बागपत में भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने चीनी मिलों और गन्ना समितियों के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। यह चेतावनी गन्ना किसानों के 15 प्रतिशत बकाया ब्याज, पिछले 30 साल के गन्ना आपूर्ति रिकॉर्ड और स्थानीय समस्याओं को लेकर दी गई है। मंगलवार को एडवोकेट कपिल कुमार पूनिया और युवा जिला अध्यक्ष विकास सांगवान ने एक प्रेस वार्ता में किसानों की समस्याएं बताईं। एडवोकेट कपिल कुमार पूनिया ने बताया कि नियमों के अनुसार, गन्ना देने के 15वें दिन से किसानों की बकाया रकम पर ब्याज मिलना शुरू हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने किसानों को 15 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश दिया है। इसके बावजूद, चीनी मिलें और गन्ना समितियां किसानों को उनका बकाया ब्याज नहीं दे रही हैं। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी बागपत, रमाला और किनौनी चीनी मिलें, साथ ही उनसे जुड़ी गन्ना समितियां किसानों को पिछले 30 साल का गन्ना आपूर्ति रिकॉर्ड नहीं दे रही हैं। उनका कहना है कि रिकॉर्ड मिलने से किसान अपने ब्याज और भुगतान का पूरा हिसाब देख पाएंगे। युवा जिला अध्यक्ष विकास सांगवान ने बताया कि किसानों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी देने के लिए अगले हफ्ते से जिले के गांवों में छोटी सभाएं की जाएंगी। इसके अलावा, अगले महीने पीपली में होने वाली ‘देश बचाओ मोर्चा’ की महापंचायत के लिए भी ग्रामीणों को जमा किया जाएगा। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर जल्दी ही 30 साल का रिकॉर्ड और 15 प्रतिशत ब्याज का हिसाब नहीं दिया गया, तो चीनी मिलों के गेट पर तालाबंदी कर आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान गन्ना भुगतान और धान खरीद पोर्टल जैसी किसानों की दूसरी समस्याएं भी उठाई जाएंगी।

