NCERT ने क्लास 9 की सोशल साइंस की नई किताब अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2’ मंगलवार को जारी की। नई किताब में पहले के कई सारे चैप्टर हटा दिए गए हैं और भारतीय शासकों के संघर्ष और रानियों की वीर गाथा को शामिल किया गया है। साथ ही किताब में दावा किया गया है कि धार्मिक वजहों से भारत ने 7वीं सदी से हमलों का सामना किया है। नई किताब से चार टॉपिक हटाए गए पहले क्लास 9 की किताब में ‘इंडिया एंड द कॉनटेम्पररी वर्ल्ड’ जैसी किताबें थीं, उनमें फ्रांसीसी क्रांति, रूसी क्रांति, यूरोप में समाजवाद और नाजीवाद का उदय जैसे यूरोपीय विषय पढ़ाए जाते थे। जिसमें फ्रांसीसी क्रांति (The French Revolution), यूरोप में समाजवाद और रूसी क्रांति (Socialism in Europe and the Russian Revolution) और नाजीवाद और हिटलर का उदय (Nazism and the Rise of Hitler) पढ़ाया जाता था। अब इन चैप्टर्स को काफी हद तक हटा दिया गया है या उनको संशोधित कर दिया गया है। जबकि नई किताब में भारत के मध्यकालीन इतिहास को ज्यादा जगह दी गई है। नई किताब में 7 टॉपिक जोड़े गए 1. अरब, तुर्की, मुगल और यूरोपीय सेनाओं के हमले की कहानियां इस किताब में ‘रेसिस्टेंस एंड रेजिलिएंस’ (विरोध और लचीलापन) नाम का चैप्टर भी जोड़ा गया है, जिसमें भारतीय शासकों और समुदायों पर अरब, तुर्की, मुगल और यूरोपीय सेनाओं ने कब-कब आक्रमण किए इसकी जानकारी है। इस किताब में लिखा है, ‘7वीं सदी के मध्य से, अरब सेनाओं ने समुद्र और जमीन के रास्ते हमले शुरू किए। दक्कन, मालवा, कश्मीर और राजस्थान के भारतीय शासकों ने इन शुरुआती हमलावरों का सामना किया। 2. राजपूतों, अहोम, विजयनगर साम्राज्य, मराठों को भी शामिल किया नई किताब में राजपूतों, अहोम साम्राज्य, विजयनगर साम्राज्य, मराठों, सिखों और जाटों के प्रतिरोध की कहानियां भी शामिल की गई हैं। इसमें महाराणा प्रताप का अकबर के खिलाफ विरोध, लाचित बोरफुकन का 1671 में सरायघाट की लड़ाई में मुगल बेड़े को हराना और मुगल जुल्म के खिलाफ सिखों का विरोध भी शामिल किया गया है। 3. गजनबी के पहले हमले का भी किताब में जिक्र इस किताब में महमूद, गजनी के भारत पर पहले हमले का भी जिक्र है। गजनी (आज के अफगानिस्तान और उत्तर-पूर्वी ईरान में) में शामिल है। गजनी ने 1001 में हिंदू शाही वंश के जयपाल के खिलाफ अपना पहला हमला किया था। साथ ही इस किताब में आगे बताया गया है कि कैसे 11वीं और 12वीं सदी के दौरान, उत्तरी और पश्चिमी भारत को तुर्की हमलों का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ा, जबकि प्रायद्वीपीय भारत तुर्की नियंत्रण से मुक्त रहा। किताब में मुगल साम्राज्य के खिलाफ जाटों के विरोध के बारे में भी विस्तार से बताया गया है। इसमें बताया गया है कि गंगा-यमुना दोआब में रहने वाले समुदाय को भारी टैक्स और शोषण का सामना करना पड़ा था और 1669 में गोकुल जाट के नेतृत्व में उन्होंने विद्रोह कर दिया। इस किताब में ये भी लिखा है, ‘आर्थिक मुश्किलों और औरंगजेब की धार्मिक नीतियों के कारण जाटों में नाराजगी बढ़ती गई। मुगल सेनाओं को 1669 के विद्रोह को दबाने के लिए कई महीनों तक संघर्ष करना पड़ा और जाटों ने अपना प्रतिरोध जारी रखा।’ 4. गुरु अर्जुन देव, गुरु तेग बहादुर की शहादत को भी शामिल किया इस किताब में सिखों के प्रतिरोध और गुरु अर्जुन देव व गुरु तेग बहादुर की शहादत के बारे में भी विस्तार से बताया गया है। इसमें बताया गया है कि 17वीं सदी की शुरुआत से ही सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव के कारण सिख मामलों में मुगल राज्य का दखल बढ़ता गया। इस चैप्टर में 1582 में उदयपुर के पास देवेर की लड़ाई और असम में अहोम प्रतिरोध (जिसमें 1671 की सरायघाट की लड़ाई भी शामिल है) का भी जिक्र है। 5. चालुक्य वंश की रानी नायकी, मुहम्मद गोरी के युद्ध किताब में चालुक्य वंश की रानी नायकी देवी से लेकर उल्लाल की रानी अब्बक्का चौटा तक के संघर्ष का जिक्र किया है। शुरुआती हमलावरों का दक्कन (दक्षिण भारत), मालवा, कश्मीर और राजस्थान के भारतीय शासकों ने सामना किया और उन्हें खदेड़ दिया। चौलुक्य साम्राज्य की रानी नायकी देवी ने 1178 में माउंट आबू के पास मुहम्मद गोरी को हराया था। इसके साथ ही काकतीय साम्राज्य की रुद्रमा देवी का भी जिक्र है, जिन्होंने 1262 से 1289 तक दिल्ली सल्तनत से संघर्ष किया. उल्लाल की रानी अब्बक्का चौटा ने पुर्तगाली नौसेना को हराया था। 6. देवी की तलवार, 7वीं सदी के अन्नमराजा का जिक्र किताब में लिखा है कि भारत में देवी पूजा की पुरानी परंपरा रही है। 7वीं सदी से कई राजा-राजकुमार लड़ाई के समय काली, दुर्गा, भवानी और शक्ति के दूसरे रूपों को बतौर रक्षक याद करते थे। एक चैप्टर में बताया गया है कि बस्तर के शासक अन्नमराजा को उनकी तलवार माणिक्यदेवी (दंतेश्वरी) से मिली थी। विजयनगर के कुमार कंपन ने सल्तनत की सेनाओं के खिलाफ देवी से मिली तलवार का इस्तेमाल किया था। 7. टैक्स पॉलिसी, धार्मिक नीतियों का भी जिक्र आम लोगों में 1669 में गोकुल जाट के नेतृत्व में जाट विद्रोह का जिक्र है, जो भारी टैक्स और औरंगजेब की धार्मिक नीतियों के खिलाफ था. 1686 में सिनसिनी और सोगर के जमींदारों का विद्रोह भी शामिल है। हमले और प्रतिरोध की कहानियां ज्यादा
NCERT की इस नई किताब के बाद आलोचकों का तर्क है कि पहले ‘सहयोग और मिले जुले कल्चर पर जोर दिया जाता था लेकिन अब वह ‘हमला और प्रतिरोध’ के नजरिए को पढ़ाया जा रहा है। बता दें कि ये किताब नए एकेडमिक सेशन के शुरू होने के पूरे छह महीने बाद जारी की गई। इस किताब का पहला पार्ट जून में जारी किया गया था। ————————- ये खबर भी पढ़ें… NCERT 9वीं की सोशल साइंस, गणित की किताबें जारी:आधा सेशन बीतने के बाद आईं किताबें नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए क्लास 9 की 2 संशोधित किताबें लॉन्च की है। पूरी खबर पढ़ें..
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