विदिशा पुलिस को गंभीर अपराधों की जांच के लिए हाईटेक मोबाइल फॉरेंसिक वैन मिली है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय और मध्यप्रदेश शासन के प्रयासों से मिली इस वैन की मदद से घटनास्थल पर ही वैज्ञानिक सबूत जुटाए जा सकेंगे और उनकी शुरुआती जांच भी की जा सकेगी। गुरुवार को पुलिस अधीक्षक रोहित कासवानी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोनिका तिवारी ने हरी झंडी दिखाकर वैन को रवाना किया। वैन में सबूत जुटाने, उनकी जांच, फोटोग्राफी, दस्तावेजीकरण और सुरक्षित रखने के लिए कई आधुनिक उपकरण मौजूद हैं। फिंगरप्रिंट से डीएनए तक जांच की सुविधा वैन में घटनास्थल से सबूत जुटाने के लिए फिंगरप्रिंट इन्वेस्टिगेशन किट, ब्लड एंड हेयर आइडेंटिफिकेशन किट, डीएनए कलेक्शन किट, जीएसआर किट, नारकोटिक्स डिटेक्शन किट, एक्सप्लोसिव डिटेक्शन किट, फुटप्रिंट व टायर इम्प्रेशन किट, आर्सन इन्वेस्टिगेशन किट और बुलेट होल एग्जामिनेशन किट उपलब्ध हैं। आधुनिक उपकरणों से मौके पर दस्तावेजीकरण वैन में डीएसएलआर कैमरा, स्टीरियो माइक्रोस्कोप, वेइंग बैलेंस, मिनी रेफ्रिजरेटर, एलईडी स्क्रीन, थर्मल प्रिंटर और बॉडी-वॉर्न कैमरा भी हैं। इनकी मदद से घटनास्थल की फोटोग्राफी, माप, दस्तावेजीकरण और मिले सबूतों को सुरक्षित रखने का काम किया जा सकेगा। कैमरे और जीपीएस से रखी जाएगी नजर वैन में आगे और पीछे कैमरे लगाए गए हैं। इनके जरिए घटनास्थल की स्थिति और वहां मौजूद भीड़ पर नजर रखने में मदद मिलेगी। वहीं जीपीएस सिस्टम के माध्यम से पुलिस मुख्यालय से वैन की लोकेशन और उसकी गतिविधियों की निगरानी की जा सकेगी। सबूतों की चेन ऑफ कस्टडी बनाए रखने में मदद पुलिस अधीक्षक रोहित कासवानी ने बताया कि वैन का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि घटनास्थल पर मिले जरूरी सबूतों को शुरुआती स्तर पर ही सुरक्षित किया जा सकेगा। इससे सबूतों की चेन ऑफ कस्टडी बनाए रखने में मदद मिलेगी और जांच ज्यादा वैज्ञानिक व सबूत आधारित हो सकेगी। गंभीर अपराधों की जांच में यह वैन पुलिस के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी संसाधन साबित होगी। अधिकारी-कर्मचारी रहे मौजूद वैन को रवाना किए जाने के दौरान फिंगरप्रिंट शाखा प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र साहू, रक्षित निरीक्षक नीरज सिंह सिकरवार, पुलिस फोटोग्राफर प्रधान आरक्षक भानु प्रकाश सहित अन्य पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

