मप्र हाई कोर्ट ने बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े मामले में हजारों छात्रों को राहत देते हुए रुकी परीक्षाओं और परीक्षा परिणामों का रास्ता साफ कर दिया है। हालांकि, डुप्लीकेट फैकल्टी रखने वाले कॉलेजों के लिए कोर्ट ने सख्त शर्त लगाई है। ऐसे कॉलेजों को हर डुप्लीकेट शिक्षक पर 3 लाख रुपए जुर्माना भरना होगा। जुर्माना जमा करने के बाद ही कॉलेज पात्र माने जाएंगे और उनके छात्र आगामी परीक्षाओं में शामिल हो सकेंगे। पहले हो चुकी परीक्षाओं के रोके गए रिजल्ट भी इसके बाद जारी किए जा सकेंगे। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगल पीठ ने लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विशाल बघेल की जनहित याचिका सहित संबंधित मामलों पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। सीबीआई का खुलासा… 153 कॉलेज में 1 हजार डुप्लीकेट फैकल्टी हाई कोर्ट के समक्ष सीबीआई की रिपोर्ट में बताया गया कि जांच में पात्र पाए गए 119 और अपात्र मिले 153 कॉलेजों में एक ही शिक्षकों की दो से अधिक जगह नियुक्ति मिली। वहीं 35 पात्र कॉलेज ऐसे मिले, जहां कोई डुप्लीकेट फैकल्टी नहीं थी। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता आलोक बागरेचा और विशाल बघेल के तर्कों के बाद कोर्ट ने डुप्लीकेट फैकल्टी वाले संस्थानों पर प्रति शिक्षक जुर्माना लगाने का आदेश दिया। इसमें 2 लाख रु. मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल और 1 लाख रु. जुवेनाइल जस्टिस फंड में जमा कराने होंगे। प्रदेश में करीब 1 हजार डुप्लीकेट शिक्षक हैं। कोर्ट ने कॉलेजों को दी एक माह की मोहलत
कोर्ट ने कॉलेजों को जुर्माना जमा करने के लिए एक महीने की मोहलत दी है। जुर्माने की राशि जमा करने के बाद ही पात्र माना जाएगा। कोर्ट के इस फैसले से बीएससी, एमएससी और पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग के हजारों छात्रों को राहत मिलेगी। परिसर या आसपास लगाने होंगे 50 पौधे
कोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण की शर्त भी लगाई है। संबंधित प्रत्येक कॉलेज को परिसर या आसपास 50 पौधे लगाने होंगे। इनकी पेड़ बनने तक देखभाल करनी होगी और निसर्ग ऐप पर पौधों की तस्वीरें अपलोड करनी होंगी। मान्यता में लापरवाही तो अफसर होंगे जिम्मेदार
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण और तय मापदंडों के पालन में लापरवाही मिलने पर संबंधित नियामक अधिकारी खुद जिम्मेदार होंगे। कोर्ट ने नए मान्यता प्राप्त सभी कॉलेजों का रिकॉर्ड तलब किया है। अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।

