत्र केवल खेती-बाड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों, बीज कंपनियों, उर्वरक और कीटनाशक उद्योग में प्रबंधन व अनुसंधान के स्तर पर उच्च पैकेज वाली नौकरियां उपलब्ध हैं। वैज्ञानिक ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ कॉरपोरेट जगत में करोड़ों के वार्षिक पैकेज पर शीर्ष पदों पर कार्य कर रहे हैं। मखाना और हाई-टेक प्लांट नर्सरी शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों का ध्यान महाविद्यालय द्वारा विकसित तकनीकियों और नर्सरी उत्पादन की ओर भी आकृष्ट कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि पूर्णिया और सीमांचल क्षेत्र मखाना उत्पादन के लिए विश्व प्रसिद्ध है। महाविद्यालय में मखाना की नई किस्म सबौर मखाना-1 पर विशेष अनुसंधान एवं कार्य किया जा रहा है। महाविद्यालय में स्थापित प्लांट नर्सरी में लगभग 12,000 से 13,000 विभिन्न प्रकार के पौधे तैयार किए गए हैं। यहा मात्र ₹3 से लेकर ₹120 तक की अत्यंत रियायती दरों पर पौधे आम जनता और किसानों के लिए उपलब्ध हैं, जो कि स्थानीय निजी नर्सरियों की तुलना में काफी सस्ती हैं। विद्यार्थियों में दिखा उत्साह स्कूली छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए बताया कि यहां आकर उन्हें पहली बार पता चला कि फूलों और पौधों की वैज्ञानिक खेती कैसे की जाती है। यह अनुभव उनके लिए बिल्कुल नया और प्रेरणादायक था, जिससे उन्हें भविष्य में कृषि विज्ञान को एक करियर विकल्प के रूप में चुनने का नया दृष्टिकोण मिला है। पूर्णिया के भोला पासवान शास्त्री कृषि कॉलेज में सैकड़ों छात्र-छात्राओं को शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। इस दौरान कॉलेज के वैज्ञानिकों ने छात्रों को कृषि क्षेत्र में मिलने वाले अवसरों, करियर और रोजगार के बारे में बताया। इसका मुख्य मकसद स्कूली स्तर से ही विद्यार्थियों को कृषि के आधुनिक प्रयोगों, तकनीकों, अनुसंधान और विभिन्न गतिविधियों से परिचित कराना था। कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों ने कृषि से जुड़ी जरूरी जानकारी ली और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में कई नई बातें सीखी। स्कूली पढ़ाई और व्यावहारिक कृषि तकनीक भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय के फ्लोरीकल्चर वैज्ञानिक डॉ. शशि रंजन प्रताप सिंह ने विद्यार्थियों को परिसर का भ्रमण कराया और कृषि विज्ञान की विभिन्न सूक्ष्म बारीकियों से अवगत कराया। साइंटिस्ट और विशेषज्ञ डॉ शशि रंजन प्रताप सिंह ने बताया कि यह शैक्षणिक यात्रा विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं उपयोगी सिद्ध हुई। स्कूली स्तर पर पढ़े जाने वाले विज्ञान और व्यावहारिक कृषि तकनीकों के बीच के अंतर को समझने का यह एक बेहतरीन अवसर है। विद्यार्थियों ने महाविद्यालय परिसर में लगे विभिन्न प्रकार के फूलों, पौधों की प्रजातियों और कृषि अनुसंधान के मॉडलों को देखा और समझा। महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों को बताया कि देश में कृषि शिक्षा और अनुसंधान का संचालन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तहत किस प्रकार किया जाता है। साथ ही महाविद्यालय की आधारभूत संरचना, प्रयोगशालाओं तथा चल रहे नए शोध कार्यों के बारे में जानकारी प्रदान की गई। कृषि विज्ञान में करियर और रोजगार के सुनहरे अवसर छात्रों से परिचर्चा के दौरान वैज्ञानिक डॉ. शशि रंजन प्रताप सिंह ने छात्रों को कृषि क्षेत्र में भविष्य संवारने के विभिन्न आयामों के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि इंटरमीडिएट में जीव विज्ञान, गणित या कृषि विषय से पढ़ाई करने वाले छात्र स्नातक स्तर पर बीएससी एग्रीकल्चर में नामांकन ले सकते हैं। कृषि विषय से पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थियों को नियमानुसार 50 प्रतिशत तक का आरक्षण लाभ भी मिलता है। करियर के लिए कहां मिलेंगे अवसर इसके अलावा बीएससी एग्रीकल्चर करने के बाद छात्र प्रखंड कृषि पदाधिकारी, सहायक तकनीकी प्रबंधक, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक जैसी सरकारी नौकरियों के साथ-साथ सिविल सर्विसेज और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। वैज्ञानिक और विशेषज्ञों ने बताया कि एमएससी और पीएचडी करने के बाद अभ्यर्थी कृषि विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर, अनुसंधान संस्थानों में वैज्ञानिक और विभिन्न जिलों में स्थित कृषि विज्ञान केंद्रों में विषय वस्तु विशेषज्ञ के रूप में अपना योगदान दे सकते हैं। इन कंपनियों में है रोजगार के अवसर कृषि क्षेत्र केवल खेती-बाड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों, बीज कंपनियों, उर्वरक और कीटनाशक उद्योग में प्रबंधन व अनुसंधान के स्तर पर उच्च पैकेज वाली नौकरियां उपलब्ध हैं। वैज्ञानिक ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ कॉरपोरेट जगत में करोड़ों के वार्षिक पैकेज पर शीर्ष पदों पर कार्य कर रहे हैं। मखाना और हाई-टेक प्लांट नर्सरी शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों का ध्यान महाविद्यालय द्वारा विकसित तकनीकियों और नर्सरी उत्पादन की ओर भी आकृष्ट कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि पूर्णिया और सीमांचल क्षेत्र मखाना उत्पादन के लिए विश्व प्रसिद्ध है। महाविद्यालय में मखाना की नई किस्म सबौर मखाना-1 पर विशेष अनुसंधान एवं कार्य किया जा रहा है। महाविद्यालय में स्थापित प्लांट नर्सरी में लगभग 12,000 से 13,000 विभिन्न प्रकार के पौधे तैयार किए गए हैं। यहा मात्र ₹3 से लेकर ₹120 तक की अत्यंत रियायती दरों पर पौधे आम जनता और किसानों के लिए उपलब्ध हैं, जो कि स्थानीय निजी नर्सरियों की तुलना में काफी सस्ती हैं। विद्यार्थियों में दिखा उत्साह स्कूली छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए बताया कि यहां आकर उन्हें पहली बार पता चला कि फूलों और पौधों की वैज्ञानिक खेती कैसे की जाती है। यह अनुभव उनके लिए बिल्कुल नया और प्रेरणादायक था, जिससे उन्हें भविष्य में कृषि विज्ञान को एक करियर विकल्प के रूप में चुनने का नया दृष्टिकोण मिला है।  

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