बिहार में AK-47 से सबसे बड़ा मर्डर-सरेआम मारीं 30 गोलियां:पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर बोले-ऐसी हत्या नहीं देखी, मुजफ्फरपुर मेयर के हत्यारोपी कैसे बरी हो गए

बिहार में AK-47 से सबसे बड़ा मर्डर-सरेआम मारीं 30 गोलियां:पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर बोले-ऐसी हत्या नहीं देखी, मुजफ्फरपुर मेयर के हत्यारोपी कैसे बरी हो गए

तारीख- 23 सितंबर 2018 समय- शाम करीब 7 बजे जगह- चंदवारा, मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर के पहले मेयर समीर कुमार अपने होटल आर्या से निकलकर मिठनपुरा स्थित घर जा रहे थे। कार ड्राइवर रोहित कुमार चला रहा था। रास्ते में अंधेरा था। कुछ जगहों पर लाइट्स जल रही थीं। गाड़ी जैसे ही नवाब रोड चंदवारा इलाके में एक प्राइवेट स्कूल के पास पहुंची एक बाइक सामने से आकर रुकी। उसपर दो अपराधी बैठे थे। पीछे बैठे अपराधी ने AK-47 निकाली और गोलियों की बौछार कर दी। उसने मैगजीन खाली होने तक ट्रिगर दबाए रखा। गोली खत्म होने पर AK-47 शांत हुई तो दूसरी मैगजीन लोड की और दनादन गोलियां चलाकर उसे भी खाली कर दिया। चंद मिनटों में सरे राह डबल मर्डर की सनसनीखेज वारदात को अंजाम देकर अपराधी फरार हो गए। पीड़ित परिवार और सरकारी वकील से बातचीत के आधार पर आज बिहार फाइल्स में बात मुजफ्फरपुर डबल मर्डर के पूरे घटनाक्रम की। पहले जानिए कौन थे समीर कुमार समीर कुमार मुजफ्फरपुर नगर निगम के पहले मेयर थे। 2002 से 2007 तक इस पद पर रहे। राजनीतिक और सामाजिक तौर पर शहर की बड़ी हस्तियों में गिने जाते थे। बिहार के राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के साथ उनके अच्छे संबंध थे। 2005 में मेयर रहते हुए शहरी इलाके से लोजपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़े। 2009 में इसी सीट से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़े। दोनों बार जीत न पाए। 2017 में समीर कुमार ने भूमिहार-ब्राह्मण संगठन बनाया। इनकी प्लानिंग 2019 में मुजफ्फरपुर से लोकसभा चुनाव लड़ने की थी। इसके अलावा शहर में ही चल रहे आर्या होटल के वो मालिक थे।
AK-47 से दिवाली के जैसी फायरिंग शुरु हो गई 23 सितंबर 2018 की शाम अपराधियों ने AK-47 से फायरिंग कर समीर कुमार के शरीर को छलनी कर दिया था। हॉस्पिटल में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर समीर के शरीर में 30-32 गोली देखकर चौंक गए थे। कहां कि ऐसी हत्या नहीं देखी। उनके ड्राइवर को 10 गोली लगी थी। गोलियों की ऐसी बारिश हुई थी कि समीर की कार का नक्शा बिगड़ गया था। आगे के शीशे में छेद ही छेद दिख रहे थे। गाड़ी की बॉडी पर गोलियों के निशान पड़े थे। फायरिंग की आवाज ऐसी आई मानों कोई दिवाली के पटाखे की लड़ी छुड़ा रहा है। वारदात स्थल के पास एक CCTV कैमरा लगा था। इसमें डबल मर्डर की घटना कैद हुई थी। साफ दिख रहा था कि एक कार बाएं टर्न लेते हुए मिठनपुरा की ओर जाने के लिए सीधे बढ़ रही थी। अपोजिट साइड से बाइक आई और कार के सामने रूकी। फिर अपराधी ने फायरिंग कर दी। उस वक्त अंधेरा हो चुका था। कार की लाइट जल रही थी। गोलीबारी के बाद भी वह जलती रह गई। गोलियों की तड़तड़ाहट से आसपास के इलाके में रहने वाले सारे लोग दहशत में आकर भागने लगे। अब जानिए थानेदार ने अपने बयान क्या दर्ज कराया था घटना मुजफ्फरपुर के नगर थाना क्षेत्र में हुई। उस वक्त इंस्पेक्टर मो. शुजाउद्दीन वहां के थानेदार थे। इन्होंने अपने बयान पर FIR (696/18) दर्ज की थी। थानेदार ने लिखा, ‘शाम में 6:55 बजे पेट्रोलिंग करते वक्त सूचना मिली कि नवाब रोड चंदवारा में कोई घटना घटी है। इसकी जानकारी सीनियर अधिकारियों को दी, फिर घटनास्थल पर पहुंचे। वहां बहुत सारे लोगों की भीड़ लगी थी।’ ‘एक एक्सेंट कार के अंदर दो लोग गंभीर हालत में थे। उनके सिर और शरीर में कई गोलियां लगी हुई थी। दोनों को पुलिस की जीप से ASI सुभाष चंद्र सिंह के साथ SKMCH भेजा गया। हॉस्पिटल पहुंचते ही डॉक्टर ने दोनों की मौत की पुष्टि कर दी थी।’ वारदात स्थल पर पहुंचे थानेदार ने कार की जांच की थी। FIR में उन्होंने इसका जिक्र करते हुए लिखा था, ‘शुरुआती जांच करने पर पता चला कि कार के फ्रंट शीशा पर गोलियों से 19 छेद हुए थे। इसके अलावा भी कई और छेद दिखे। वारदात किसी अत्याधुनिक हथियार से अंजाम दिया गया है।’ उस वक्त थानेदार ने 302/120B/34IPC और 27 आर्म्स एक्ट की धारा के तहत अज्ञात अपराधियों के खिलाफ केस दर्ज किया। जांच के लिए सब इंस्पेक्टर धीरज कुमार सिंह को इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (IO) बनाया था। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से कई खोखे बरामद किए। जांच के क्रम में पुलिस ने दो अपराधियों की पहचान की। सुजीत नाम का अपराधी बाइक चला रहा था। पीछे गोविंद नाम का अपराधी बैठा था। उसी ने AK-47 से फायरिंग की थी। वारदात के बाद शूटर, उसका साथी, साजिश रचने से लेकर हथियार उपलब्ध कराने वाले तक, इस कांड से जुड़े सभी आरोपी गिरफ्तारी के डर से फरार हो गए थे। तीन महीने बाद तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। बाद में पुलिस को 11 को अलग-अलग वक्त गिरफ्तार किया। इनमें शूटर गोविंद और बाइक चलाने वाला उसका मददगार अपराधी सुजीत भी शामिल थे। करोड़ों रुपए की 10 कट्ठा जमीन के लिए मारे गए समीर कुमार मुजफ्फरपुर में कल्याण मछली मंडी है। इस इलाके में 10 कट्ठा जमीन का एक प्लॉट था। समीर कुमार का इसपर दावा था। करोड़ों रुपए की इस संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। गिरफ्तारी के बाद शूटर गोविंद को पुलिस ने पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया था। उसने पुलिस को बताया कि अगर वह समीर कुमार की हत्या नहीं करता तो उसकी हत्या करा दी जाती। मछली मंडी की जमीन पर गोविंद का कब्जा था। इसको लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था। उस समय मुजफ्फरपुर के तत्कालीन SSP मनोज कुमार ने समीर कुमार और उनके ड्राइवर की हत्या में 9 लोगों की भूमिका सामने आने की जानकारी दी थी। इस कांड में जांच करते हुए पुलिस ने दो चार्जशीट मुजफ्फरपुर कोर्ट में दाखिल की थी। पहली चार्जशीट शूटर गोविंद और उसके साथी सुजीत समेत 7 अपराधियों के खिलाफ दाखिल की गई थी। इसके बाद भी पुलिस की जांच जारी थी। उसी क्रम में मुजफ्फरपुर के बड़े प्रॉपर्टी डीलर आशुतोष शाही का नाम सामने आया। जांच कर रही पुलिस टीम ने उनसे पूछताछ की थी। अपराधियों से मिले कनेक्शन, उनसे हुई पूछताछ और उस दौरान मिले सबूतों के आधार पर पुलिस ने कोर्ट में दूसरी चार्जशीट दाखिल की। इसमें आशुतोष शाही को भी आरोपी बनाया था। 2023 में हुई थी आशुतोष शाही की हत्या समीर कुमार की हत्या के करीब 4 साल 9 महीने बीत गए थे। कोर्ट में ट्रायल चल रहा था। 21 जुलाई 2023 को मुजफ्फरपुर में ही अपराधियों ने आशुतोष शाही को गोलियों से भून दिया। गोली इनके वकील और बॉडीगार्ड और को भी लगी थी। आशुतोष और एक बॉडीगार्ड की मौके पर ही मौत हो गई थी। समीर और उनके ड्राइवर की हत्या में नाम आने के बाद से आशुतोष बार-बार बाहुबली व पूर्व MLC राम पुकार सिंह और उनके बेटे पर सवाल खड़ा कर रहे थे। दावा कर रहे थे कि समीर कुमार की हत्या उन लोगों ने कराई है। दोनों उनकी भी हत्या करवा देंगे। मोतिझील की करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टी को लेकर विवाद चल रहा है। अपनी सुरक्षा को लेकर आशुतोष ने डीजीपी से लेकर मुख्यमंत्री तक से गुहार लगाई थी। गैंगवार में मारा गया शूटर गोविंद समीर कुमार की हत्या करने वाला शूटर गोविंद जमानत पर जेल से बाहर आकर क्राइम की दुनिया में बिजी था। 31 मई 2026 को मुजफ्फरपुर के छोटी कल्याणी इलाके में बाइक से आए नकाबपोश अपराधियों ने गोविंद की गोली मारकर हत्या कर दी। इस वारदात को भी दो अपराधियों ने अंजाम दिया था। दोनों एक ही बाइक से आए थे। इसकी मौत के साथ ही समीर हत्याकांड से जुड़े कई अनसुलझे सवाल बरकरार रह गए। गवाह पलटे, सबूतों के अभाव में बरी हो गए आरोपी डबल मर्डर के इस केस का मुजफ्फरपुर कोर्ट में ट्रायल चला। कुल 11 गवाही हुई। तीन मुख्य गवाह अपने बयान से पलट गए, जिसका इस केस पर बड़ा असर पड़ा। पुलिस ने जो जांच की, उसमें भी कई खामियां थीं। कोर्ट के सामने पुख्ता कुछ भी नहीं था। आरोपियों के खिलाफ पुलिस कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। इसका नतीजा यह हुआ कि 6 अगस्त 2026 को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। 6 आरोपियों (श्यामनंदन मिश्रा, सुशील कुमार छापड़िया, मृत्युंजय कुमार उर्फ पिंटू सिंह, नवीन कुमार, रंजय कुमार उर्फ ओंकार और हत्या के वक्त बाइक चलाने वाले अपराधी सुजीत कुमार) को कोर्ट ने बरी कर दिया। अब पूर्व मेयर का परिवार हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है। बदलत रहे केस के IO, जांच में रह गई कमी वारदात के दिन से लेकर कोर्ट का फैसला आने तक 7 साल 10 महीने 14 दिन बीत गए। इस दौरान केस की जांच करने वाले इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर भी बदले। सबसे पहले धीरज कुमार सिंह, फिर धनंजय कुमार और बाद में ओम प्रकाश केस के IO रहे। पुलिस ने दो बार कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की, लेकिन ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई। पुलिस बार-बार कोर्ट में बताती रही कि वो इस केस में काफी काम कर चुकी है। पूरा खुलासा करने के काफी नजदीक है। इसमें उम्मीद थी कि पुलिस कुछ बड़े और रसूखदार लोगों के नाम सामने लाएगी। पर ऐसा हुआ नहीं। इन तीन पॉइंट पर पुलिस की कमी रह गई। तारीख- 23 सितंबर 2018 समय- शाम करीब 7 बजे जगह- चंदवारा, मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर के पहले मेयर समीर कुमार अपने होटल आर्या से निकलकर मिठनपुरा स्थित घर जा रहे थे। कार ड्राइवर रोहित कुमार चला रहा था। रास्ते में अंधेरा था। कुछ जगहों पर लाइट्स जल रही थीं। गाड़ी जैसे ही नवाब रोड चंदवारा इलाके में एक प्राइवेट स्कूल के पास पहुंची एक बाइक सामने से आकर रुकी। उसपर दो अपराधी बैठे थे। पीछे बैठे अपराधी ने AK-47 निकाली और गोलियों की बौछार कर दी। उसने मैगजीन खाली होने तक ट्रिगर दबाए रखा। गोली खत्म होने पर AK-47 शांत हुई तो दूसरी मैगजीन लोड की और दनादन गोलियां चलाकर उसे भी खाली कर दिया। चंद मिनटों में सरे राह डबल मर्डर की सनसनीखेज वारदात को अंजाम देकर अपराधी फरार हो गए। पीड़ित परिवार और सरकारी वकील से बातचीत के आधार पर आज बिहार फाइल्स में बात मुजफ्फरपुर डबल मर्डर के पूरे घटनाक्रम की। पहले जानिए कौन थे समीर कुमार समीर कुमार मुजफ्फरपुर नगर निगम के पहले मेयर थे। 2002 से 2007 तक इस पद पर रहे। राजनीतिक और सामाजिक तौर पर शहर की बड़ी हस्तियों में गिने जाते थे। बिहार के राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के साथ उनके अच्छे संबंध थे। 2005 में मेयर रहते हुए शहरी इलाके से लोजपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़े। 2009 में इसी सीट से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़े। दोनों बार जीत न पाए। 2017 में समीर कुमार ने भूमिहार-ब्राह्मण संगठन बनाया। इनकी प्लानिंग 2019 में मुजफ्फरपुर से लोकसभा चुनाव लड़ने की थी। इसके अलावा शहर में ही चल रहे आर्या होटल के वो मालिक थे।
AK-47 से दिवाली के जैसी फायरिंग शुरु हो गई 23 सितंबर 2018 की शाम अपराधियों ने AK-47 से फायरिंग कर समीर कुमार के शरीर को छलनी कर दिया था। हॉस्पिटल में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर समीर के शरीर में 30-32 गोली देखकर चौंक गए थे। कहां कि ऐसी हत्या नहीं देखी। उनके ड्राइवर को 10 गोली लगी थी। गोलियों की ऐसी बारिश हुई थी कि समीर की कार का नक्शा बिगड़ गया था। आगे के शीशे में छेद ही छेद दिख रहे थे। गाड़ी की बॉडी पर गोलियों के निशान पड़े थे। फायरिंग की आवाज ऐसी आई मानों कोई दिवाली के पटाखे की लड़ी छुड़ा रहा है। वारदात स्थल के पास एक CCTV कैमरा लगा था। इसमें डबल मर्डर की घटना कैद हुई थी। साफ दिख रहा था कि एक कार बाएं टर्न लेते हुए मिठनपुरा की ओर जाने के लिए सीधे बढ़ रही थी। अपोजिट साइड से बाइक आई और कार के सामने रूकी। फिर अपराधी ने फायरिंग कर दी। उस वक्त अंधेरा हो चुका था। कार की लाइट जल रही थी। गोलीबारी के बाद भी वह जलती रह गई। गोलियों की तड़तड़ाहट से आसपास के इलाके में रहने वाले सारे लोग दहशत में आकर भागने लगे। अब जानिए थानेदार ने अपने बयान क्या दर्ज कराया था घटना मुजफ्फरपुर के नगर थाना क्षेत्र में हुई। उस वक्त इंस्पेक्टर मो. शुजाउद्दीन वहां के थानेदार थे। इन्होंने अपने बयान पर FIR (696/18) दर्ज की थी। थानेदार ने लिखा, ‘शाम में 6:55 बजे पेट्रोलिंग करते वक्त सूचना मिली कि नवाब रोड चंदवारा में कोई घटना घटी है। इसकी जानकारी सीनियर अधिकारियों को दी, फिर घटनास्थल पर पहुंचे। वहां बहुत सारे लोगों की भीड़ लगी थी।’ ‘एक एक्सेंट कार के अंदर दो लोग गंभीर हालत में थे। उनके सिर और शरीर में कई गोलियां लगी हुई थी। दोनों को पुलिस की जीप से ASI सुभाष चंद्र सिंह के साथ SKMCH भेजा गया। हॉस्पिटल पहुंचते ही डॉक्टर ने दोनों की मौत की पुष्टि कर दी थी।’ वारदात स्थल पर पहुंचे थानेदार ने कार की जांच की थी। FIR में उन्होंने इसका जिक्र करते हुए लिखा था, ‘शुरुआती जांच करने पर पता चला कि कार के फ्रंट शीशा पर गोलियों से 19 छेद हुए थे। इसके अलावा भी कई और छेद दिखे। वारदात किसी अत्याधुनिक हथियार से अंजाम दिया गया है।’ उस वक्त थानेदार ने 302/120B/34IPC और 27 आर्म्स एक्ट की धारा के तहत अज्ञात अपराधियों के खिलाफ केस दर्ज किया। जांच के लिए सब इंस्पेक्टर धीरज कुमार सिंह को इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (IO) बनाया था। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से कई खोखे बरामद किए। जांच के क्रम में पुलिस ने दो अपराधियों की पहचान की। सुजीत नाम का अपराधी बाइक चला रहा था। पीछे गोविंद नाम का अपराधी बैठा था। उसी ने AK-47 से फायरिंग की थी। वारदात के बाद शूटर, उसका साथी, साजिश रचने से लेकर हथियार उपलब्ध कराने वाले तक, इस कांड से जुड़े सभी आरोपी गिरफ्तारी के डर से फरार हो गए थे। तीन महीने बाद तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। बाद में पुलिस को 11 को अलग-अलग वक्त गिरफ्तार किया। इनमें शूटर गोविंद और बाइक चलाने वाला उसका मददगार अपराधी सुजीत भी शामिल थे। करोड़ों रुपए की 10 कट्ठा जमीन के लिए मारे गए समीर कुमार मुजफ्फरपुर में कल्याण मछली मंडी है। इस इलाके में 10 कट्ठा जमीन का एक प्लॉट था। समीर कुमार का इसपर दावा था। करोड़ों रुपए की इस संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। गिरफ्तारी के बाद शूटर गोविंद को पुलिस ने पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया था। उसने पुलिस को बताया कि अगर वह समीर कुमार की हत्या नहीं करता तो उसकी हत्या करा दी जाती। मछली मंडी की जमीन पर गोविंद का कब्जा था। इसको लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था। उस समय मुजफ्फरपुर के तत्कालीन SSP मनोज कुमार ने समीर कुमार और उनके ड्राइवर की हत्या में 9 लोगों की भूमिका सामने आने की जानकारी दी थी। इस कांड में जांच करते हुए पुलिस ने दो चार्जशीट मुजफ्फरपुर कोर्ट में दाखिल की थी। पहली चार्जशीट शूटर गोविंद और उसके साथी सुजीत समेत 7 अपराधियों के खिलाफ दाखिल की गई थी। इसके बाद भी पुलिस की जांच जारी थी। उसी क्रम में मुजफ्फरपुर के बड़े प्रॉपर्टी डीलर आशुतोष शाही का नाम सामने आया। जांच कर रही पुलिस टीम ने उनसे पूछताछ की थी। अपराधियों से मिले कनेक्शन, उनसे हुई पूछताछ और उस दौरान मिले सबूतों के आधार पर पुलिस ने कोर्ट में दूसरी चार्जशीट दाखिल की। इसमें आशुतोष शाही को भी आरोपी बनाया था। 2023 में हुई थी आशुतोष शाही की हत्या समीर कुमार की हत्या के करीब 4 साल 9 महीने बीत गए थे। कोर्ट में ट्रायल चल रहा था। 21 जुलाई 2023 को मुजफ्फरपुर में ही अपराधियों ने आशुतोष शाही को गोलियों से भून दिया। गोली इनके वकील और बॉडीगार्ड और को भी लगी थी। आशुतोष और एक बॉडीगार्ड की मौके पर ही मौत हो गई थी। समीर और उनके ड्राइवर की हत्या में नाम आने के बाद से आशुतोष बार-बार बाहुबली व पूर्व MLC राम पुकार सिंह और उनके बेटे पर सवाल खड़ा कर रहे थे। दावा कर रहे थे कि समीर कुमार की हत्या उन लोगों ने कराई है। दोनों उनकी भी हत्या करवा देंगे। मोतिझील की करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टी को लेकर विवाद चल रहा है। अपनी सुरक्षा को लेकर आशुतोष ने डीजीपी से लेकर मुख्यमंत्री तक से गुहार लगाई थी। गैंगवार में मारा गया शूटर गोविंद समीर कुमार की हत्या करने वाला शूटर गोविंद जमानत पर जेल से बाहर आकर क्राइम की दुनिया में बिजी था। 31 मई 2026 को मुजफ्फरपुर के छोटी कल्याणी इलाके में बाइक से आए नकाबपोश अपराधियों ने गोविंद की गोली मारकर हत्या कर दी। इस वारदात को भी दो अपराधियों ने अंजाम दिया था। दोनों एक ही बाइक से आए थे। इसकी मौत के साथ ही समीर हत्याकांड से जुड़े कई अनसुलझे सवाल बरकरार रह गए। गवाह पलटे, सबूतों के अभाव में बरी हो गए आरोपी डबल मर्डर के इस केस का मुजफ्फरपुर कोर्ट में ट्रायल चला। कुल 11 गवाही हुई। तीन मुख्य गवाह अपने बयान से पलट गए, जिसका इस केस पर बड़ा असर पड़ा। पुलिस ने जो जांच की, उसमें भी कई खामियां थीं। कोर्ट के सामने पुख्ता कुछ भी नहीं था। आरोपियों के खिलाफ पुलिस कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। इसका नतीजा यह हुआ कि 6 अगस्त 2026 को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। 6 आरोपियों (श्यामनंदन मिश्रा, सुशील कुमार छापड़िया, मृत्युंजय कुमार उर्फ पिंटू सिंह, नवीन कुमार, रंजय कुमार उर्फ ओंकार और हत्या के वक्त बाइक चलाने वाले अपराधी सुजीत कुमार) को कोर्ट ने बरी कर दिया। अब पूर्व मेयर का परिवार हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है। बदलत रहे केस के IO, जांच में रह गई कमी वारदात के दिन से लेकर कोर्ट का फैसला आने तक 7 साल 10 महीने 14 दिन बीत गए। इस दौरान केस की जांच करने वाले इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर भी बदले। सबसे पहले धीरज कुमार सिंह, फिर धनंजय कुमार और बाद में ओम प्रकाश केस के IO रहे। पुलिस ने दो बार कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की, लेकिन ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई। पुलिस बार-बार कोर्ट में बताती रही कि वो इस केस में काफी काम कर चुकी है। पूरा खुलासा करने के काफी नजदीक है। इसमें उम्मीद थी कि पुलिस कुछ बड़े और रसूखदार लोगों के नाम सामने लाएगी। पर ऐसा हुआ नहीं। इन तीन पॉइंट पर पुलिस की कमी रह गई।  

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