अनूपपुर जिला न्यायालय भवन के निर्माण का रास्ता अब साफ हो गया है। साल 2003 में जिला बनने के करीब 23 साल बाद यह मंजूरी मिली है। मध्यप्रदेश सरकार ने नए भवन के लिए 44.85 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी है। लंबे समय से बजट की मांग सिर्फ आश्वासनों तक सीमित थी। इसके बाद यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा। जबलपुर उच्च न्यायालय के सख्त रुख के बाद सरकार को यह राशि मंजूर करनी पड़ी। स्वीकृति मिलते ही अब सोशल मीडिया पर नेताओं के बीच श्रेय लेने की होड़ भी शुरू हो गई है। दरअसल, जिले में स्वतंत्र और सभी सुविधाओं से लैस न्यायालय भवन नहीं था। इससे हालात काफी खराब थे। अधिवक्ता दीपक कुमार पांडे ने बताया कि कोर्ट में रोजाना हजारों लोग आते हैं। लेकिन उनके बैठने की पर्याप्त जगह नहीं थी। न्यायिक अधिकारियों के लिए भी आवास की कमी थी। अधिवक्ताओं के पास भी सिर्फ एक ही कमरा था, जहां सीमित जगह में काम करना पड़ता था। इस मामले में पहले मुख्यमंत्री के अनूपपुर दौरे के दौरान घोषणाएं हुई थीं। विधायकों ने विधानसभा में सवाल भी उठाए थे। अधिवक्ता संघ ने कई ज्ञापन भी दिए थे। लेकिन सालों तक बजट जारी नहीं हो सका। बताया गया कि सरकार की लापरवाही से परेशान होकर वरिष्ठ अधिवक्ता बासुदेव चटर्जी ने जबलपुर हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। यह याचिका अधिवक्ता दीपक कुमार पांडे के जरिए लगाई गई थी। हाईकोर्ट ने पहली सुनवाई में नोटिस जारी किए। लेकिन एक साल तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आखिर में 28 जुलाई को हुई सुनवाई में डबल बेंच ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार के विधि सचिव को 3 अगस्त को खुद पेश होकर जवाब देने का निर्देश दिया। अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी के आदेश के बाद सरकार तुरंत हरकत में आई। आनन-फानन में 44.85 करोड़ रुपये के बजट की प्रक्रिया पूरी कर मंजूरी दी गई। मंजूरी मिलने के बाद अधिवक्ता बासुदेव चटर्जी और दीपक कुमार पांडे ने संतोष जताया और आभार व्यक्त किया। नए और सभी सुविधाओं से लैस परिसर से न्यायिक अधिकारियों को अच्छे आवास मिलेंगे। अधिवक्ताओं को बेहतर काम करने की जगह मिलेगी। रोजाना आने वाले हजारों लोगों को भी व्यवस्थित सुविधाएं मिल सकेंगी। इससे जिले की न्यायिक व्यवस्था को नई ताकत मिलेगी। उल्लेखनीय है कि उमरिया और डिंडोरी जैसे समकक्ष जिलों में स्वतंत्र जिला न्यायालय भवनों का निर्माण काफी पहले हो चुका था, जबकि अनूपपुर लंबे समय से अस्थायी व सीमित संसाधनों वाले ढांचे पर निर्भर था। स्वीकृति मिलने के बाद अब लोक निर्माण विभाग (PIU) द्वारा निविदा (टेंडर) प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

