Loan Repayment Tips: आजकल लोगों के पास एक नहीं, बल्कि कई सारे लोन्स होते हैं। होम लोन, पर्सनल लोन, कार लोन और क्रेडिट कार्ड लोन। ईएमआई पर शॉपिंग करना भी आम हो गया है। ऐसे में अचानक आपकी जॉब चली जाए, मेडिकल इमरजेंसी आ जाए या पैसों की तंगी आ जाए तो ईएमआई भरने में परेशानी शुरू हो सकती है। अगर ऐसा है, तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। शुरुआत में छोटी दिखने वाली आर्थिक दिक्कत आगे चलकर डिफॉल्ट, बढ़ते ब्याज, रिकवरी और कानूनी परेशानी तक पहुंच सकती है। इसलिए सबसे जरूरी है कि हालात बिगड़ने का इंतजार न करें और समय रहते अपने कर्जदाता यानी बैंक या वित्तीय संस्था से बात करें।
कभी न करें यह गलती
कर्ज का दबाव बढ़ने पर कई लोग फोन उठाना या बैंक से बातचीत करना बंद कर देते हैं। लेकिन यही गलती आगे मुश्किल बढ़ा सकती है। अगर आप अपनी स्थिति के बारे में कर्जदाता को पहले ही बता देते हैं, तो कई मामलों में रिपेमेंट को लेकर नए विकल्प तलाशे जा सकते हैं। च्वाइस फिनसर्व के सीईओ विजेंद्र शेखावत कहते हैं कि ईएमआई चुकाना मुश्किल होने पर चुप रहना सबसे महंगा फैसला साबित हो सकता है। उनके मुताबिक, समय रहते कर्जदाता से संपर्क करने पर ऐसा रास्ता निकाला जा सकता है जिससे खाता डिफॉल्ट होने से बच सके। अपनी स्थिति ईमानदारी से बताने वाले ग्राहकों के लिए अपने क्रेडिट रिकॉर्ड को संभालना भी आसान होता है।
क्रेडिट स्कोर खराब होने से बचाएं
कर्ज का भुगतान समय पर नहीं होने से आपकी क्रेडिट हिस्ट्री पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा बकाया रकम पर ब्याज और दूसरे शुल्क जुड़ते रहते हैं। यही रकम धीरे-धीरे बड़ी होती जाती है। ऐसे में अपने बैंक से बात करके लोन की शर्तों में बदलाव, रिपेमेंट अवधि बढ़ाने या रीस्ट्रक्चरिंग जैसे विकल्पों के बारे में जानकारी ली जा सकती है। हर ग्राहक को ये सुविधा मिले, यह जरूरी नहीं है, लेकिन समय रहते बातचीत करने से उपलब्ध विकल्पों का पता जरूर चल सकता है। अगर रिपेमेंट व्यवस्था को आपकी स्थिति के हिसाब से बदला जाता है और आप आगे भुगतान समय पर करते हैं, तो इससे वित्तीय स्थिति को दोबारा पटरी पर लाने में मदद मिल सकती है।
कर्ज का दबाव सिर्फ जेब पर नहीं पड़ता
कर्ज बढ़ने पर परेशानी केवल पैसों तक सीमित नहीं रहती। लगातार EMI, बकाया रकम और भुगतान की चिंता तनाव और बेचैनी बढ़ा सकती है। कई लोगों को ऐसी स्थिति में घबराहट और बेबसी भी महसूस होने लगती है। एम्स ऋषिकेश के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. विशाल धीमान के मुताबिक, जब कर्ज का बोझ बहुत ज्यादा महसूस होने लगे तो एक साथ पूरी समस्या हल करने के बजाय पहले किसी भरोसेमंद व्यक्ति का सहारा लेना चाहिए। मुश्किल समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। ऐसे में किसी व्यक्ति, रिश्ते या उद्देश्य को अपना सहारा बनाना मददगार हो सकता है। यानी आर्थिक संकट के दौरान खुद को अकेला कर लेना सही रास्ता नहीं है। समस्या को छोटे हिस्सों में बांटकर एक-एक कदम उठाना ज्यादा बेहतर तरीका है।
EMI भरना मुश्किल हो तो ये 5 कदम उठाएं
सबसे पहले पूरे कर्ज का हिसाब लगाएं
आपके ऊपर कितना कर्ज है, इसका स्पष्ट हिसाब होना बेहद जरूरी है। हर लोन की अलग लिस्ट बनाएं। इसमें बकाया रकम, ब्याज दर, EMI और भुगतान की तारीख लिखें। जब सारी जानकारी एक जगह होगी तो आपको यह समझने में आसानी होगी कि पैसा कहां और कितना जा रहा है। इससे घबराहट कम होगी और रिपेमेंट का एक स्पष्ट प्लान बनाया जा सकेगा।
सबसे ज्यादा ब्याज वाले कर्ज को पहले निपटाएं
सभी कर्ज एक जैसे नहीं होते। जिस लोन या क्रेडिट पर ब्याज सबसे ज्यादा है, उसे प्राथमिकता देना समझदारी है। ज्यादा ब्याज वाला कर्ज तेजी से बढ़ सकता है और लंबे समय में आपकी जेब पर ज्यादा बोझ डाल सकता है। क्रेडिट कार्ड का बकाया इसका आम उदाहरण है। अगर संभव हो तो पहले ऐसे महंगे कर्ज को खत्म करने की कोशिश करें।
भुगतान की रणनीति बनाएं
दूसरे सभी लोन और क्रेडिट खातों में कम से कम जरूरी भुगतान करते रहें। इसके बाद जो अतिरिक्त रकम बचे, उसे सबसे ज्यादा ब्याज वाले कर्ज को चुकाने में लगाएं। जब वह कर्ज खत्म हो जाए तो अगली सबसे ज्यादा ब्याज वाली देनदारी पर ध्यान दें। इस तरीके से धीरे-धीरे कर्ज का बोझ कम किया जा सकता है।
कुछ समय के लिए फिजूलखर्ची रोकें
जब ईएमआई का दबाव बढ़ रहा हो तो गैर-जरूरी खर्चों पर लगाम लगाना जरूरी है। बाहर खाना, ऑनलाइन शॉपिंग, महंगे मनोरंजन या ऐसी दूसरी चीजों पर खर्च कुछ समय के लिए कम किया जा सकता है। बचाई गई छोटी रकम भी जरूरी ईएमआई या कर्ज के भुगतान में काम आ सकती है। साथ ही इस दौरान नया लोन या क्रेडिट कार्ड का अतिरिक्त इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है, जब तक कि वह बेहद जरूरी न हो।
अपने बैंक से इन विकल्पों पर करें बात
अगर आपको लग रहा है कि अगले महीने की EMI भरना मुश्किल होगा तो भुगतान की तारीख निकलने का इंतजार न करें। बैंक या वित्तीय संस्था से पहले ही संपर्क करें और अपनी स्थिति साफ-साफ बताएं। आप रिपेमेंट अवधि बढ़ाने, रिस्ट्रक्चरिंग, भुगतान में राहत या उपलब्ध दूसरे विकल्पों के बारे में पूछ सकते हैं। समय रहते बातचीत करने से समस्या के और बड़ा रूप लेने की आशंका कम हो सकती है।

