गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर हुई सुनवाई:सीबीआई बोली- दहेज प्रताड़ना के साक्ष्य नहीं मिले; कोर्ट ने आवेदन से बात हटाने को कहा

गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर हुई सुनवाई:सीबीआई बोली- दहेज प्रताड़ना के साक्ष्य नहीं मिले; कोर्ट ने आवेदन से बात हटाने को कहा

भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा केस में जेल में बंद पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर बुधवार को एक बार फिर सुनवाई हुई। सीबीआई की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य नहीं मिले हैं, जिनसे यह साबित हो कि गिरिबाला सिंह ने बहू ट्विशा सिंह को दहेज प्रताड़ना के लिए परेशान किया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गिरिबाला सिंह के वकीलों को जमानत आवेदन से दहेज प्रताड़ना से जुड़ी बात हटाने के निर्देश दिए। हालांकि, उन्हें अभी जेल में ही रहना होगा। मामले में अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी। इससे पहले हुई सुनवाई में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका का विरोध किया गया था। दहेज हत्या के आरोप में मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा था। भोपाल जिला न्यायालय में भी पूर्व न्यायाधीश की जमानत याचिका का विरोध किया गया था। राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में एक कानूनी आधार भी रखा गया था। सुनवाई के दौरान बताया गया कि अगर किसी महिला की शादी के 7 साल के भीतर अप्राकृतिक परिस्थितियों में मौत होती है, तो कानून के तहत पति और ससुराल पक्ष पर संदेह की स्थिति बनती है। ट्विशा की शादी 9 दिसंबर 2025 को हुई थी और 12-13 मई 2026 की रात उसकी मौत हुई थी। यानी शादी के करीब 5 महीने बाद ही उसकी मौत हो गई थी। पुलिस का आरोप है कि निचली अदालत ने इस अहम कानूनी पहलू को नजरअंदाज किया। 24 मई को डेडबॉडी का दूसरा पोस्टमॉर्टम किया था बता दें कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 22 मई के आदेश पर दिल्ली एम्स के मेडिकल बोर्ड ने 24 मई को ट्विशा की डेडबॉडी का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया था। एम्स में फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने कहा- किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले बोर्ड ने सभी संभावित पहलुओं से मामले की विस्तार से जांच की। उन्होंने कहा- यह आत्महत्या का मामला था और शव पर मारपीट का कोई निशान नहीं मिला। 12 मई को हुई थी ट्विशा की मौत ट्विशा शर्मा 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में मृत मिली थीं। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया था, जबकि मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया। पहले पोस्टमॉर्टम पर सवाल उठने के बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली AIIMS से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने के निर्देश दिए थे।

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