जदयू का नाम बदलकर ‘जनता दल नीतीश’ करने की चर्चा से शुक्रवार को बिहार का सियासी पारा अचानक चढ़ गया। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा की इस बात या पहल पर खुद जदयू के भीतर मतभेद और बयानों में विरोधाभास सामने आ गए हैं। पार्टी के कुछ बड़े चेहरे इस बात पर तुरंत मुहर लगाने के पक्ष में दिखे। वहीं पुराने और वरिष्ठ नेताओं ने इसे व्यक्तिगत विचार बताकर फैसला पार्टी फोरम पर छोड़ने की बात कही। ब्रांड नीतीश कुमार बनाम पार्टी की आम सहमति जदयू की पूरी राजनीति हमेशा से नीतीश कुमार के चेहरे और साख पर टिकी रही है। संजय झा और श्रवण कुमार जैसे नेता चाहते हैं कि ‘ब्रांड नीतीश’ को पार्टी के नाम में शामिल कर चुनावी और सांगठनिक लाभ लिया जाए। हालांकि, विजेंद्र यादव जैसे कद्दावर समाजवादी नेता का बयान यह उजागर करता है कि बिना औपचारिक बैठक और सर्वसम्मति के ऐसे बड़े फैसले को पार्टी का सामूहिक फैसला नहीं माना जा सकता। अंदरूनी बयानों के इसी विरोधाभास को विपक्ष पार्टी के बिखराव और भविष्य की असुरक्षा के रूप में भुनाने में जुट गया है। जदयू बोला-अपना घर संभालें राजद नेता… राजद का दावा-जदयू दो महीने में बिखर जाएगा श्रवण ने किया नाम बदलने का स्वागत तो विजेंद्र ने गेंद संगठन के पाले में डाली नाम बदलने की चर्चा पर खींचतान… जदयू में समर्थन और ‘व्यक्तिगत विचार’ के बीच फंसी चर्चा, विपक्ष ने कसा टूट का तंज भाई वीरेंद्र (वरिष्ठ नेता, राजद) : जदयू के नए नाम की चर्चा पर तंज कसते हुए भाई वीरेंद्र ने कहा-जो लोग नाम बदलने की बात कह रहे हैं, वही पार्टी को बर्बाद कर चुके हैं। और अगले एक-दो महीने में इसे तोड़ने वाले हैं। जब पार्टी टूट जाएगी और महज दो-चार-पांच लोग ही बचेंगे, तब उसका नाम ‘’जनता दल नीतीश’’ होगा। नीरज कुमार (मुख्य प्रदेश प्रवक्ता, जदयू): नीतीश कुमार जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनके बाद निशांत कुमार पार्टी के सर्वमान्य नेता हैं। जदयू के नाम में ही ‘यूनाइटेड’ है, इसलिए इसके क्षरण या टूट की बात बेमानी है। जिसे भरोसा न हो, वह समता पार्टी से जदयू तक का सफर देख ले। राजद पहले अपना घर ठीक करे। जदयू कोटे से मंत्री श्रवण कुमार ने ‘जनता दल नीतीश’ नाम का खुलकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जदयू पूरी तरह नीतीश कुमार के नाम और काम पर ही चल रहा है। नीतीश कुमार पार्टी के सर्वमान्य नेता, ‘विकास पुरुष’ और ‘विश्वकर्मा’ हैं। पार्टी के नाम में उनका नाम जुड़ना चाहिए और इसे बैठक में सर्वसम्मति से पारित किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, डिप्टी सीएम विजेंद्र प्रसाद यादव ने सधे अंदाज में मामला संगठन के पाले में डाल दिया। उन्होंने कहा, ‘यह संजय झा की अपनी इच्छा है न! अच्छी इच्छा है। जब पार्टी के सामने औपचारिक प्रस्ताव आएगा, तब संगठन इस पर विचार और फैसला करेगा।’ विजेंद्र यादव ने न तो सीधे समर्थन किया और न ही विरोध। कहा कि किसी की व्यक्तिगत इच्छा के बजाय बैठक से ही अंतिम फैसला होगा। जदयू का नाम बदलकर ‘जनता दल नीतीश’ करने की चर्चा से शुक्रवार को बिहार का सियासी पारा अचानक चढ़ गया। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा की इस बात या पहल पर खुद जदयू के भीतर मतभेद और बयानों में विरोधाभास सामने आ गए हैं। पार्टी के कुछ बड़े चेहरे इस बात पर तुरंत मुहर लगाने के पक्ष में दिखे। वहीं पुराने और वरिष्ठ नेताओं ने इसे व्यक्तिगत विचार बताकर फैसला पार्टी फोरम पर छोड़ने की बात कही। ब्रांड नीतीश कुमार बनाम पार्टी की आम सहमति जदयू की पूरी राजनीति हमेशा से नीतीश कुमार के चेहरे और साख पर टिकी रही है। संजय झा और श्रवण कुमार जैसे नेता चाहते हैं कि ‘ब्रांड नीतीश’ को पार्टी के नाम में शामिल कर चुनावी और सांगठनिक लाभ लिया जाए। हालांकि, विजेंद्र यादव जैसे कद्दावर समाजवादी नेता का बयान यह उजागर करता है कि बिना औपचारिक बैठक और सर्वसम्मति के ऐसे बड़े फैसले को पार्टी का सामूहिक फैसला नहीं माना जा सकता। अंदरूनी बयानों के इसी विरोधाभास को विपक्ष पार्टी के बिखराव और भविष्य की असुरक्षा के रूप में भुनाने में जुट गया है। जदयू बोला-अपना घर संभालें राजद नेता… राजद का दावा-जदयू दो महीने में बिखर जाएगा श्रवण ने किया नाम बदलने का स्वागत तो विजेंद्र ने गेंद संगठन के पाले में डाली नाम बदलने की चर्चा पर खींचतान… जदयू में समर्थन और ‘व्यक्तिगत विचार’ के बीच फंसी चर्चा, विपक्ष ने कसा टूट का तंज भाई वीरेंद्र (वरिष्ठ नेता, राजद) : जदयू के नए नाम की चर्चा पर तंज कसते हुए भाई वीरेंद्र ने कहा-जो लोग नाम बदलने की बात कह रहे हैं, वही पार्टी को बर्बाद कर चुके हैं। और अगले एक-दो महीने में इसे तोड़ने वाले हैं। जब पार्टी टूट जाएगी और महज दो-चार-पांच लोग ही बचेंगे, तब उसका नाम ‘’जनता दल नीतीश’’ होगा। नीरज कुमार (मुख्य प्रदेश प्रवक्ता, जदयू): नीतीश कुमार जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनके बाद निशांत कुमार पार्टी के सर्वमान्य नेता हैं। जदयू के नाम में ही ‘यूनाइटेड’ है, इसलिए इसके क्षरण या टूट की बात बेमानी है। जिसे भरोसा न हो, वह समता पार्टी से जदयू तक का सफर देख ले। राजद पहले अपना घर ठीक करे। जदयू कोटे से मंत्री श्रवण कुमार ने ‘जनता दल नीतीश’ नाम का खुलकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जदयू पूरी तरह नीतीश कुमार के नाम और काम पर ही चल रहा है। नीतीश कुमार पार्टी के सर्वमान्य नेता, ‘विकास पुरुष’ और ‘विश्वकर्मा’ हैं। पार्टी के नाम में उनका नाम जुड़ना चाहिए और इसे बैठक में सर्वसम्मति से पारित किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, डिप्टी सीएम विजेंद्र प्रसाद यादव ने सधे अंदाज में मामला संगठन के पाले में डाल दिया। उन्होंने कहा, ‘यह संजय झा की अपनी इच्छा है न! अच्छी इच्छा है। जब पार्टी के सामने औपचारिक प्रस्ताव आएगा, तब संगठन इस पर विचार और फैसला करेगा।’ विजेंद्र यादव ने न तो सीधे समर्थन किया और न ही विरोध। कहा कि किसी की व्यक्तिगत इच्छा के बजाय बैठक से ही अंतिम फैसला होगा।

