जबलपुर की रैना यादव भारतीय महिला हॉकी टीम की सहायक कोच के रूप में उस ऐतिहासिक टीम का हिस्सा रहीं, जिसने एशियन गेम्स में 44 साल बाद स्वर्ण पदक जीतकर ओलंपिक का टिकट पक्का किया। मंगलवार को जापान से बेंगलुरु होते हुए जबलपुर पहुंचीं रैना यादव का शहर में जगह-जगह स्वागत किया गया। उनके घर पर परिवार, साथी खिलाड़ियों और शुभचिंतकों का बधाई देने के लिए तांता लगा रहा। फाइनल से पहले चीन के हिसाब से बनाई थी रणनीति मीडिया से बातचीत में रैना ने बताया कि टूर्नामेंट से पहले टीम का लक्ष्य स्पष्ट था कि हर हाल में स्वर्ण पदक जीतकर ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना है। फाइनल में पिछले ओलंपिक की रजत पदक विजेता चीन से मुकाबला हुआ, जिसके लिए टीम ने पहले से तैयारी कर रखी थी। रैना ने बताया कि चीन और जापान के सेमीफाइनल के दौरान टीम चाहती थी कि चीन ही फाइनल में पहुंचे, क्योंकि पूरी रणनीति चीन को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी। उन्होंने कहा कि दबाव जरूर था, लेकिन टीम ने उसे सकारात्मक तरीके से लिया और मैदान पर उसी रणनीति के साथ प्रदर्शन किया। हर दिन का अलग शेड्यूल, 2028 तक का कार्यक्रम तय रैना के मुताबिक भारतीय टीम का 2028 तक का कार्यक्रम और मैच शेड्यूल तय है। खिलाड़ियों की तैयारी में तकनीकी और टैक्टिकल प्रैक्टिस, वीडियो सेशन, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग और रिकवरी से जुड़े अलग-अलग सत्र शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि टीम की तैयारी लंबे समय की योजना के अनुसार चल रही है। अप्रैल में साइन किया हॉकी इंडिया का कॉन्ट्रैक्ट रैना ने बताया कि उन्होंने अप्रैल में हॉकी इंडिया के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। इसके लिए उन्होंने लंबे समय तक तैयारी की। उनके पास इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन के विभिन्न स्तरों के कोर्स और कोचिंग से जुड़े प्रमाणपत्र हैं। इसके अलावा पटियाला से डिप्लोमा इन स्पोर्ट्स कोचिंग भी किया है। बोलीं- संघर्ष के बिना यह मुकाम आसान नहीं रैना ने अपने सफर को संघर्षपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने वालों के साथ हतोत्साहित करने वाले लोग भी मिलते हैं। उनके मुताबिक आलोचनाओं और मुश्किलों ने उन्हें और मजबूती से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अब उनका अगला लक्ष्य 2028 में अमेरिका के लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक में भारतीय टीम के साथ बेहतर प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतना है।

