कुरुक्षेत्र बार चुनाव: सहदेव दूसरी बार में बने प्रधान:विक्रम से 259 वोट से जीते; EVM से हुई वोटिंग, शर्मा हारे पर पैनल में 5 पद जीते

कुरुक्षेत्र बार चुनाव: सहदेव दूसरी बार में बने प्रधान:विक्रम से 259 वोट से जीते; EVM से हुई वोटिंग, शर्मा हारे पर पैनल में 5 पद जीते

कुरुक्षेत्र के जिला बार एसोसिएशन चुनाव में मुकाबला आखिरी दौर तक दिलचस्प बना रहा। करीब डेढ़ साल बाद शुक्रवार को हुए चुनाव में पिछली बार दूसरे नंबर पर रहे सहदेव राढ़ान जठलाना ने प्रधान पद पर जीत दर्ज कर ली। उन्होंने 1139 वोट हासिल कर पहली बार प्रधान बनने का सपना पूरा किया। उनके सामने चुनाव लड़ रहे विक्रम शर्मा को 880 वोट मिले। राढ़ान ने 259 वोट के अंतर से जीत हासिल की। हालांकि प्रधान की कुर्सी राढ़ान के पास गई, लेकिन पूरे पैनल के लिहाज से विक्रम शर्मा गुट ने बाजी मार ली। एसोसिएशन के 7 प्रमुख पदों के लिए हुए चुनाव में विक्रम शर्मा गुट के प्रत्याशियों ने 5 पदों पर जीत दर्ज की, जबकि राढ़ान गुट को प्रधान और कोषाध्यक्ष पद से संतोष करना पड़ा। अन्नू सैनी को मिले सबसे ज्यादा वोट सहदेव राढ़ान दूसरी बार प्रधान पद के लिए चुनाव मैदान में उतरे थे। पिछली बार उन्हें करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था और वे दूसरे नंबर पर रहे थे। इस चुनाव में सबसे ज्यादा वोट लेडी एग्जिक्यूटिव पद पर अन्नू सैनी को 1194 मिले। उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी रजनी को 405 वोट के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में कुल 2026 वोट हुए पोल यहां वकीलों के कुल 2239 वोट हैं। प्रधान पद पर कुल 2026 वोट पड़े। इनमें राढ़ान को 1139 और विक्रम शर्मा को 880 वोट मिले। सिर्फ 7 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। वहीं विक्रम शर्मा पहली बार प्रधान पद के लिए चुनाव मैदान में थे। इससे पहले वे अपने पैनल से महासचिव रह चुके हैं। पहली बार ईवीएम से मतदान चुनाव अधिकारी विनय मोहन आश्री ने बताया कि इस बार एसोसिएशन में 2239 मतदाता थे। इनमें से 2026 ने मतदान किया। मतदाताओं की संख्या को देखते हुए तीन बूथ बनाए गए थे। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चला। इस बार पहली बार ईवीएम के जरिए मतदान कराया गया। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक पूरी चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही। जीत के बाद समर्थकों ने मनाया जश्न परिणाम घोषित होते ही विजयी प्रत्याशियों के समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। समर्थकों ने विजेताओं को फूल-मालाएं पहनाकर स्वागत किया और जीत की खुशी मनाई। सहदेव राढ़ान के लिए यह जीत इसलिए भी अहम रही क्योंकि पिछली बार हारने के बाद उन्होंने दोबारा चुनाव मैदान में उतरकर प्रधान पद हासिल किया।

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