11 हजार करोड़ से सिंचाई और वाटर बैंक – मंत्री:अररिया में दिलीप जायसवाल बोले- कोसी-मेची लिंक से बाढ़ अब किसानों के लिए बनेगी वरदान

11 हजार करोड़ से सिंचाई और वाटर बैंक – मंत्री:अररिया में दिलीप जायसवाल बोले- कोसी-मेची लिंक से बाढ़ अब किसानों के लिए बनेगी वरदान

बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने अररिया शहर में पत्रकारों से बात की। उन्होंने कोसी-मेची लिंक परियोजना को बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान बताया। मंत्री ने कहा कि यह परियोजना बाढ़ को किसानों के लिए वरदान में बदल देगी। उन्होंने बताया कि नेपाल सीमा से सटे अररिया और सुपौल जिलों में हर साल बाढ़ से भारी तबाही होती है। दो लाख हेक्टेयर इलाके में सिंचाई की व्यवस्था कोसी और महानंदा नदियों का पानी इन जिलों के लिए हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है। मंत्री ने साफ किया कि बिहार सरकार ने केंद्र की मदद से इस समस्या का स्थायी हल खोजना शुरू कर दिया है। 11 हजार करोड़ रुपये की कोसी-मेची लिंक परियोजना से करीब दो लाख हेक्टेयर इलाके में सिंचाई की व्यवस्था होगी। इससे एक वाटर बैंक भी बनेगा। नेपाल से आने वाला अतिरिक्त पानी, जिसे अब तक एक चुनौती माना जाता था, अब जमा किया जाएगा। यह पानी किसानों की खुशहाली का जरिया बनेगा। यानी बाढ़ के पानी को सही तरीके से इस्तेमाल किया जाएगा। फल्गु और सोन नदियों को भी जोड़ा जाएगा डॉ. जायसवाल ने बताया कि इस परियोजना का करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपये का टेंडर हो चुका है। कोसी-मेची लिंक और महानंदा बेसिन प्रोजेक्ट का काम शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में तीन हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी पास किया है, जिससे फल्गु और सोन नदियों को भी जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि फल्गु, सोन, गंगा, कोसी और महानंदा जैसी नदियों को जोड़ने का यह काम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सपना था, जो अब पूरा हो रहा है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि नदी जोड़ो अभियान से आने वाले समय में बाढ़ से छुटकारा मिलेगा और अतिरिक्त पानी का सही इस्तेमाल सिंचाई के लिए होगा। अररिया जैसे सीमावर्ती जिले में यह परियोजना न सिर्फ बाढ़ को रोकेगी, बल्कि खेती की पैदावार बढ़ाने का भी बड़ा जरिया बनेगी। सरकार का लक्ष्य साफ है – चुनौती को अवसर में बदलना और किसानों को राहत पहुंचाना। बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने अररिया शहर में पत्रकारों से बात की। उन्होंने कोसी-मेची लिंक परियोजना को बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान बताया। मंत्री ने कहा कि यह परियोजना बाढ़ को किसानों के लिए वरदान में बदल देगी। उन्होंने बताया कि नेपाल सीमा से सटे अररिया और सुपौल जिलों में हर साल बाढ़ से भारी तबाही होती है। दो लाख हेक्टेयर इलाके में सिंचाई की व्यवस्था कोसी और महानंदा नदियों का पानी इन जिलों के लिए हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है। मंत्री ने साफ किया कि बिहार सरकार ने केंद्र की मदद से इस समस्या का स्थायी हल खोजना शुरू कर दिया है। 11 हजार करोड़ रुपये की कोसी-मेची लिंक परियोजना से करीब दो लाख हेक्टेयर इलाके में सिंचाई की व्यवस्था होगी। इससे एक वाटर बैंक भी बनेगा। नेपाल से आने वाला अतिरिक्त पानी, जिसे अब तक एक चुनौती माना जाता था, अब जमा किया जाएगा। यह पानी किसानों की खुशहाली का जरिया बनेगा। यानी बाढ़ के पानी को सही तरीके से इस्तेमाल किया जाएगा। फल्गु और सोन नदियों को भी जोड़ा जाएगा डॉ. जायसवाल ने बताया कि इस परियोजना का करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपये का टेंडर हो चुका है। कोसी-मेची लिंक और महानंदा बेसिन प्रोजेक्ट का काम शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में तीन हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी पास किया है, जिससे फल्गु और सोन नदियों को भी जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि फल्गु, सोन, गंगा, कोसी और महानंदा जैसी नदियों को जोड़ने का यह काम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सपना था, जो अब पूरा हो रहा है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि नदी जोड़ो अभियान से आने वाले समय में बाढ़ से छुटकारा मिलेगा और अतिरिक्त पानी का सही इस्तेमाल सिंचाई के लिए होगा। अररिया जैसे सीमावर्ती जिले में यह परियोजना न सिर्फ बाढ़ को रोकेगी, बल्कि खेती की पैदावार बढ़ाने का भी बड़ा जरिया बनेगी। सरकार का लक्ष्य साफ है – चुनौती को अवसर में बदलना और किसानों को राहत पहुंचाना।  

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