शामली के मखमूलपुर में हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड में अदालत ने करीब चार साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद दोषियों को सजा सुनाई है। इस मामले में अभियोजन पक्ष ने कुल 14 गवाह पेश किए, जिनकी गवाही फैसले की अहम कड़ी बनी। यह मामला मृतक भूपेंद्र और उनके बेटे अर्जुन की हत्या से जुड़ा है। आरोपी विक्रांत कभी भूपेंद्र के घर के पास किराये पर रहता था। दोनों परिवारों के बीच दोस्ती और पैसों का लेनदेन था। परिवार को उम्मीद थी कि पैसों का विवाद बातचीत से सुलझ जाएगा, लेकिन यह विवाद इतना बढ़ा कि पिता-पुत्र की हत्या हो गई। मृतक भूपेंद्र की मां सुरेश देवी के बयान के अनुसार, आरोपी विक्रांत ने उनके भाई की नौकरी लगवाने के नाम पर दो लाख रुपये लिए थे। नौकरी न लगने पर रकम वापस करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया। कुछ राशि वापस कर दी गई थी, लेकिन शेष रकम लौटाने पर सहमति नहीं बन पाई। आरोप है कि हत्या से लगभग तीन दिन पहले विक्रांत न्यू सैनिक कॉलोनी स्थित भूपेंद्र के घर गया था और रुपये न लौटाने पर भूपेंद्र और अर्जुन को जान से मारने की धमकी दी थी। पुलिस ने इस मामले में 224 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें रुपयों के विवाद को हत्या की मुख्य वजह बताया गया था। इस लंबी कानूनी लड़ाई में मृतक भूपेंद्र की मां सुरेश देवी और घटना स्थल पर पहुंचे पीआरवी सिपाही सोनू की गवाही विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। अदालत ने लगभग 152 सुनवाई तारीखों और 14 गवाहों के बयानों के बाद यह फैसला सुनाया।

