गुरुग्राम में सेक्टर-14 के पास सिग्नेचर टावर से माता रोड की तरफ जा रही एक सीएनजी कार में कटारिया चौक के नजदीक अचानक भीषण आग लग गई। गनीमत रही कि आग की लपटें उठते ही चालक ने सूझबूझ दिखाई। उसने तुरंत कार रोकी और नीचे कूद गया। इस वजह से उसकी जान बाल-बाल बच गई। देखते ही देखते पूरी कार आग की ऊंची लपटों और काले धुएं के गुबार से घिर गई। यह हादसा मुख्य मार्ग पर हुआ। इसके कारण कटारिया चौक और माता रोड की तरफ जाने वाले रास्ते पर कुछ समय के लिए वाहनों की रफ्तार थम गई। राहगीरों में डर का माहौल बन गया। लोगों ने तुरंत इस घटना की जानकारी स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड को दी। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ी मौके पर पहुंची। फायर फाइटर्स ने तुरंत मोर्चा संभाला और कड़ी मशक्कत के बाद कार में लगी आग पर काबू पाया। हालांकि, जब तक आग बुझाई जाती, तब तक कार पूरी तरह जलकर कंकाल बन चुकी थी। बोनट से धुआं निकलते ही चालक ने दिखाई सूझबूझ प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार सामान्य रफ्तार से सिग्नेचर टावर की तरफ से आ रही थी। जैसे ही वह कटारिया चौक के पास पहुंची, उसके बोनट से अचानक धुआं निकलने लगा। इससे पहले कि चालक कुछ समझ पाता, धुएं के साथ आग की लपटें दिखाई देने लगीं। चालक ने बिना समय गंवाए कार को सड़क के किनारे रोका और तुरंत बाहर की तरफ छलांग लगा दी। चालक के उतरते ही आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। चंद सेकंड के भीतर ही पूरी कार धुआं-धुआं हो गई और आग की तेज लपटें आसमान छूने लगीं। शॉर्ट सर्किट या सीएनजी लीकेज की आशंका सड़क पर चलती कार को आग का गोला बनते देख वहां से गुजर रहे दूसरे वाहन चालक भी सहम गए। उन्होंने अपनी गाड़ियां दूर ही रोक लीं। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि कार में आग शॉर्ट सर्किट या सीएनजी किट में लीकेज के कारण लगी हो सकती है। हालांकि, आग लगने के सही कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस और तकनीकी टीम जांच कर रही है। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ और चालक समय रहते सुरक्षित बाहर निकल आया। क्रेन से हटाई गई कार, यातायात सामान्य किया विशेषज्ञों का कहना है कि सीएनजी कारों में नियमित रूप से किट की जांच करानी चाहिए। गर्मियों और उमस के मौसम में गाड़ियों के इंजन जल्दी गर्म होते हैं। ऐसे में तारों में घर्षण या लीकेज बड़े हादसे की वजह बन सकता है। पुलिस ने दमकल विभाग की मदद से जल चुकी कार को क्रेन के जरिए रास्ते से हटवाया। इसके बाद इस मार्ग पर यातायात को दोबारा पूरी तरह सामान्य किया जा सका।


