सिंचाई विभाग की लापरवाही से रायबरेली के गांवों में बाढ़:कई गांव में जलभराव, शिवगढ़ ड्रेन की सफाई न होने से कई घर खाली कराए गए

सिंचाई विभाग की लापरवाही से रायबरेली के गांवों में बाढ़:कई गांव में जलभराव, शिवगढ़ ड्रेन की सफाई न होने से कई घर खाली कराए गए

रायबरेली जिले में इस साल बाढ़ का अलग ही रूप देखने को मिला। अमूमन हर साल गंगा के तटीय (कटरी) इलाके प्रभावित होते थे, लेकिन इस बार सदर और महराजगंज तहसील के 15 गांव पानी-पानी हो गए। इसकी मुख्य वजह बनी शिवगढ़ ड्रेन। सालों से सफाई न होने के कारण बारिश आते ही यह नाला उफान पर आ गया और पानी सीधा लोगों के घरों व खेतों में जा घुसा, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) सहदेव मिश्र और आपदा विशेषज्ञ अंकित पांडेय ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष (मार्च से सितंबर) में अब तक जिले में आपदा के कुल 386 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनके एवज में 3 करोड़ 9 लाख 43 हजार 900 रुपये की राहत राशि बांटी जा चुकी है। डूबने और सर्पदंश से सबसे ज्यादा 75 मौतें जिले में पिछले 6 महीनों के भीतर प्राकृतिक व दैवीय आपदाओं के कारण कुल 103 लोगों की जान चली गई। राहत की बात यह है कि सभी 103 मृतकों के परिजनों को प्रति परिवार 4 लाख रुपये की दर से राहत राशि स्वीकृत कर खातों में भेजी जा चुकी है। लेखपाल की रिपोर्ट आते ही 24 से 72 घंटे के भीतर यह भुगतान किया गया। आंकड़ों पर नजर डालें तो 103 मौतों में से 72% से अधिक जानें केवल डूबने और सांप के डंसने से गई हैं। इनमें सबसे ज्यादा 38 मौतें नदी, नहर और तालाबों में डूबने से हुईं, जबकि 37 लोगों की जान सर्पदंश (सांप के काटने) के कारण गई। इसके अलावा आंधी-तूफान की चपेट में आकर 10, आकाशीय बिजली (वज्रपात) से 6, अग्निकांड में 5, सांड व नीलगाय के हमले में 4 और अतिवृष्टि से 3 लोगों की मौत दर्ज की गई। अगर माहवार आंकड़ों को देखें तो अप्रैल में 8, मई में 14, जून में 12, जुलाई में 31, अगस्त में 20 और सितंबर में 18 मौतें हुईं। मकान, पशु और सामान के नुकसान पर मिला मुआवजा आपदा के कुल 386 प्रकरणों में मौतों के अलावा मकान, पशु और अन्य नुकसान के मामले भी शामिल हैं- मकान क्षति: आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए 164 मकानों के मालिकों को कुल 8.70 लाख रुपये की मुआवजा राशि दी गई। नियमों के मुताबिक 15% से अधिक नुकसान पर कच्चे घर के लिए 4,000 रुपये और पक्के घर के लिए 6,500 रुपये दिए जाते हैं। पशु हानि: पशुधन के नुकसान के 63 मामले सामने आए, जिनमें पशुपालकों को राहत के तौर पर 22 लाख 72 हजार 900 रुपये का भुगतान किया गया। इसमें दुधारू पशुओं (गाय, भैंस) पर 37,500 रुपये, बड़े पशुओं (बैल, घोड़ा) पर 32,000 रुपये और छोटे पशुओं पर 20,000 रुपये तक की मदद दी जाती है। घरेलू सामान सहायता: घर गिरने या डूबने के कारण कपड़े और बर्तन के नुकसान से जुड़े 56 मामले दर्ज हुए। इसमें पीड़ितों को कपड़े के लिए 2,500 रुपये और बर्तन व घरेलू सामान के लिए 2,500 रुपये (कुल 5,000 रुपये प्रति परिवार) के हिसाब से 3.01 लाख रुपये बांटे गए। फसल नुकसान: फिलहाल सिंचित फसल नुकसान का आंकड़ा शून्य है। मानक के अनुसार 33% से अधिक नुकसान होने पर 18,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से राहत दी जाती है। 15 गांवों के 400 परिवारों को राहत किट महराजगंज और सदर तहसील के 15 बाढ़ग्रस्त गांवों में से 11 गांवों में आबादी और खेती दोनों प्रभावित हुई थी, जबकि 4 गांवों में केवल खेती पर असर पड़ा। प्रशासन ने नावों और गोताखोरों की मदद से दुर्गम इलाकों तक पहुंचकर 400 प्रभावित परिवारों को 26 जरूरी सामानों वाली सरकारी राहत किट वितरित की। इसके साथ ही प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा, बिजली और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में 15 चौपालें लगाई गईं, ताकि समस्याओं का मौके पर ही समाधान हो सके। तटीय इलाकों की सुरक्षा के लिए 22 बाढ़ चौकियां और 44 गोताखोरों व आपदा मित्रों को तैनात किया गया था। 24 घंटे एक्टिव रहता है कंट्रोल रूम जिले में आपदा प्रबंधन के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम संचालित होता है, जहां 12 से 15 कर्मचारी 8-8 घंटे की शिफ्ट में तैनात रहते हैं। आपात स्थिति की जानकारी स्थानीय ब्लॉक कर्मचारियों के माध्यम से कंट्रोल रूम को मिलती है। मौसम और आपदा की जानकारी के लिए ‘सचेत’ (SACHET) ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके जरिए मिलने वाले अलर्ट को डीडीएमए (DDMA) द्वारा व्हाट्सएप, एसएमएस, आपदा मित्रों और सामुदायिक रेडियो के जरिए तुरंत आम जनता तक पहुंचाया जाता है। सटीक डेटा के लिए जिले की 6 तहसीलों में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) और 55 ब्लॉकों में ऑटोमैटिक रेन गेज (ARG) लगाए गए हैं, जो बारिश और मौसम की स्वचालित जानकारी देते हैं।

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