कैमूर DM ने मोहनिया अंचल कार्यालय का निरीक्षण किया:700 से ज्यादा दाखिल-खारिज-जमाबंदी मामले पेंडिंग, 150 बिना ठोस कारण रोके गए

कैमूर DM ने मोहनिया अंचल कार्यालय का निरीक्षण किया:700 से ज्यादा दाखिल-खारिज-जमाबंदी मामले पेंडिंग, 150 बिना ठोस कारण रोके गए

कैमूर के मोहनिया अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज और जमाबंदी से जुड़े मामलों के निपटारे में लापरवाही सामने आई है। डीएम कुमार अनुराग के औचक निरीक्षण में 700 से अधिक मामले लंबे समय से लंबित मिले। वहीं करीब 150 ऐसे मामले भी मिले, जिन्हें बिना किसी ठोस कारण के रोककर रखा गया था। इन मामलों का समय पर निपटारा किया जा सकता था। निरीक्षण के बाद डीएम ने संबंधित अधिकारियों और कर्मियों से एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। दाखिल-खारिज और जमाबंदी के मामलों की हुई समीक्षा डीएम ने मोहनिया अंचल कार्यालय पहुंचकर वहां चल रहे कामकाज की बारीकी से समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने दाखिल-खारिज, जमाबंदी, लंबित मामलों, भूमि विवाद और कार्यालय में रखी पंजियों की स्थिति की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि दाखिल-खारिज और जमाबंदी से जुड़े बड़ी संख्या में मामले लंबे समय से लंबित हैं। डीएम ने अधिकारियों से इन मामलों के लंबित रहने का कारण पूछा। जांच में करीब 700 से अधिक मामले लंबे समय से पेंडिंग पाए गए। 150 मामले बिना वजह रोके गए जांच के दौरान करीब 150 ऐसे मामले भी मिले, जिन्हें बिना किसी ठोस कारण के लंबित रखा गया था। इन मामलों में ऐसी कोई स्पष्ट वजह नहीं मिली, जिसके कारण इनका निपटारा नहीं किया जा सकता था। डीएम ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मियों से जवाब मांगा है। सभी संबंधित लोगों को एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। जवाब मिलने के बाद जिम्मेदारी तय कर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। डीएम ने कहा- जानबूझकर पेंडिंग रखने पर होगी कार्रवाई निरीक्षण के बाद डीएम कुमार अनुराग ने अंचलाधिकारी (सीओ) समेत अन्य कर्मियों को लंबित मामलों के जल्द निपटारे का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कार्यालय की सभी प्रक्रियाओं को अपडेट रखा जाए और पंजियों का सही तरीके से संधारण किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित मुकदमों और भूमि विवादों का निपटारा पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से किया जाए। किसी मामले को बिना कारण लंबित नहीं रखा जाए। डीएम ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जानबूझकर मामलों को लंबित रखने वाले कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कार्यालय में आने वाले लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े, इसके लिए निर्धारित समय में मामलों का निपटारा करने को कहा गया है। डेढ़ महीने बाद फिर होगा विस्तृत निरीक्षण डीएम ने कहा कि अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार की स्थिति की दोबारा समीक्षा की जाएगी। इसके लिए एक से डेढ़ महीने के बाद मोहनिया अंचल कार्यालय का फिर से विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा। अगले निरीक्षण में लंबित मामलों की संख्या, उनके निपटारे की स्थिति और कार्यालय की पंजियों के अपडेट होने की जांच की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि जिन मामलों को अभी बिना कारण लंबित पाया गया है, उनका निपटारा हुआ या नहीं। जमीन से जुड़े मामलों के समय पर निपटारे पर जोर अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज और जमाबंदी से जुड़े मामलों का सीधा संबंध जमीन के रिकॉर्ड से होता है। ऐसे मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने से जमीन मालिकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी को देखते हुए डीएम ने अधिकारियों को मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता और समयबद्धता बनाए रखने का निर्देश दिया। औचक निरीक्षण में मिली कमियों के बाद अब संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। एक से डेढ़ महीने बाद होने वाले दोबारा निरीक्षण में यह स्पष्ट होगा कि लंबित मामलों के निपटारे और कार्यालयी व्यवस्था में कितना सुधार हुआ। कैमूर के मोहनिया अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज और जमाबंदी से जुड़े मामलों के निपटारे में लापरवाही सामने आई है। डीएम कुमार अनुराग के औचक निरीक्षण में 700 से अधिक मामले लंबे समय से लंबित मिले। वहीं करीब 150 ऐसे मामले भी मिले, जिन्हें बिना किसी ठोस कारण के रोककर रखा गया था। इन मामलों का समय पर निपटारा किया जा सकता था। निरीक्षण के बाद डीएम ने संबंधित अधिकारियों और कर्मियों से एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। दाखिल-खारिज और जमाबंदी के मामलों की हुई समीक्षा डीएम ने मोहनिया अंचल कार्यालय पहुंचकर वहां चल रहे कामकाज की बारीकी से समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने दाखिल-खारिज, जमाबंदी, लंबित मामलों, भूमि विवाद और कार्यालय में रखी पंजियों की स्थिति की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि दाखिल-खारिज और जमाबंदी से जुड़े बड़ी संख्या में मामले लंबे समय से लंबित हैं। डीएम ने अधिकारियों से इन मामलों के लंबित रहने का कारण पूछा। जांच में करीब 700 से अधिक मामले लंबे समय से पेंडिंग पाए गए। 150 मामले बिना वजह रोके गए जांच के दौरान करीब 150 ऐसे मामले भी मिले, जिन्हें बिना किसी ठोस कारण के लंबित रखा गया था। इन मामलों में ऐसी कोई स्पष्ट वजह नहीं मिली, जिसके कारण इनका निपटारा नहीं किया जा सकता था। डीएम ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मियों से जवाब मांगा है। सभी संबंधित लोगों को एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। जवाब मिलने के बाद जिम्मेदारी तय कर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। डीएम ने कहा- जानबूझकर पेंडिंग रखने पर होगी कार्रवाई निरीक्षण के बाद डीएम कुमार अनुराग ने अंचलाधिकारी (सीओ) समेत अन्य कर्मियों को लंबित मामलों के जल्द निपटारे का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कार्यालय की सभी प्रक्रियाओं को अपडेट रखा जाए और पंजियों का सही तरीके से संधारण किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित मुकदमों और भूमि विवादों का निपटारा पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से किया जाए। किसी मामले को बिना कारण लंबित नहीं रखा जाए। डीएम ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जानबूझकर मामलों को लंबित रखने वाले कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कार्यालय में आने वाले लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े, इसके लिए निर्धारित समय में मामलों का निपटारा करने को कहा गया है। डेढ़ महीने बाद फिर होगा विस्तृत निरीक्षण डीएम ने कहा कि अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार की स्थिति की दोबारा समीक्षा की जाएगी। इसके लिए एक से डेढ़ महीने के बाद मोहनिया अंचल कार्यालय का फिर से विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा। अगले निरीक्षण में लंबित मामलों की संख्या, उनके निपटारे की स्थिति और कार्यालय की पंजियों के अपडेट होने की जांच की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि जिन मामलों को अभी बिना कारण लंबित पाया गया है, उनका निपटारा हुआ या नहीं। जमीन से जुड़े मामलों के समय पर निपटारे पर जोर अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज और जमाबंदी से जुड़े मामलों का सीधा संबंध जमीन के रिकॉर्ड से होता है। ऐसे मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने से जमीन मालिकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी को देखते हुए डीएम ने अधिकारियों को मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता और समयबद्धता बनाए रखने का निर्देश दिया। औचक निरीक्षण में मिली कमियों के बाद अब संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। एक से डेढ़ महीने बाद होने वाले दोबारा निरीक्षण में यह स्पष्ट होगा कि लंबित मामलों के निपटारे और कार्यालयी व्यवस्था में कितना सुधार हुआ।  

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