किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड स्थित बंदरझूला पंचायत में नवनिर्मित पंचायत सरकार भवन में उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद दरारें आ गई हैं। तीन करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बने इस भवन का उद्घाटन 5 अगस्त को स्थानीय विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने किया था। दीवारों में दरारें आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। भवन की अलग-अलग दीवारों पर दरारें स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं, और कुछ स्थानों पर प्लास्टर भी झड़ने लगा है। जल्दी दरारें आना सामान्य नहीं ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी लागत से बने सरकारी भवन में इतनी जल्दी दरारें आना चिंताजनक है। स्थानीय लोगों ने भवन निर्माण की गुणवत्ता की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि निर्माण के दौरान भी नींव और अन्य हिस्सों में खामियों को लेकर शिकायतें की गई थीं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया। किशनगंज जिला भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। ऐसे में नए सरकारी भवन में इतनी जल्दी दरारें आना सामान्य नहीं माना जा रहा है। पहले भी आ चुकी है शिकायतें ग्रामीणों का कहना है कि यदि भवन की संरचनात्मक गुणवत्ता में कमी है, तो भविष्य में यहां कार्यरत कर्मियों और आम लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। मामला सामने आने के बाद भवन की मरम्मत कर दरारों को भरने की कोशिश किए जाने की चर्चा है। इस पर ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि हाल ही में बने भवन को इतनी जल्दी मरम्मत की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने मांग की है कि मरम्मत से पहले भवन की संरचनात्मक मजबूती और निर्माण गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाए। स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया है कि इसी संवेदक द्वारा निर्मित बोथा थाना क्षेत्र और पिछला पंचायत के कुछ अन्य पंचायत सरकार भवनों में भी गुणवत्ता संबंधी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित संवेदक द्वारा पूर्व में कराए गए अन्य निर्माण कार्यों की भी तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं निर्माण संबंधी खामियां व्यापक स्तर पर तो नहीं हैं। सामग्री, डिजाइन और निगरानी की जांच की मांग स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग के वरीय अधिकारियों से उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि भवन निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता, स्वीकृत प्राक्कलन एवं डिजाइन के अनुरूप निर्माण, नींव और अन्य संरचनात्मक हिस्सों की मजबूती तथा विद्युत कार्य में प्रयुक्त सामग्री की जांच कराई जाए। इसके अलावा संवेदक की पात्रता, अनुभव प्रमाणपत्र, कार्य आवंटन की प्रक्रिया और निर्माण अवधि के दौरान अभियंताओं द्वारा किए गए निरीक्षण एवं दिए गए निर्देशों की भी समीक्षा करने की मांग उठी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण में गंभीर खामियां हैं तो केवल रिपेयरिंग कराना स्थायी समाधान नहीं हो सकता। उनका आरोप है कि तकनीकी जांच के बिना मरम्मत कराना संभावित बड़ी समस्या को छिपाने जैसा होगा। भवन की बुनियाद और निर्माण गुणवत्ता की जांच आवश्यक – पूर्व मुखिया लोगों ने दोषी पाए जाने पर संबंधित संवेदक और अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के अनुसार भवन का निर्माण संवेदक अब्दुल बारिक द्वारा कराया गया है। वहीं, मामले में संबंधित जूनियर इंजीनियर तनवीर आलम ने भवन में आई दरार को “एयर क्रैक” बताया। हालांकि, जब उनसे मौके पर भौतिक निरीक्षण को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। बंदरझूला पंचायत के पूर्व मुखिया प्रतिनिधि साबिर आलम ने कहा कि भवन की बुनियाद और निर्माण गुणवत्ता की जांच आवश्यक है। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि जांच के बाद ही दरारों के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। सोशल मीडिया पर पंचायत के मुखिया इकरामुल हक द्वारा भी भवन में आई दरारों की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग किए जाने की चर्चा है। इस संबंध में स्थानीय क्षेत्र संगठन कार्य प्रमंडल, किशनगंज के कार्यपालक अभियंता ने कहा कि भवन में आई दरारों की मरम्मत कराई जाएगी तथा वे स्वयं स्थल पर जाकर मामले की जांच करेंगे। अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग केवल रिपेयरिंग तक ही सीमित रहेगा या फिर पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाएगा। सरकारी राशि से निर्मित भवन में उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद दरारें आने के बाद ग्रामीणों की निगाह अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। हालांकि भवन में आई दरारों का वास्तविक कारण क्या है, इसका स्पष्ट निष्कर्ष तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ सकेगा। किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड स्थित बंदरझूला पंचायत में नवनिर्मित पंचायत सरकार भवन में उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद दरारें आ गई हैं। तीन करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बने इस भवन का उद्घाटन 5 अगस्त को स्थानीय विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने किया था। दीवारों में दरारें आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। भवन की अलग-अलग दीवारों पर दरारें स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं, और कुछ स्थानों पर प्लास्टर भी झड़ने लगा है। जल्दी दरारें आना सामान्य नहीं ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी लागत से बने सरकारी भवन में इतनी जल्दी दरारें आना चिंताजनक है। स्थानीय लोगों ने भवन निर्माण की गुणवत्ता की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि निर्माण के दौरान भी नींव और अन्य हिस्सों में खामियों को लेकर शिकायतें की गई थीं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया। किशनगंज जिला भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। ऐसे में नए सरकारी भवन में इतनी जल्दी दरारें आना सामान्य नहीं माना जा रहा है। पहले भी आ चुकी है शिकायतें ग्रामीणों का कहना है कि यदि भवन की संरचनात्मक गुणवत्ता में कमी है, तो भविष्य में यहां कार्यरत कर्मियों और आम लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। मामला सामने आने के बाद भवन की मरम्मत कर दरारों को भरने की कोशिश किए जाने की चर्चा है। इस पर ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि हाल ही में बने भवन को इतनी जल्दी मरम्मत की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने मांग की है कि मरम्मत से पहले भवन की संरचनात्मक मजबूती और निर्माण गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाए। स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया है कि इसी संवेदक द्वारा निर्मित बोथा थाना क्षेत्र और पिछला पंचायत के कुछ अन्य पंचायत सरकार भवनों में भी गुणवत्ता संबंधी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित संवेदक द्वारा पूर्व में कराए गए अन्य निर्माण कार्यों की भी तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं निर्माण संबंधी खामियां व्यापक स्तर पर तो नहीं हैं। सामग्री, डिजाइन और निगरानी की जांच की मांग स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग के वरीय अधिकारियों से उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि भवन निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता, स्वीकृत प्राक्कलन एवं डिजाइन के अनुरूप निर्माण, नींव और अन्य संरचनात्मक हिस्सों की मजबूती तथा विद्युत कार्य में प्रयुक्त सामग्री की जांच कराई जाए। इसके अलावा संवेदक की पात्रता, अनुभव प्रमाणपत्र, कार्य आवंटन की प्रक्रिया और निर्माण अवधि के दौरान अभियंताओं द्वारा किए गए निरीक्षण एवं दिए गए निर्देशों की भी समीक्षा करने की मांग उठी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण में गंभीर खामियां हैं तो केवल रिपेयरिंग कराना स्थायी समाधान नहीं हो सकता। उनका आरोप है कि तकनीकी जांच के बिना मरम्मत कराना संभावित बड़ी समस्या को छिपाने जैसा होगा। भवन की बुनियाद और निर्माण गुणवत्ता की जांच आवश्यक – पूर्व मुखिया लोगों ने दोषी पाए जाने पर संबंधित संवेदक और अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के अनुसार भवन का निर्माण संवेदक अब्दुल बारिक द्वारा कराया गया है। वहीं, मामले में संबंधित जूनियर इंजीनियर तनवीर आलम ने भवन में आई दरार को “एयर क्रैक” बताया। हालांकि, जब उनसे मौके पर भौतिक निरीक्षण को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। बंदरझूला पंचायत के पूर्व मुखिया प्रतिनिधि साबिर आलम ने कहा कि भवन की बुनियाद और निर्माण गुणवत्ता की जांच आवश्यक है। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि जांच के बाद ही दरारों के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। सोशल मीडिया पर पंचायत के मुखिया इकरामुल हक द्वारा भी भवन में आई दरारों की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग किए जाने की चर्चा है। इस संबंध में स्थानीय क्षेत्र संगठन कार्य प्रमंडल, किशनगंज के कार्यपालक अभियंता ने कहा कि भवन में आई दरारों की मरम्मत कराई जाएगी तथा वे स्वयं स्थल पर जाकर मामले की जांच करेंगे। अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग केवल रिपेयरिंग तक ही सीमित रहेगा या फिर पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाएगा। सरकारी राशि से निर्मित भवन में उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद दरारें आने के बाद ग्रामीणों की निगाह अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। हालांकि भवन में आई दरारों का वास्तविक कारण क्या है, इसका स्पष्ट निष्कर्ष तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ सकेगा।

