बच्चों को आधुनिक तकनीक के साथ संस्कार, शिष्टाचार और मानवीय मूल्यों की शिक्षा देना जरूरी है। आज कई घरों में अतिथि आने पर बच्चे उनसे अभिवादन या बातचीत करने के बजाय मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। यह स्थिति बताती है कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने की जरूरत है। यह बात माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार गुलाब देवी ने शुक्रवार को कही। वे सुल्तानपुर रोड स्थित गुलजार उपवन ट्रेनिंग सेंटर में ब्रह्माकुमारीज एजुकेशन विंग की ओर से तीन दिवसीय मीटिंग एंड ट्रेनिंग प्रोग्राम के शुभारंभ के अवसर पर संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव धीरे-धीरे भारतीय संस्कृति पर बढ़ रहा है। ऐसे में बच्चों को अपनी प्राचीन संस्कृति, संस्कारों और गौरव से परिचित कराना जरूरी है। शिक्षा के साथ संस्कारों पर भी ध्यान देना होगा गुलाब देवी ने कहा कि बच्चों को श्रेष्ठ जीवन मूल्यों के प्रति जागरूक और प्रेरित करने के लिए शिक्षा के साथ संस्कारों पर भी ध्यान देना होगा। आधुनिक तकनीक का उपयोग जरूरी है, लेकिन इसके साथ शिष्टाचार, आत्मचिंतन और मानवीय मूल्यों की समझ भी बच्चों को दी जानी चाहिए। शिक्षा के मूल्यों पर चर्चा दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। ममता दीदी, सुमन दीदी और राजयोगिनी राधा दीदी ने संबोधित किया। ब्रह्माकुमारीज शिक्षा प्रभाग की नेशनल कोऑर्डिनेटर सुमन दीदी और वरिष्ठ राजयोगिनी शिक्षिकाएं ममता दीदी व राधा दीदी ने शिक्षा में मूल्यों, संस्कारों, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक दृष्टिकोण के महत्व पर विचार रखे। कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख प्रो. पी.के गुप्ता विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम का संचालन करते हुए राजयोगिनी स्वर्णलता दीदी ने कहा कि तीन दिवसीय कार्यक्रम में शिक्षा के साथ मूल्य आधारित जीवन, आत्मचिंतन, नैतिक सशक्तिकरण और आध्यात्मिक विकास पर चर्चा होगी।

